Friday, 14 April 2017

जाति से नफ़रत न करें

योगी जी का  एक खाना बनानेवाला मुस्लमान है इस पर आज सवाल  उठे।  वैसे उस मैं कही कोई तथ्य नहीं था पर मुसलमान  एक धर्म है और जो व्यक्ति देश मैं किसी भी पद पर है चाहे नेता हो या सरकारी  ऑफिसर उन्हें जातिगत भेद भाव करने का अधिकार नहीं मिल जाता है  अगर रसोइया मुसलमान होता तो यह उनका बद्दप्पन होता  हम उसके हाथ का क्यों नहीं खा सकते विचारों से नफरत होनी चाहिए व्यक्ति से नहीं जो देश के विरोध मैं बात करते हैं वे अस्पृश्य  हैं न कि  जाती से ये मत भूलो कि भाजपा की जीत मैं मुसलमान महिलाओं का बहुत  बड़ा हाथ है रही मीट खाने की बात तो आज शाकाहारी बहुत काम ही हैं  ब्राह्मण तो दबा के मीट खाते  हैं।  एक नेता जी विदेश गए वहां वे गे का मीट खा रहे थे किसी ने टोका नेताजी ये क्या भारत मैं तो  आंदोलन चल रहा है गाय पूज्य है और आप ? तो नेताजी बोले  "ये विदेशी गाय  है भारत की नहीं " यह ही हमारा दोहरे मानदंड हैं। 

Tuesday, 11 April 2017

सजा किसको

आज समाचार मैं प्रमुख खबर थी कि  एम्बुलेंस को रास्ता न देना भारी पड़  सकता है।  मानवीयता के नाते यह परम आवश्यक है हम एम्बुलेंस को रास्ता  दें क्योंकि उस के अंदर मरीज अधिकतर  गहन चिकित्सा के लिए शीघ्रता से ले जाया जाने वाला होता है एक एक पल की उसे जरूरत होतीहै न जाने किस एक पल की कमी की  वजह से उसकी सांस डोर  टूट जाये न जाने किस का सुहाग उजाड़ जाये किस का लाल खो जाये या किसके पिता का प्यार  चला जाये और बच्चे अनाथ हो जाएँ  .  लेकिन  यह भी आवश्यक है कि  एम्बुलेंस मैं मरीज ही हो  न कि  बस अड्डे  से स्टेशन  से लायी  सवारी हो  अस्पताल वालों के रिश्तेदार इधर से इधर जाने के लिए सवारी के रूप मैं जाते है उसे गाड़ी की तरह प्रयोग लेकर  हूटर बजा रास्ता साफ़ करवा कर पीछे वालों को चिढ़ाते भाग जाते हैं  भारत मैं सुविधाओं का दुरूपयोग पहले होने लगता है ा
जैम  मैं फंसी  एम्बुलेंस लाख हूटर बजले  कूद कर या उड़ कर तो जाएगी नहीं  तब किस को सजा होगी एम्बुलेंस के आगे वाली गाड़ी  या जाम  के सबसे आगे वाली गाड़ी या अड़े टेड़े खड़े सड़क के वाहनों पर  या बीच सड़क पर रुक कर बात करने वालों पर या किसी की भी लापरवाही हो चाहे स्वयं तेज गाड़ी चला कर मरने फिर उसके रिश्तेदार  रास्ता रोक देते है और तब न जाने कितने बच्चे  एग्जाम देने से रह जाते है कितने मरीज डैम तोड़ देते है और कितनो की ट्रैन निकल जाती है तब किसको सजा होगी 

Tuesday, 4 April 2017

जो पूज्य है

ftls iwtk tkrk gS 'kk;n balku dh fQrjr gh gS fd og mlls gh lcls T;knk uQjr djrk gS blfy;s mldk fo/oal dj nsrk gSA xaxk ;equk dks iwT; cuk;k D;ksafd thou j{kd gSa ty gh thou gS mls LoPN j[kuk balku dk drZO; gS u vkt ls chl iPphl o’kZ iwoZ ufn;ksa esa lkcqu ls ugkuk Hkh fuf’k) Fkk Qwy p<+k;s tkrs Fks vkSj ?kkV j{kdksa dk drZO; Fkk lkjs Qwyksa dks lM+us ls igys ikuh esa ls fudky ysA dNqvksa dh eNfy;ksa dh es<+dksa dh Hkjekj jgrh FkhaA tks gj oLrq dks [kk tkrs gSA NksVs cPps ds 'ko vo”; cgk;s tkrs Fks ij os rqjUr typjksa }kjk xM+i dj fy;s tkrs FksA Luku ?kkV fu;r jgrk Fkk vU; ?kkV ij ugkuk fuf’k) jgrk Fkk vkSj dNqvksa dh iwjh Vksyh mlh ?kkV ij jgrh Fkh ysfdu ufn;ksa ls dNq, gVk fn;s x;s balku vklkuh ls Luku dj ys ysfdu balku dh vDy gh ikuh esa pyh xbZ mlus lokZ= Luku 'kq: dj fn;k igys diM+s /kks;s fQj ?kjksa dk dwM+k cgkuk 'kq: fd;k vkSj vc jlk;u ;qDr tgjhyk dwM+k cgkus yxsA unh u gks xbZ dpM+s dk fMCckA D;ksafd og iwT; gS gekjh j{kk djrh gS blfy;s mldh j{kk gekjk drZO; ugh gS tc og gekjh j{kd gS rks viuh j{kk ugh dj ldrhA

blfy;s cM+s cM+s x.kifr nsoh Lo:i cukrs gSa mUgsa izfrfBr djrs gSaA izfrfBr djus dk vFkZ gS ewfrZ esa Lo;a bZ”oj vkdj cSB x;k cl gks xbZ iwtk pyks fudyks ?kj ls vkSj /kS xaxk th esa /kS tequk th es cl bruh gh vkLFkk gS vkxs Mwc ejks pqYyw Hkj ikuh esaA vc ;g vyx ckr gS iDds lhesaV ls cuk;s tgjhys pednkj jlk;u yxk;s vkSj gksM+k gksM+ esa Å¡psa vkSj Å¡ps cuk;s euks Vuksa Qwy p<+k;s vc lM+ks ikuh esa vkSj ikuh Hkh dkSu lk ogh ftls mUgsa ihuk gS fQj vc nks’kh dkSu ljdkj nks’khA ljdkj jksd nsrh gS rks vkLFkk ij xgjh pksV gS u tkus D;k dgj VwVsxk blfy;s ljdkj nks’kh gS vkSj filh dkSu unh tks balku  mlds ty dks  ihdj ftank jgs blfy;s brus Åij ls nkSM+dj vk jgh gSA 

मेला

cpiu ds esys rek”kksa dk viuk vkuan Fkk A iwjk ifjokj lkFk tkrk Fkk ,lesa NksVs cM_s lc gksrs Fks Avf/kdrj firkth ,d Fkku [kjhn ykrs Fks lc cPpksa dh MªSl mlh ls cu tkrh Fkh ;gkWa rd fd ekWa dk Cykmt Hkh Hkkb;ksa dh ‘kVZ yM+fd;ksa dh Ýkd A vkSj esys vkfn esa rks lc ,d ls gh igurs Fks ftlls ;fn [kkstk;s rks 'kh?kz gh irk yx tk;s oSls esys esa ,d nwljs dk gkFk idM+ dj pyrs Fks vxj vkxs ihNs gksrs rks ik¡pksa HkkbZ cgu Vs<+s es<s+ gks tkrs ij gkFk ugh NksM+rs FksA ,d ckj NksVk HkkbZ NwV x;k FkkA ,d ne tSls Hkwpky vk x;kA ek¡ pkph cqvk vkSj lcls NksVs pkpk th gekjs cqtqxZ cu dj gesa esyk fn[kkus yk;s FksA ek= 17 o"kZ ds Fks ysfdu ml le; mudk cM+s gksus dk ;k vfHkHkkod cu dj vkus dh ftEesnkjh fn[kus yxhA mUgksusa lcdks ,d rjQ dj fn;kA ,d isM+ ds uhps pcwrjk cuk FkkA lcdksa cSBk fn;k vkSj mudk vkns”k Fkk dksbZ ;gk¡ ls tkuk ugh vHkh uUgsa dks ykrh gw¡ vkSj ys Hkh vk;s FksA ijUrq dqN {k.k igys gh mlls cM+k uudw ogha vkxs c<+dj ,d Bsys ij fcdrs NksVs NksVs f[kykSus ns[kus yxk mls ,dne ogk¡ u ns[k pkpk ,dne fc[kj x;sA

       pyks lc pyks okil pyks -------------------------vc ge lcds psgjs yVd x;sA yVd D;k x;s :¡vklsa gks x;sA pkpk ls vf/kd uudw ij xqLlk vk jgk FkkA uUgw dk rks gkFk NwVk Fkk uudw tcnLrh lkeus ls pyk x;k ;|fi oghaa Fkk eS dgha ugh x;k Fkk og viuh lQkbZ nsus yxk Lo;a mls Hkh vius ij xqLlk vk jgk Fkk fd ,d feuV ds fy;s nks dne D;ksa c<+k ij fQj ek¡ us viuk fu.kZ; fn;k fd ugh pyks vc /;ku j[kuk Bhd gS pyks ykykth dqN ugh lc Bhd ls pysaxsa vc vk;s gSa rks ns[k gh ysaA

Sunday, 19 February 2017

मम्मी सच बोलो

    मधु ने आश्चर्य से अपनी मम्मी की ओर देखा। अभी उसके गाल पर मम्मी की उंगलियों के निशान थे और उसकी बड़ी बड़ी आंखों में आंसू। आज मधु का परीक्षा फल आया था सब में जैसे तैसे पास इसी बात पर मम्मी ने कसकर चांटा लगाया था और अब विमला आंटी से कह रही थी हमारी मधु तो फर्स्ट आती है हमें कोई परेशानी नहीं। वह तो कभी फर्स्ट तो क्या पहले दस बच्चों में भी नहीं थी।
‘मैं फर्स्ट... नही आई हूँ ’कह पाती कि मम्मी ने डांटते हुए कहा, जाओ हाथ मुँह धोओ यह तो होता ही रहता है अबकी बार सही।
विमला की आंखों में संशय देख सुनीता बोली, ‘अरे! विमला बहन आज ही तो रिजल्ट आया है इस बार दो नंबरों से पीछे रह गई है ,सैकिंड आई है तबसे रो रो कर बुरा हाल कर रखा है। अब कान्वेट स्कूलों में एक एक नंबर से कम्पटीशन रहता है।’ विमला के दोनों बच्चे सरस्वती स्कूलों में पढ़ रहे थे। सुनीता के चेहरे पर गर्व का भाव था।
मधु जब तक तैयार होकर आई तब तक कमरा बहुत सी आंटियों से भर चुका था। अज घर में किटी पार्टी थी। कमरा हाय! नमस्ते जी नमस्ते से गूँज रहा था। सबका विषय बच्चों की अंग्रेजी स्कूलों की पढ़ाई का भार और उनका रिजल्ट था। मधु ने नेहा और क्षिप्रा को देखा। मधु को देखते ही उसकी मम्मी बोली, मधु अपनी सहेलियों को बाहर लॉन में ले जाओ।
झूले पर झूलते क्षिप्रा नेहा से बोली,‘नेहा मेरी कौन सी रैंक आई है ’
       ‘मेरी सेविनटीन्थ आई है ’
       ‘पर पता है तेरी मम्मी गोयल आंटी से कह रही थी कि तू फर्स्ट आई है,मुझे तो हंसी आ रही थी’
       ‘मम्मी की क्या मम्मी तो  आंटी से कह रही थी  कि तू फर्स्ट आई है ’ नेहा ने बडों की तरह गर्दन मटकाते हुए कहा ‘फर्स्ट तो हमेशा दीपा ही आती है या निकिता ’
मधु की समझ में नहीं आ रहा था कि सब मम्मियॉं झूठ क्यों बोलती हैं । कल मम्मी सेल में दोसौ रूपये की ड्रैस लेकर आई और बारह सौ की बता रही थीं । अनू तो कह रही थी हम बड़े होटलों में शाउी ही में जाते हैं पर उसकी मम्म्ी कभी किसी होटल का कभी किसी होटल का नाम लेकर कहती हैं कि  डिनर वहॉं किया । पर जब कि खाली चाट खाकर वापस आ जाते हैं ।ऊपर से यह फर्स्ट आने की बात खूब रही ।यहॉं तो सबके बच्चे फर्स्ट आते हैं । अपने गाल को सहलाती हुई भी वह हंस पड़ी । तभी चलने के लिये नेहा की मम्मी ने आवाज लगाई तो झूला छोड़ सब अंदर आ गईं
  तभी एक महिला बोली, ‘मधु रिजल्ट दिखाना अपना।’
‘रिजल्ट ’भरे हुए गले से मधु जोर से बोली, ‘मैं नहीं दिखाऊँगी अपना रिजल्ट। मैं नेहा क्षिप्रा कोई भी फर्स्ट नहीं आता। मैं तो अर्थमेटिक में फेल हो गई हूँ। फर्स्ट तो हर साल दीपा आती है। ओर बताऊँ छुट्टियों में मम्मी कहीं पहाड़ वहाड़ नहीं जाती बस नानी घर रहकर आ जाती है।’
मम्मी की तीखी आवाज उसके कान में पड़ी ,‘मधु...मधु क्या बात है जाओ यहॉं से।’
‘नहीं मैं सब बताऊँगी। सब मम्मियाँ झूठ बोली है ? झूठ क्यों बोलती है यह मेरी फ्राक ़़़़’  ‘ मधु ज्यादा बड़ों के बीच नहीं बोलते ’ मम्मी चकी तीखी आवाज से रोती हुई मधु अपने कमरे में जाकर चादर ओढ़ कर लेट गई। मन ही मन डर से कि आज अभी और पिटाई होगी। लेकिन फिर भी उसे बहुत अच्छा लग रहा था कि वह सब कह आई।   

नया जीवन


एक धनी किसान के दो पुत्र थे। छोटा पुत्र पिता के कठोर अनुशासन से घबड़ाता था। उसे हाथ खोलकर खर्च करने का शौक था। वह समझता पिता के पास इतना धन है पर वो हम पर खर्च करना नहीं चाहते। वह प्रतिदिन पिता से झगड़ा करता। एक दिन उसने पिता से कहा, ‘पिता् जी मुझे मेरा हिस्सा दे दो। मैं अपना जीवन अपने ढंग से निर्वाह करूँगा।’
पिता ने सारा धन दो हिस्सें में बाँट दिया। छोटा पुत्र अपने हिस्से का धन लेकर विदेश चला गया। धनी व्यक्ति को देखकर अनेकों चापलूस उसके साथ मिल गये और सारा धन शौक मौज में खत्म कर दिया। शीघ्र ही वह बहुत गरीब हो गया। यहाँ तक कि उसे नौकरी करके पेट पालना पड रहा था। उसने सूअर चराने की नौकरी की। कभी कभी भूख से व्याकुल वह सूअरों के लिये बनाया खाना भी खा जाता था।
जब बहुत परेशान और दुःखी हो गया तो उसने सोचा मेरे पिता के यहाँ तो बहुत से नौकर हैं और बहुत अच्छा खाते पीते हैं। मैं यहाँ भूखों मर रहा हूँ क्यों न पिता के घर जाकर नौकरी कर लूँ। जाकर पिता से कहूँगा मैंने आपके और भगवान के प्रति गुनाह किया है मुझे माफ कर दीजिये तो अवश्य पिता मुझे माफ कर देंगे और मैं कहूँगा कि मुझे अपने नौकरों की तरह ही रख लीजिये।
वह वापस पिता के घर पहुँचा। लेकिन जब उसके पिता ने उसे देखा तो दूर से ही दौड़ कर उससे गले मिले। पुत्र ने पिता के गले में बांहें डाल दी और रोते हुए बोला,‘ पिता जी मैंने पाप किया है मैं आपका पुत्र कहलाने लायक नहीं हूँ। आप मुझे अपने यहाँ नौकर बना कर रख लीजिये।’
लेकिन पिता ने नौकरों को बुलाकर अच्छे वस्त्र मंगाये ,‘मेरे पुत्र के लिये सर्वोत्तम वस्त्र लाकर पहनाओं। उसके हाथों में अंगूठियाँ पहनाओं और पैरों में कीमती जूते। आज हम अपने पुत्र की वापसी का जश्न मनायेंगे क्योंकि अब तक वह मृत था अब जीवित हो गया है वह खो गया था अब फिर से मिल गया है।’
पुत्र पश्चाताप की अग्नि में जलता पिता के पैरों पर गिर पड़ा।


Friday, 17 February 2017

लड़कों को कुछ नहीं होता

jke us jko.k dk uk”k fd;k lhrk dk gj.k dj ukjh dk vieku fd;k bldh otg ls ,d iwjs jkU; dk fo/oal gqvk A nq;ksZ?ku us nzkSinh dk vieku fd;k rks egkHkkjr dk ;q) gqvk A vktdy  izfrfnu u tkus fdruh ukfj;ksa dk vieku] cykRdkj vigj.k  “kks’k.k ]gR;k gksrh gS fdlh dks dksbZ QdZ ugha iM+rk egt ,d feuV dk vkos”k “kkafr ds fy;s fd;k tkrk gSA ;gkWa ?kj /kj esa jko.k ls cqjs egkikrd gSa mudk uk”k cgqr vko’;d gS y{e.k us muij eksfgr ukjh dk vieku fd;k ftldh otg ls bruk cM+k dkaM gqvk A ;gkWa ij vusdksa ,sls nq’V jk{kl gSa tks eksfgr gksdj udkjus ij rstkc Qsad nsrs gSa Hkh’k.k ;kruk blfy;s fd yM+dh muds dqfVy fopkjksa ls lger ugha A ,d yM+dh blfy;s ;g lc ;kruk lgrh gS D;ksafd og pyrs lM+d okys yM+dksa ij mYVs lh/ks okD; ugha cksyrh A yM+dksa dks ekWa btktr nsrh gS fd og yM+fd;ksa dks NsMs+ muds ?kj okys bl cgknqjh ij “kkcklh nsaxs galsaxs gekjk csVk jfl;k gS d`’.k dUgS;k gS ij yM+dh dks ?kj ls u fudyus ij etcwj djsaxs A ;gkWa Hkh ukjh gkjh gS og i<+ ugha ldrh]dgha tk ugha ldrh D;ksafd Mj gS og yksQjksa }kjk mBk u yh tk;s ml ij rstkc u Qsadk tk;s mlds pfj= dks gh nkxh crk fn;k tkrk gS]yM+dksa dk D;k gS mudks dqN ugha gksrk /kksiksaN lkQ A yM+dksa ds fy;s lc tk;t gS A

Thursday, 9 February 2017

क्या यही सच है

कोई व्यक्ति पूर्ण नहीं होता कितना ही सफल व्यक्ति  अगर जीवन के पृष्ठ पलट कर देखेगा उसे अनेकों गलतिया भूलें नजर आएँगी कि अगर यह किया होता तो कितना अच्छा  होता या यह न किया होता तो कितना अच्छा  होता  पृष्ठ पलटते  भी हैं फिर सोचते हैं मत देखो भूलों को अब भूल नहीं करेंगे पर फिर करते हैं। जैसे जैसे उम्र बढ़ती है तब भूलों का एहसास परिजन आँख मैं ऊँगली  डाल  डाल कर करते हैं कि आपने गलती की इस लिए हम बर्बाद हुए खास कर बच्चे जब किये का प्रतिफल न देकर न किये पर ऊँगली उठाते है तब जीवन की निस्सारता  समझ मैं आती है तब  भारतीय संस्कृति का महत्त्व समझ मैं आता है क्यों ज्ज्वन का अंतिम सत्य वनवास  है  कल्प वास वानप्रस्थ हैं  क्योंकि शांति तब  मन दूसरी तरफ लगाना  ही श्रेयस्कर है।  हमारे एक प्रिय सज्जन ने बहुत छोटी सी दूकान  से बच्चों को पढ़ाया लड़कियों की शादी की घर बनाया  और दूकान को शोरूम मैं परिवर्तित किया तब तक शरीर थक गया और पुत्र ने काम संभाल  लिया  कुछ रूपया ब्याज पर उठाया उठाया जो मार गया  अब पोते बड़े हो गए हैं अब उन्हें तन यह है कि उन्होंने पैसा बर्बाद कर दिया  इसके लिए हर व्यक्ति नाराज है  जो कर दिया तो क्या इतना भी नहीं करते यह उलाहना है  जो व्यक्ति युवावस्था से प्रौढ़ावस्था तक एक एक पैसा बचाकर परिवार को पलट रहा अभावों मैं भी खुश था आज आँख मैं आंसू हैं 

Sunday, 5 February 2017

शादी दो पहलवानों का मिलन

जिस समय शादी की रस्म निभाई जाती है दुल्हन को लाल जोड़ा  पहनाया जाता है  अर्थात खतरा सामने है संम्भल  जाओ लेकिन नहीं उस समय तो पति बनने के शौक  मैं उस खतरे को लाँघ जाते हैं फिर भी घर वाले प्रयत्न मैं रहते हैं कि संभल  जाओ और हाथ मैं हाथ देकर जोश आजमाइश का मौका  देते हैं लगता यही है कि  दो पहलवान दांव खेलने से पहले हाथ मिला रहे हैं लेकिन नहीं पति लोग ज़िद्दी किस्म के होते हैं सामने वाले को कमजोर समझ जुट जाते हैं दाव पेंच मैं। पर यह नहीं जानते बूढी बड़ी बलवान। 

Sunday, 22 January 2017

नया क्या वास्तव मैं नया है

नया वर्ष आ गया , फिर से हम अपनी अपनी दीवारों से कलैंडर उतार देंगे क्या वास्तव में कुछ नया होता है ,,।फिर नई तारीखें आयेंगी एक  साल पुरानी तारीख नई होकर झड पुंछ कर चमकेगी पर वही रहेगी कदन वही रहेगा वैसे ही़ । मौसम भी तो वही आता है पर कुछ बदलता नहीं है । एक नया संकल्पलेते हैं कि हम आने वाले वर्ष दुनिया बदल देंगे । चाहते हैं कि हमारे लिये संकल्प को निभायें दूसरे । हम अपने को नहीं बदलेंगे । वही 26 जनवरी आयेगी ,बड़े बड़े नेता अफसर देष भक्ति के गीत गायेंगे और नहीं बता पायेंगे कि यह गणतं़त्र दिवस है या स्वतंत्रता दिवस , झंडे का कौन सा रंग ऊपर रहता है और किसलिये ये रंग लिये गये हैं वे एक ही रंग जानते हैं वह है सत्ता का रंग और उसके लिये वे फिर से देश बेचने के लिये तैयार हो जायेंगे ।
      बसंत के आते ही बेटियों को शिक्षित करने के लिये  हम बेचैन हो उठेंगे क्योंकि ,क्योंकि सरस्वती शिचा की देवी है तथा देश को शिक्षित करना हतारा कर्तव्य है । लेकिन शिक्षा के लिये आवंटित पैसे को  समाज के लिये नहीं अपने घरों को भरने के लिये बेचैन हो उठते हैं लाखों बच्चों के नाम स्कूल में लिख जाते हैं पर स्कूल खाली  शिक्षक नदारद और कागजों में सब मौजूद बच्चे सड़क पर और शिक्षा की कीमतें बढ़कर जमीनी कारोबार करती रहती हैं ।
      होली के साळा सद्भाव का पाठ पढ़ाते हैं बुरार्द की होली जलती है और अधिक सांप्रदायिकता फैल जाती है । अब जरा जरा सी बात पर एक दूसरे के धर्म आहत हो जाते हैं । समाज में बबाल फैलाना है तो कही भी कुछ अपमानजनक लिख दो या मांस उछाल दो  । बवाल तैयार चाहे जितना उपद्रव करालो हमारी युवा शक्ति बेकार है ही  दिशा हीन है कुठित दमित भावनाऐं सामने उछाल मारती हैं । उनका उपयोग कुचक्र रचते हुल्लड़बाज । कही गाय का मसला तो कहीं पैगम्बर के लिये कहना कोई मंदिर में गाय काट देगा ।इसलिये कि वर्तमान सरकार को गाली दे सके और अपना वोट बैंक तैयार कर सकें और समान लूटकर बेगुनाहों को उनके न किये गये गुनाहों की सजा दें ।
     शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित हर वर्ष करेंगे पर नये नये शहीद समाने आयेंगे । देष को आजादी दिलाने के लिये जान गंवाने वाले अब शहीद नहीं हैं अब देश के लिये लड़कर जान गंवाने वाले अब शहीद नहीं हैं हॉं भमल से सीमा लांघने वाले शहीद हैं या उपद्रव कर जेल गये लोग शहीद हैं ।
      पर्यावरण दिवस मनायेंगे जोर शोर से पेड़ लगाते फोटो खिचायेंगे किर भूल जायेंगे कि वह डाली कहॉं सूख रही है । चुपचाप पेड़ काटकर बिल्डिंग बनवायेंगेगणेशजी की पूजा करेंगे ,देवीजी के आगे नाचेंगे दशहरा मनायेंगे जमुना गंगा को प्रदूषित कर प्रसन्न हो रहे हैं हमने देवता मना लिये अब हमारा कौन बिगाड़ कर सकता है ।दो अक्तूबर के साथ तहखानों में पड़ी गांधीजी की तस्वीर चमकायेंगे ।उनकी बातों को दोहरायेंगे ।उनके बताये मार्ग पर चलने के लिये प्रतिज्ञा करेंगे फिर भूल जायेंगे अगले वर्ष तक के लिये ।
   रावण जला रहे हैं उसने सीता का अपहरण किया लेकिन सीता को आहत नहीं किया यहॉं अबोध कन्याऐं लड़कियॉं, महिलाऐं दुंर्दान्तों के हाथों दुंर्दशा प्राप्त कर मार दी जाती हैं जैसे किसी रबर के खिलौने को तोड़ा मरोड़ा और फैक दिया ।उन्हें कुछ नहीं होता सुघारने के नाम पर पुरस्कृत किया जाता है ।
    नव भोर की आशा में फिर कलैंडर बदलता है लेकिन परिस्थितियॉं और अदतर होती हैं बात असहिष्णुता भेदभाव जातपॉंत मिटाने की स्त्रियों के उन्नयन की भ्रष्टाचार मिटाने की करेंगे । अपना देना पड़े तो गाली देंगे और लेना पड़े तो अधिकार । चाहेंगे पल भर में दुनिया बदल जाये साफ हो स्वच्छता हो क्योंकि कहा गया है पर हम खुद कुछ नहीं करेंगे गंदगी फैलायेंगे और गाली देंगे कि सफाई नहीं हुई ।
    पाकिस्तान को धोखेबाज कहकर गालियॉं देंगे पर अपने देश के गद्दारों को कुछ नहीं कहेंगे जो असली भितरघाती हैं । लंका रावण की वजह से नहीं गिरी विभीषण की वजह से नष्ट हुई। धिक्कार तो ऐसे लोगों को है । 

Friday, 20 January 2017

किसकी रचनाएँ


सर फरोशी  की तम्मन्ना  किसने लिखी  है 


^ljQkjks”kh dh reUuk vc gekjs fny esa gS
ns[kuk gS tksj fdruk cktq, dkfry esa gSA*
 ;g xty jke izlkn fofLey dh ekuh tkrh gSA ysfdu blds ys[kd gSa fcfLey vthekonhA gk¡ jkeizlkn fcfLey bldh iafDr;k xkrs cgqr f”knRr ls Fks Loa; Hkh “kk;j Fks blfy;s ;g mudh xty ds :i esa izfl) gks xbZA



न  किसी  की आंख का नूर  किसकी रचना है 

^u fdlh dh vk¡[k dk uwj gWwa* ;g cgknwj “kkg tQj dh xty ekuh tkrh gS ysfdu ;g muds thou ij mrj iwjh jgh Fkh fy[kh ;g tkfulkj v[rj ds firk eqtrj [kkjkcknh }kjkA


Tuesday, 17 January 2017

पैसा किन पर खर्च

ऐसे बहुत से लोग हैं जो वह पैसा खर्च करते हैं जो उन्होंने कमाया नहीं है उस चीज को खरीदने मैं खर्च करते हैं जिसकी उन्हें आवश्यकता नहीं है और उन लोगों पर प्रभाव ज़माने के लिए करते हैं जिन्हें वे पसंद नहीं करते। 

Thursday, 12 January 2017

किसिंगर का aphar

dhflaxj dk vigj.k

  gsujh dhflaxj tc vesfjdk ds lsØsVjh vkWQ LVsV Fks mUgksaus vius vaxj{kd ls iwNk ]^ vxj esjk dksbZ vigj.k djus dh dksf”k”k djs rks vki D;k djsaxs \*
^fQØ u djsa * vaxj{kd us tokc fn;k]^ ge vkidks thfor ugha ys tkus nsaxsa *



fuDlu vkSj phu dh nhokj

izslhMsaV fuDlu ls  phu dh ;k=k ds le; phu dh nhokj fn[kkdj iwNk fd vki bl fo”kky nhokj ds fo’k; esa dqN dguk pkgsaxs \*
^gkW* fuDlu flj fgykdj cksys ^okLro esa ;g fo”kky nhokj gS *




Hkk’k.k esa dqN Fkk ugha

xsjkMZ QksMZ ds ikl vksgkek esa Hkk’k.k nsus ds cknuscjkLdk esa ,d cw<+h vkSjr vkbZ vkSj cksyh ]^lquk gS jkr dks vkius Hkk’k.k fn;k Fkk *A
^vjs ] oks dqN ugha Fkk * QksMZ us uezrk ls dgk
^gkWa eSaus Hkh ;gh lquk Fkk *A cw<+h vkSjr eqLdjkrs flj >qdk dj cksyh


हद से गुजर गई माँ

gj gn ls xqtj xbZ ek¡
cPpksa ds fy;s cktkj esa mrj xbZ ek¡
ek¡ ds ilhus ls ?kj esa egdk, xqykc
vius vjeku [kqn gh dqrj xbZ ek¡
tc ls og vkbZ ?kj esa
vkSyknksa dk dguk gS lq/kj xbZ ek¡
cgw csVs us fd;k Fkk tku ysok geyk tc iqfyl vkbZ rks eqdj xbZ ek¡
vc dsoy ;knksa esa utj vk;sxh rsjh nqfu;k NksM+ dj Åij x;h ek¡
Qwy nqckjk ugh f[kyrs tue nqckjk ugh feyrs
feyrs gSa yksx gtkjksa ij ek¡ cki fQj ugh feyrs
ek¡ Hkys gh i<+h fy[kh u gks ij lalkj dk nqyZHk egRoiw.kZ Kku ek¡ gh i<+krh gS

tjsZ esa pedrk xkSgj ugh ns[kk lwjt us Hkh dHkh uhps mrjdj ugh ns[kk
egcwc gks chch gks cgu gks fd csVh ek¡ tSlh eqgCcr dk leqUnj ugh ns[kk

eq>s bl nqfu;k esa yk;k eq>s cksyuk pyuk fl[kk;k
oks ekrk firk rqEgsa cnu eSus fdLer ls rqEgsa ik;k
eS tcls tx eS vk;k cuh rc ls “khry Nk;k
dHkh lgyk;k xksnh esa dHkh da/kks ij fcByk;k
eS mBkdj lj py ik¡Å dgh gkFk ugh QSykÅ eq>s bruk bl yk;d rqeus fd;k gS
eq>s tx dh jhr fl[kkbZ eq>s /keZ dh ikB i<+k;k
dHkh flj ij gkFk j[kdj cl I;kj gh I;kj yqVk;k


dk”k% [kqf”k;ksa dh nqdku gksrh vkSj gesa mldh igpku gksrh
lkjh [kqf”k;k¡ [kjhn dj csVh dh >ksyh esa Mky nsrs
pkgs mu [kqf”k;ksa dh dher gekjh tku gksrh

;s I;kj Hkh vthc gS ek¡ ls gks tk;s rks iwtk
vkSj cki ls gks rks bTtr
HkkbZ ls gks rks fo”okl
vkSj cgu ls gks rks dbZ

ysfdu chch ls gks rks lHkh dgrs gSa ukyk;d tks: dk xqyke gS 

Monday, 9 January 2017

हिंदी साहित्य

fons”kksa esa dHkh fdrkc gtkjksa ls de ugha Nirh tc fd ;gkWa rhu lkS dsrkc Nkius ij Hkh izdk”kd ;g dgrk gS fd fdrkc fcdh ugha gS A Hkkjr esa cPPksa esa cM+rh mnklhurk ds fy;s D;k dsoy cPpksa dh ekufldrk esa cnyko gS D;k cnyko foKku ds vusdksausd vkfo’dkj nks’kh gSa ftUgksaus gekjh iqLrdksa  dk fofue; [kRe dj fn;k gS ;k ge Ko;a nks’kh gSa fd ge chl#i;s dk tjk lk fpIl dk iSdsV cPpksa dks fnyk nsaxs cPps dks pkdysV fnyk nsaxs ;g lkspdj fd vax nsg yxsxh ij ekufld [kqjkd fdrkc ds :I esa dnykus dks rS;kj ugha gSa iqLrd fnykus ds uke ij dg nsaxs D;ksa csdkj iSls Qsadjgk gS blls rks dqN [kkys A dons”k esa vki Vªsu esa c; esa nsf[k;s lcds gkFk esa v[kckj i= if=dk ;k iqLrd gksxh [kjhndj ysaxsa vkSj le; i<+dj O;rhr djsaxs u fd b/kj m/kj nwljs dh xfrfof/k;ksa dks ns[krs gq, ;k Åa?krs gq, A i<+uk ge yksx dsoy Ldwy dkWyst rd gh lhfer j[krs gSa og Hkh dkslZ esa ikl gksus yk;d tc rd ge i<+uk viuk fu;e ugha cuk;saxs lkfgR; dh vksj mnklhurk gh jgsxh A

loky lkfgfR;d mnklhurk dk ugha loky dsoy fgUnh lkfgR; dh mnklhurk dk gS A fons”kh Hk’kk esa fy[kk Hkkjrh; lkfgR; [kec fcdrk gS vkSj i<+k Hkh tkrk gS pkgs mls i<+us ds ckn[g eglwl gks fd le> ugha vkrk fd ys[kd D;k dguk pkgrk gS ftlds vanj dsoy nhurk ghurk vkSj vO;ofLFkr mns”;ghu ys[ku gks rc Hkh og cgqr lQy gksxk A

Tuesday, 3 January 2017

अपने से सवाल

“kk;n dHkh [kqn ls loky ugh fd;k ugh rks tcko t:j feyrkA ge ftanxh esa dHkh gkjs rks dHkh thrs Hkh gSA gkj ij gekjh fgEer u VwVus ik;s blfy;s gkSlyk dk;e j[kuk gksxk dHkh vkSjksa dk vkRefo”okl ns[kdj fgEer tcko ns xbZ rks dHkh fgpd us jkLrk jksd fy;k us tkus fdrus dkj.k gSA bl uknku fny dks le>kus ds ysfdu :c: gksuk iM+sxkA
       bl leanj eSa bruk ikuh ugh gSA ftruh fd gekjs fny esa I;kl gSA bl lwjt esa bruh xehZ ugh gS ftruk gekjs Hkhrj tks”k gSA vius dks VVksyk Hkhrj fdlh dksus esa fdrus gh le; ls lks;k gS og dksbZ vksj ugh rqEgkjk ctwn gSA mls txkvks D;ksfd ftanxh jkr ugh lqcg gSA


माँ

माँ vxj Fkkel vYc ,Mhlu vius cpiu esa nksckjk ykSVrs rks fuf”pr gh mudh ek¡ muls dgrh Fkkel eq>s xoZ gS fd rqeus cYc dk vkfo"dkj fd;k gSA ysfdu pyks vc tYnh djks bl cYc dks cq>kvks vkSj vius fcLrj es tkvksa ek¡ dHkh ugh cnyrhA ek¡ cuuk [kwclwjr [;ky gSA tc vki ,d ek¡ cu tkrh gSa rks [;kyksa es Hkh vdsyh ugh jg ldrhA ,d ek¡ ges”kk nks ckj lksprh gSA igyh ckj cPPks ds fy;s nwljh ckj vius fy;sA ek¡ dk fny cgqr xgjk gksrk gS vkSj mldh xgjkbZ esa flQZ {kek gh feyrh gSA dqy feykdj ek¡ gh ,d ,slh Jfed gS tks yxkrkj fcuk NqÍh ds dke djrh gSA os fujUrj fl[kus okyh ikB”kkyk dh f”kf{kdk,sa gSaA ,d cPps dks bl nqfu;k esa ykus dk fu.kZ; djuk okdbZ egku {k.k gksrk gSA ek¡ cuus dk eryc ;g gS fd vkidk fny fd vkidk fny vkids “kjhj ls ckgj fudy dj ,d fnu vkids pDdj yxkus okyk gS vkSj <sj lkjh “kjkjrsa djus okyk gSA og {k.k tc ,d cPpk bl nqfu;k esa vkrk gS Bhd mlh iy ,d ek¡ Hkh tUe ysrh gSA blls igys mldk dksbZ vkfLRo ugh gksrkA ,d L=h rks ges”kk ls gksrh gS ysfdu ek¡ ughA ek¡ rks dkQh ubZ gksrh gSA ,d firk Hkh vius cPps ds fy;s dkQh vgfe;r j[krk gSA ysfdu mldh vgfe;r flQZ ;gh rd lhfer ugh gksrh gS fd vkf[kj og vius cPps dh ek¡ dks fdruk I;kj djrk gSA ,d e”kgwj tSfol dgkr gS  Hkxoku gj txg ugh gks ldrk blfy;s mlus ek¡ dh jpuk dhA ek¡ ,d cSad dh rjg gksrh gS tgk¡ ge vius nq[kksa vkSj ijs”kkfu;ksa dks tek djrs gSa bl nqfu;k esa flQZ ,d gh [kwclwjr cPpk gS vkSj og bl nqfu;k dh gjsd ek¡ ds ikl gSA
       bZ”oj us vkneh dks lcls [kwclwjr pht ek¡ ds :i esa nh gSA ,d nqdku esa enlZ Ms dk ,d dkMZ j[kk gqvk FkkA ml ij fy[kk Fkk & ek¡ eq>s og izkFkZuk ;kn gS tks vDlj vki esjs fy;s jkst nksgjkrh gksA dkMZ ds vanj okys fgLls ij fy[kk gqvk Fkk& bZ”oj djs fd ;g izkFkZuk,sa vki esjs fy;s ges”kk djrh jgksA
       enZl Ms iwjh nqfu;k esa euk;k tkrk gSA ysfdu lHkh txg bldh rkjh[k vkSj fnu vyx vyx gSA vesfjdk esa enlZ Ms dk vk;kstu ebZ ds nwljs jfookj ds fnu fd;k tkrk gSA vkSj Hkh dbZ nwljs ns”k esa tSls MsuekdZ] fQuySaM] bVyh] VdhZ ] vkLVªsfy;k vksj csfYt;e Hkh Bhd blh fnu enlZ Ms ds :i esa eukrs gSaA vtZsVhuk esa vDVwcj ds nwljs jfookj dks ek¡ ds fnu ds :i eas ekU;rk iznku dh tkrh gSA 11 ebZ dks iwjh nqfu;k esa varjjk"Vªh; enlZ Ms ds :i esa euk;k tkrk gSA bl mRlo dks izkphu xzhl ls tksM+dj ns[kk tkrk gS xzhd nsrdFkkvksa esa nsoh fj;ks dk mYys[k nsorkvksa dh ek¡ ds :i esa fd;k tkrk gSA mUgh ds lEeku esa ,d mRlo dk vk;kstu fd;k tkrk FkkA bls enlZ Ms dk iqjkRo Lo:i ekuk tk ldrk gSA bl fnu xzhd yksx vPNs idokuksa ds lkFk vPNs is; nsoh fj;k dks lefiZr djrs FksA 1907 ds nkSjku fQykMsfYQ;k dh ,d Ldwy Vhpj ,u ,e tkjfol us enlZ Ms dks jk"Vªh; Lrj ij ekU;rk fnykus dk iz;kl “kq: fd;kA os bl dke dks viuh ek¡ ,u esjh fjCt tkjfol ds izfr vknj tfy ekurh Fkh mUgksus ljdkj dks lSdM+ksa i= fy[ksA lkFk gh mUgksus jk"Vª ds lHkh cM+s vkSj izfrf"Br yksxksa dks [kr fy[ks rkfd os viuh ekrk ds lEeku nsus ds fy;s ljdkj ij enlZ Ms ?kksf"kr djus dk nckc Mky ldsA 1914 esa ,uk dh esgur jax ykbZ vkSj jk"Vªifr cqMjks foYlu us ebZ ds nwljs jfookj dks enlZ Ms ds :i esa eukus dh ?kks"k.kk dj nhA rc ls vc rd ;g ijEijk cjkcj dk;e gSa ,uk ml fnu ppZ xbZA mlds gkFkksa esa mldh ek¡ ds ilanhnk lq[kZ xqykc FksA

हारें नहीं

fopkjksa ds cht rqe cksrs pyks
dHkh rks Qwy Qy yk;sxs
tks NksVs ls ikS/ks vHkh nh[krs gSa
fdlh fnu rks oV o`{k cu tk;sxsa

vf/kdrj tc O;fDr gkjus yxrk gSA mls va/kdkje; txr esa dksbZ jkg ugh feyrh lw>rh rc og ml “kfDr”kkyh dh “kj.k esa tkrk gSA izkFkZuk dk :i ;k ek/;e dqN Hkh gks ml “kfDr dh LohÑfr gesa ruko jfgr djrh gS gesa yxus yxrk gS og lp gh lgkjk nsus ds fy;s gkFk c<+k jgk gSA

gj lqcg dqN nsj dks viuh ck¡g
LoxZ dh f[kM+dh dh pkS[kV ij fVdkdj vius Hkxoku dks ns[kksa
ân; ml fnO; n”kZu dh >yd fy;s fnu dk lkeuk djus dh rkdrsa cVksj yks

e/kqj e/kqj esjs nhid ty
;qx ;qx izfrfnu izfr{k.k izfriy
fiz;re dk iFk vkyksfdr dj
lkSjHk QSyk foiqy /kwu cu
e`nqy ekse lk /kqysa js e`nqru
ns izdk”k dk flU/kq vifjfer
rsjs thou dk v.kq xy xy
iqyd iqyd esjs

Nyd jgh eLrh _rq ?kj ls eLr gq, lc yksx
>we >wedj ukp jgs lc yxk Hkax dk Hkksx
vkbZ en e/kqjl Nydkrh jax fcjaxh gksyh
eLrh esa Hkj xkrh fQjrh gqfj;kjksa dh Vksyh
gksyh dk jaxhu ioZ ;g jax jaxhys eu Hkh

}s"k ?k`.kk rt izse jax esa jax vkt rks ge Hkh 

अच्छी बातें

vPNk ugh yxrk

dqN yksxksa dks dqN ckrsa vPNh gksrs gq, Hkh vPNh ugh yxrhA felky ds rkSj ij datwl dks nku djuk vPNk ugh yxrk yksHkh dks ek¡xus okyk vPNk ugh yxrk pksjks dks izdk”k vPNk ugh vPNk ugh yxrkA :ioku dks cq<+kik vPNK ugh yxrk ij iq:"kxkfeuh L=h dks ifr lgokl vPNk ugh yxrkA fu/kZu dks /ku lEiUu yksx vPNs ugh yxrs vkSj tc dksbZ O;fDr fdlh ekufld “kksd ;k “kkjhfjd O;kf/k ls ihfM+r gksrk gS rc mls dqN Hkh vPNk ugh yxrkA tSlk fd “kk;j tukc vyh okyh vklh us dgk gs fd ftUnxh ds fy;s galuk Hkh t:jh gS exj fny cq>k gks rks yrhQs vPNs ugh yxrs A

cqjk ugh yxrk
dksbZ dq:Ik ;kuh cnlwjr O;fDr e/kqj Hkk"kh fouez lsokHkknh vksj vPNs LoHkko dk gks rks cnlwjr gksrs gq, Hkh cqjk ugh yxrkA /kS;Z] vksj larks"k /kkj.k djus okys dks vHkko cqjk ugh yxrk] oL= /kkj.k vkSj lLrs gks ij /kqys gq, vkSj lkQ gksrs cqjs ugh yxrs Hkkstu Hkys gh Lokfn"V u gks ij rktk o xje gks rks cqjk ugh yxrk vkSj O;fDr LoLFk vkSj eu izlUu gks rks dqN Hkh cqjk ugh yxrk gS


प्रार्थना


जीवन सितार  का  तार 

xkSre cq} ls fdlh O;fDr us ,d ckj iwNk Fkk thou D;k gS\ xkSre cq} us dgk thou flrkj uked okn; ;a= dk ,d rkj gS ftls T;knk dl nsus ij ml ij laxhr dh Loj ygfj;k¡ ugh QwVrh oju~ rkj VwV tkrk gSA ;fn mls <hyk NksM+ ns rks Hkh ml ij laxhr dh Loj ygjh ugh QwVsxhA gk¡ mldh ,d e/;e voLFkk gS tgk¡ ;fn rkj dl x;k rks ogk¡ thou dk Loj QwVsxk vkSj ge ftls thou dgrs gSa mlesa :c: gksxsA



प्रार्थना 

lcls ifo= lR; :ih bZ”oj ls lEcU/k cukus d bPnk ls fd;k tkus okyk vk/;kfRed izLQqVu ;k iqdkj izkFkZuk dgykrh gSA
lewpk xxu vkjrh dk Fkky gSA bl fo”kky Fkky esa panzek vkSj lw;Z vkjrh ds nks nhid gSaA vlhe vkdk”k dk lewpk rkjkeaMy bl Fkky ds eksrh gSaA Lo; ey;fxjh ds panu dh lqxa/k /kwi dh lqxa/k gSaA pkjksa vksj cgrh gqbZ iou izHkq lPps ij paoj dj jgh gSA l`f"V dh lewph ouLifr ijekRek dh vkjk/kuk ds iq"i gSaA lc thoksa ds Hkhrj ct jgkA vufgr “kCn gh eafnj dh esjh gSA cg izHkq lc thoksa ds Hkhrj fuokl djrk gSAlc esa mlh dk T;ksfr dk izdk”k gSA lc tho mlh ls flafpr gSaA ml lPps dks tks Lohdk;Z gksrk gS ogh vkjrh ogh vjk/kuk cu tkrh gSA
       xxu esa Fkkyq jfo panq nhid cus
       rkjQ eaMy tudq eksrh
       /kwi eyvkuyks io.kq pojks dsj
       lxy cujkbZ Qwyr T;ksfr
       dSlh vkjrh gksbZ Hko [kaMuk rsjh vkjrh
       vugrk lcn oktar esjh
       le efg tksfr tksfr gS lkb
       frl ns pkuf.k lHkh efg pku.kq gksbZ
       xq: lk[kh tksfr ijxV gksbZ

       tks freq Hkkos lq vkjrh gksbZ