Wednesday, 29 November 2023

bridges

 1जॉन स्टुअर्ट मिलj] बर्ट्रेंड रसेल और जॉन मेनार्ड कीन्स ने सदियों पहले लोगों को सलाह दी थी] साधनों से ऊपर लक्ष्य को महत्व दें और उपयोगी की तुलना में अच्छे को प्राथमिकता दें"। हम इन बुद्धिमान दार्शनिकों द्वारा दोहराए गए सदियों पुराने ज्ञान पर ध्यान देने में असफल हो जाते हैं क्योंकि हमारी समकालीन संस्कृति में हम साधनों में इतने व्यस्त हो गए हैं कि हम साध्य को भूल गए हैं या अधिक सटीक रूप से कहें तो साधन और साध्य उल्टे हो गए हैं। दूसरे शब्दों में] हमारे साधन ही हमारे साध्य बन गये हैं। साधन-साध्य व्युत्क्रमण (एमईआई) की यह घटना जीवन के सभी क्षेत्रों में] व्यक्तियों] संगठनों] समाजों और देशों के स्तर पर हो रही है] हमें इसकी जानकारी भी नहीं है। जब हम इस तथ्य को भूल जाते हैं कि पैसा] प्रसिद्धि और शक्ति एक साधन हैं] साध्य नहीं और उनके तात्कालिक सुखों और जाल में फंस जाते हैं] तो हम गलती करते हैं और फलने-फूलने से चूक जाते हैं।

अमेरिका राष्ट्रीय स्तर पर साधन-साध्य व्युत्क्रम का एक प्रमुख उदाहरण है। विशेष रूप से अमेरिका का हवाला देना महत्वपूर्ण है क्योंकि] नोबेल पुरस्कार विजेता वैक्लाव हेवेल के शब्दों में]  दुनिया जिस दिशा में जाएगी] उसके लिए संभवतः संयुक्त राज्य अमेरिका सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी लेता है"।♥

Bridges across humanity

 ण् तो वास्तव में फलने.फूलने के लिए हमें क्या चाहिए? विश्वास करें या न करें, उत्तर आपके विचार से कहीं अधिक निकट हो सकता है . और जब हम बच्चों का निरीक्षण करते हैं, तो उनके फलने.फूलने की आधारशिला आश्चर्यजनक रूप से सरल होती है।

मैं हमेशा छोटे बच्चों को खेलते हुए देखकर मंत्रमुग्ध हो जाता हूँ। वे इस पल में पूरी तरह व्यस्त हैं, वे पूरी तरह डूबे हुए हैं, बिना इस बात की परवाह किए कि कौन देख रहा होगा। वे अपनी भावना या स्नेह दिखाने में कभी नहीं हिचकिचाते, इसे निर्बाध रूप से बहने देते हैं, चाहे खुशी से गले लगाकर या जोर से हंसकर। जिज्ञासा के ये बंडल छोटे स्पंज की तरह काम करते हैंए जो कुछ भी उनके सामने प्रस्तुत किया जाता है, या जो कुछ भी वे खोजते और खोजते हैं उसे सोख लेते हैं। एक फूल की तरह जिसे पूरी तरह से खिलने के लिए हवा, पानी और सूरज के सही संतुलन की आवश्यकता होती है, बच्चे केवल प्यार करना, सीखना और खेलना चाहते हैं . और जब वे इन तीन आवश्यक गतिविधियों में संलग्न होते हैं तो वे फलने.फूलने की स्थिति में होते हैं। और क्या होगा अगर हम भी प्यार, सीखो और खेलो या एलएलपी को प्राथमिकता दें ? शायद हम भी खिल उठेंगे


Tuesday, 28 November 2023

Hindustan

 हिन्दुस्तान

हिन्दुस्तान हिंदू देष है पर हिंन्दू षब्द के लिये हमारे यहां इसे विषेष धर्म का पर्याय मान लिया गया है, जबकि सप्त सिन्धु अर्थात् यहां पर सात सिन्धु हैं। फारसी में हप्त हिन्दुस्तान हो जाने के कारण यह सिन्धु से हिन्दु हो गया। हिन्दुस्तान जहां पर हिन्दू रहते हैं और हिन्दू धीरे धीरे एक धर्म के रूप में प्रचलित हो गया जब कि यह जिस प्रकार इंगलैंड में रहने वाले अंग्रेज, अमेरिका में रहने वाले अमेरिकन हैं उसी प्रकार हिन्दुस्तान में रहने वाले हिंदू हैं।यह राष्ट्रीय एकता का षब्द हैं लेकिन अब इस एकता के लिये हमें भारतीय षब्द अपनाना हे । हम भारतीय हैं एक देष एक राष्ट्र ।

जो लोग एक विषिष्ट क्षेत्र में रहते हों जिनकी भूतकाल की स्मृतियों और भविष्य की आकांक्षायें समान हों और जिनमें एक होने की भावना और इच्छा हों वे एक राष्ट्र माने जाते हें ।जीवित मानव की तरह राष्ट्र के दो प्रमुख अंग हैं एक देष की धरती और दूसरी उसकी संस्कृति । धरती राष्ट्र का षरीर माना जाता है और संस्कृति उसकी आत्मा और दोनों के मेल से राष्ट्र बनता है ।

हिन्दुस्तान का जनमानस इस सारे विषाल क्षेत्र को एक देष और राष्ट्र मानता आया है, इसकी संस्कृति का आधार इसका चिन्तन और इसके साहित्य और कला में इसकी उपलब्धियां सभी महापुरुष और साझे सुख दुःख की स्मृतियां मिली जुली संस्कृति अथवा गंगा जमुनी संस्कृति की बात एकदम निरर्थक है, जब जमुना गंगा में मिल जाती है तो उसका पानी भी गंगाजल बन जाता है इसी प्रकार जो भी तत्व हिन्दुस्तान के साथ एक रूप हो गये  वे गंगाजल की तरह इस राष्ट्र का अभिन्न अंग बन गये । अलगाववाद की बात करने वाले राष्ट्र की अखंडता और एकता पर प्रहार है ।

राष्ट्र की एकता के लिये समर्पित भाव आवष्यक है उसके लिये मर मिटन की बात अपने को इसी राष्ट्र का मानने की बात । कुछ लोग इस विषाल देष की स्वाभाविक विभिन्नता के आधार पर बहुसंस्कृतिवाद वाला राष्ट्र कहा है। कोस कोस पर पानी कोस कोस पर बानी बदलती है ,परन्तु मन भारतीय हैै तो वह भारतीय ही रहेगा, अलगाववादियों का राष्ट्र की मूल धारणा में स्थान नहीं रहेगा ।

भारत में सबको अपन अपने ढंग से रहने सोचने और ईष्वर की पूजा करने का पूर्ण अधिकार है। ‘मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर करना। यह सह आस्तित्व का आधार है क्योंकि भारतीय मानव जाति को एक कुटुम्ब मानता है और कर्म पर विष्वास करता है। विचार स्वतंत्रता का पक्षधर है ,इसलिये राजनैतिक क्षेत्र में यह लोक तंत्र और पंचायत तंत्र का पक्षधर है । जहांतक मैं समझती हूं धर्म भाषा आदि से अलग मानवतावादी होना चाहिये ।


Monday, 27 November 2023

Bridges Across Humanity

            केवल एक सार्वभौमिक ईश्वर 

कुछ लोग ईश्वर शब्द के किसी भी वैध उपयोग से इनकार करेंगे क्योंकि इसका बहुत दुरुपयोग किया गया है। निश्चित रूप से यह सभी मानवीय शब्दों में सबसे बोझिल है। ठीक इसी कारण से यह सबसे अविनाशी और अपरिहार्य है। 1ऋ 

                                                                   . मार्टिन ब्यूबर 

सभी आस्तिक धर्मों मेंए चाहे वे बहुदेववादी हों या एकेश्वरवादीए ईश्वर सर्वोच्च मूल्यए सबसे वांछनीय अच्छाई का प्रतीक है। इसलिएए ईश्वर का विशिष्ट अर्थ इस बात पर निर्भर करता है कि किसी व्यक्ति के लिए सबसे वांछनीय अच्छा क्या है। 2 

                                                                    .एरिच फ्रॉम 

मुझे याद है जब स्टैनफोर्ड बिजनेस स्कूल के मेरे सहपाठीए डैन रूडोल्फए जो उस समय स्टैनफोर्ड बिजनेस मुझसे मिलने आए थे। स्कूल के मुख्य परिचालन अधिकारी थेए भारत में अपने परिवार के साथ कैलिफ़ोर्निया से मुझसे मिलने आए थे। । उनकी दो बेटियाँए क्रमशः सात और नौ वर्ष कीए जिनका पालन.पोषण एक कट्टर ईसाई परिवार में हुआए हिंदू पौराणिक कथाओं से काफी आकर्षित हुईं। 




1 मार्टिन बूबरए आई एंड तू ;न्यूयॉर्करू साइमन एंड शूस्टरए 1996द्धए 123.24। 

2 एरिच फ्रोमए द आर्ट ऑफ लविंगए फिफ्टीथ एनिवर्सरी एडिशन ;न्यूयॉर्करू हार्पर कॉलिन्सए 2006द्धए 



वे छोटी.छोटी मूर्तियां घर ले गईं, लक्ष्मी ;धन की देवीद्धए सरस्वती ;ज्ञान की देवीद्ध और गणेश ;सौभाग्य के देवताद्ध। बाद में एक दिनए जब एक बेटी कैलिफ़ोर्निया में स्कूल जा रही थीए तो उसकी माँ ने उत्सुकता से उसे परीक्षा के लिए शुभकामनाएँ दीं। उसने अपनी माँ को उस खुले दिलए चंचल आत्मविश्वास से आश्वस्त किया जो छोटे बच्चे अक्सर प्रदर्शित करते हैंरू श्माँए चिंता की कोई बात नहीं है। उसने अपनी माँ को उस खुले दिलए चंचल आत्मविश्वास से आश्वस्त किया जो छोटे बच्चे अक्सर प्रदर्शित करते हैंरू श्माँए चिंता की कोई बात नहीं है। मेरी एक जेब में गणेश और दूसरी जेब में सरस्वती हैं इसलिए मेरा पूरा ख्याल रखा जाता है!श्


Wednesday, 25 October 2023

soch se bahar

 हम प्रकृति की सुंदरता पर मोहित होते हंै या मानव की कृतियों पर अहा! कितना सुंदर है अदभुत् है हमारे अंदर प्रेम की भावना उपजती है हम प्रेम करना सीखते हैं साथ ही हम में सहनश्षीलता आती है । दुराग्रहों को छोडना पड़ता है अपनी मान्यताओं को घर पर पोटली बाॅंधकर छोडना पड़ता है क्योंकि हमें जो दूसरे करते है वही करना पड़ता है। हमें उस स्थान से कायदे कानून रीति रिवाजों के हिसाब से चलना पड़ता है । यात्रा इंसान का इंसान से प्यार करना है दूसरों पर विष्वास करना सिखाती है हम इसी विष्वास के साथ या़त्रा पर निकलते हैं कि हमारे साथ पूरी दुनिया है हमारे देखने का नजरिया बदल जाता है हमारी दृष्टि बदलती है हमारी सोच में बदलाव आता है और जो कुछ दूसरे का अच्छा लगता है उसे अपमान का भाव आता है तो अपने दायरे से बाहर निकलते हैं एक खींची हुई रेखा सोच से बाहर ।


Saturday, 21 October 2023

koi kam chota nahin

 महिलायें अपना पत अपने आप खो रही हैं। दूसरे धर्म के लड़के किसी काम को छोटा नहीं मानते,उन्होंने रचनात्मक कलात्मक और क्रियात्मक सभी कामों पर कब्जा कर लिया है नौकरी नौकरी न चिल्लाकर प्रतिदिन के आवष्यक कामों को अपना लक्ष्य बनाया और उस पर कब्जा कर लिया । गाड़ी मैकेनिक,बिजली नल आदि के अच्छे कारीगर दूसरे धर्म के ही मिलेंगे और वे बिना झिझक के यह काम करते हैं जब कि हिन्दू सरकारी नौकरी के पीछे भाग रहा है।

कौषल योजनाओं को बढ़ावा मिलना चाहिये,बचपन से ही केवल षिक्षा पुस्तकीय नहीं होनी चाहिये कलाकारी कारीगरी भी सिखानी चाहिये। छोटी उम्र से ही कल पुर्जों को खोलना लगाना आदि सिखाना चाहिये।इन सबके कारीगर दो दो तीन तीन हजार रुपये प्रतिदिन कमा रहे हैं अच्छे अच्छे इंजीनियर इतना नहीं कमाते होंगे। यह एक विचार है,केवल सरकारी नौकरी के लिये भागने से कहीं अच्छा अन्य काम है ।

आजकल हर परिवार का एक न एक बच्चा विदेष में है। षिक्षा यहां प्राप्त करते है ंसरकार और मां बाप उस पर पैसा खर्च करते हैं और जब ष्क्षिा प्राप्त कर लेते हैं तब विदेषों में बस कर नौकरी कर लेते हैं


Sunday, 15 October 2023

jeevan yatra hai

 जीवन यात्रा है 


यात्राएंे जीवन मे निर्भीकता लाती हंै हम यात्रा के समय अपने आपको पूर्ण रूपेण बदल लेते हैं हम हम नहीं होते उस समय हम अपने को जहाॅं होते हैं वहाॅ के वातावरण में बदल लेते हैं हम अपने को नहीं सामने वाले को देखते हैं तो वहीं की सोच उस समय अपनायेंगे। मैं हम मेें बदल जाता है हम देखते हंै हर जगह का इंसान एक ही है वही हंसना गाना रोना वही प्रकृति कहीं घने जंगल तो कहीं समुद्र लेकिन समुद्र में पानी किस तट से टकरा कर आया है नहीं कह सकते पहाड़ पर जमा बर्फ में किस देष के जल की बूंदे हैं पेड़ांेे के नीचे की मिट्टी किस प्रदेष से आंधी के संग आई है। इस मिट्टी में कौन कौन है किससे ष्षरीर के अंग समाहित है किस प्रदेष की जमीन से उड़ी है उसमें पवित्र आत्मा की खाक है या किसी पापी की कीडे मकोडे की हवा किस किस को छूकर आ रही है जिसे हम अस्पट मान रहें है हवा उससे लिपट कर आ रही है जैसे हमारे साथ छप्पा छाई खेल रही हो पहचान कौन किसके बदन के थपेड़े हंै या़त्रा में हम सब प्रदेशों के हम सफर हो जाते है। और हम स्वंय से दूर होकर उनमेें मिल जाते हैं। 

हम प्रकृति की सुंदरता पर मोहित होते हंै या मानव की कृतियों पर अहा! कितना सुंदर है अदभुत् है हमारे अंदर प्रेम की भावना उपजती है हम प्रेम करना सीखते हैं साथ ही हम में सहनश्षीलता आती है । दुराग्रहों को छोडना पड़ता है अपनी मान्यताओं को घर पर पोटली बाॅंधकर छोडना पड़ता है क्योंकि हमें जो दूसरे करते है वही करना पड़ता है। हमें उस स्थान से कायदे कानून रीति रिवाजों के हिसाब से चलना पड़ता है । यात्रा इंसान का इंसान से प्यार करना है दूसरों पर विष्वास करना सिखाती है हम इसी विष्वास के साथ या़त्रा पर निकलते हैं कि हमारे साथ पूरी दुनिया है हमारे देखने का नजरिया बदल जाता है हमारी दृष्टि बदलती है हमारी सोच में बदलाव आता है और जो कुछ दूसरे का अच्छा लगता है उसे अपमान का भाव आता है तो अपने दायरे से बाहर निकलते हैं एक खींची हुई रेखा सोच से बाहर ।