Friday, 18 August 2017

बढ़ता सत्संग

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Thursday, 17 August 2017

सबको अपने चश्मे से देखना

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Monday, 14 August 2017

भूख का जिम्मेदार कौन

दिव्यांग माँ बेटे ने आत्महत्या  भूख से करली सीधे इसकेलिए भी सरकार दोषी कि योगी उसके घर क्यों नहीं देख कर ए कि वह भूख से मर रहा है जानना चाहूंगी माँ दिव्यांग थी  क्या बीटा भी दिव्यांग था  अगर थे तो दिव्यांग योजना मैं क्यों नहीं नाम लिखवाया वैसे मुझे मालूम है अगर योजना मैं नाम लिखा भी लेते तो बिना पहुँच  या बिना पैसे दिए वो  दिव्यांग योजना का लाभ नहीं उठा सकता था हमारे यहाँ  अफसर  बिना खये तो रह नहीं सकते चाहे बदन पर चीथड़े होंगे उससे भी कहेंगे जा चीथड़े को बेच दे पर तेरे को सांस भी तब ही लेने दूंगा  जब म्रत्यु सर्टिफिकेट देने मैं भी पैसे मांग लेते हैं उनकी आत्मा को क्या कहेंगे
वैसे लोग शराब पी लेंगे पर घर मैं दाना नहीं लायेंगे बैठे बैठे खाने को मिल जाये पत्ता न हिलाना पड़े यह कोशिश रहती है अगर काम करना चाहता  है तो जरूर मिलता है मैं बहुत से लोगो से मिलाती हूँ काम करने वालों की बहुत समस्या है काम नहीं करना चाहते  एक क्या कोई पडोसी रिश्तेदार कोई नहीं था फिर आजकल लंगर भंडारे इतने होने लगे हैं की भूख से मरना तब संभव है जब घर से भी निकलने न\मैं लाचार हों हर दिन तो किसी न किसी देवता के नाम है और भगवान् को मनाने की श्रद्धा बढती जा रही है
अब हर व्यक्ति यह चाहता हाउ बैठे बैठे बिना काम किये सर्कार आकर मुंह मैं खाना दाल जाहे की हम आभारी हैं की आप हमारे देश को आबाद किये हुए आओ दुनिया मैं आये यह हमारी जिम्मेदारी है
अनाथालय वृधाश्रम आदि की बाढ़ भी आई है सवाल है क्या ब्रधाश्रम होने चाहिए  

बच्चो के हत्यारे

अपना  काम   बनता   भाड मैं जाये जनता  जहाँ  यह प्रवृति है वहां लोग बंच्चों के प्रति अपनी सहानुभूती  दिखाते हैं तो दोगले चेहरे पर क्रोध आता है किसी भी राजनीतिक  पार्टी के समय कोई हादसा होता है अस्लिमुद्दे से ध्यान हटाने के लिए वर्तमान सरकार को कोसना प्रारम्भ कर दिया जाता है  फिर उसके विरोध मैं जूलूस नारे और गुंडों द्वारा लूटपाट शुरू कर दी जाती है  संवेदनाओं की बात करते हैं अगर अखबार उठायें तब देखें जब बलात्कार के बाद मर कर फांक दिया जाता है चाहे छ  महीने की बच्ची हो  या बीस साल की युवती  क्या वे बच्चियां नहीं हैं उनमें जान नहीं होती है क्यों उन्हें रबर की बेजान गुडिया सम्ह्ग लिया जाता है तब क्यों अखबार को पलट कर रख दिया जाता है  जेसे रोज की  बात है  भ्रूड  हत्या करने वाले बच्चों के हत्यारे नहीं हैं  बच्चों की म्रत्यु प्रकरण मैं सधे सरकार को दोषी कहा  जरूर सरकार को दोषी ठहराने वाला असली हत्यारो को बचने की कोशिश मैं है क्योंकि असली दोषी कॉलेज प्रबंधक हैं अगर ओक्सिज़न  नहीं मंगाई थी तो मरीज भारती क्यों किये उन्हें दुसरे स्थानों पर क्यों नहीं भेजा गया अन्य वार्डों मैं भी  ओक्सिज़न  होगी नहीं तो तुरंत  मार्किट से क्यों नहीं  खरीदी गई जब पैसा था तो क्यों दबा कर रखा जा रहा था  क्यों नहीं स्थिति बच्चों के माता पिता को बताई गई  सरासर कॉलेज प्रसाशन और वहां तैनात स्टाफ बच्चों का हत्यारा है अखबार बजी करके लोग अपनी सियासत की रोटी सेक लेंगे पर पूछो उनसे जिन्हें मन्नतों के बाद नहना जीवन मिला होगा  सच दोलत बहुत से पापों का कारण है 

Thursday, 10 August 2017

आप बनो



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Sunday, 6 August 2017

antarअर्थ

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Wednesday, 5 July 2017

दूध बहाया

वेचारिक मतभेद  मानवीय मस्तिष्क की एक प्रक्रिया है  ये मतभेद आवश्यक  नहीं दूसरों के हित की सोचने के लिए हों हर जगह अपना स्वार्थ सिद्ध ही करना  प्रवर्ती है बात राजनीति की हो तब तो  और भी स्वार्थ  सर उठानेलागते हैं जनता के हित की बात करके नेता अपना उल्लू सिद्ध करते हैं  जनता के हित अहित से उन्हे कोई मतलब नहीं होता बस  विरोध करके सामने वाले को परेशां करना ही मंतव्य होता है
 यह क्या है  क्या सोच है विरोध प्रगट करने  के लिए दूध केन के केन  नदी मैं बहा दिए  यह विरोध नहीं अन्न का अपमान है  उन बच्चों से पूछो जिन्हें  दूध देखने को नसीब नहीं यह  घोर  अपराध  मन चाहिए जिस भी कार्य से जनता को पीड़ा पहुंचे ऐसे विरोध अपराध की श्रेणी मैं आने चाहिए। जाम  लगा कर मार्ग रोकने से किसका हित होता है  किसीका नहीं परेशान जनता होती है  आज एक परिवार  उस जाम की वजह से मौत के मुहमैं चला गया  जाम लगाकर नेतागिरी कर ली पर उजड़े जनता के घर। आरक्षण के नाम पर लोगों के घर जलना वहां फूंकना  उनकी बहन बेटियों को परेशान करना ये क्या  क्षमा करने योग्य है। जिस भी  प्रकार से जनता को परेशान करने वाले नेताओं को जनता को भी स्वयं बहिष्कार कर देना चाहिए। जाम लगन वालों को घर से नहीं निकलने देना चाहिए घर मैं वैठो