Friday, 13 October 2023

diya

 किसी ने कहा है

दिये से मिटेगा न मन का अंधेरा

धरा को उठाओ गगन को झुकाओ

बहुत बार आई गई ये दिवाली

मगर तम जहां था वहीं पर टिका है।

कहने को तो दियों को जलाकर हम दिवाली उत्सव मना लेते हैं परंतु प्रेम  प्रकाष का प्रतीक दिया जलना तो दूर टिमटिमाता भी नहीं है। पूजा अर्चनाओं के लिये दिये जलाऐ जाते हैं पर मन के दीपक बुझे तो बुझे रह जाते हैं,आरती में भी मन प्रकाषित नहीं होता । दीपक प्रतीक है प्रकाष का,अंधकार को मिटाने को माटी का दिया काफी नहीं है मन को प्रकाषित करने का,

‘धरा को उठाओ गगन को झुकाओ धरती और आकाष की तरह मनुष्य मनुष्य में जो भेदभाव है वह मिटना चाहिये जो दबा है तिरस्कृत है उसे उठाया जाये उसे अपने पंख तोलने और पगों को नापने का हुनर दिया जाये गगन जितना ग्रहण करता हे उतना दान भी करना जानता है।


Wednesday, 11 October 2023

deep

 nh;s dk lca/k ek= feêh ds vkoj.k ;k ik= ls ugha gS fn;k ckrh vkSj rsy ls feydj gh fn;k dgykrk gS D;ksafd rhuksa ,d nwljs ds layXu gSa ,d nwljs ds iwjd gSa i`Fkd jgdj fdlh dh viuh igpku ugha gS nh;k rsy vkSj ckrh ,sls gh gSa tSls czãk fo".kq egs’kA vFkkZr l`tudrkZ vFkkZr iSnk djus okyk] ftl ij lc dqN fVdk gS tks lcdk vk/kkj gS]nhid Hkh og vk/kkj gS og vkdkj¼ik=½ gS ftlesa ykS dk izdk’k dk tUe gksrk gSA fo".kq vFkkZr~ ikyudrkZ j{kk djus okykA rsy fo".kq dk izrhd gStks ckrh dks ikyrk gS mlds iksj iksj esa lapfjr gksdj mls ftank j[krk gS vius iy iy ds lkFk ls ckrh dks mToZfjr j[krk gSA mlds izdk’k dh ijofj’k djrk gSA egs’k vFkkZr~ lagkj djus okyk ckrh egs’k dk izrhd gS ;g va/kdkj esa QSys vU;k; ,oa /kkj.kkvksa dk lQk;k djrh gS blfy;s nhid ,oe~ vFkZ esa czãk fo".kq egs’k dk Hkh izrhd gSA nh;k vk’kk dk izrhd gS]uweu psruk ,oe~ uohu izsj.kk gS nh;s ls Hk; ,oe~ Hkze dk fuokj.k gksrk gS nh;s esa izk.k lapkyu ,oe~ pSrU; ’kfDr gksrh gS A

Monday, 9 October 2023

hamari prtibha

 हमारे देष की प्रतिभा हमारे देष का पैसा सब विदेषियों के काम आ रहा है। हमारे देष में रह जाते हैं जबरन पास किये जा रहे  अयोग्य लोग और वे ही कुर्सियों पर आरूढ़ होकर भ्रष्ट व्यवस्था बनाते हैं काम आता नहीं है कुर्सी पर बैठते हैं खैनी चूना फांकते हैं, बस फाइलें इधर उधर करते हैं अयोग्य लोग अपनी कुर्सी बचाने में लगे रहते हैं बस कुर्सी और पैसा यही उनका लक्ष्य रहता है काम गया खड्डे में, जनता जाये भाड़ में नेताओं का वोट तो पक्का है वोट और नोट की राजनीति में आम आदमी मर रहा है पिस रहा है और देष ?

हमें आभारी होना चाहिये स्वामी विवेकानंद का जिन्होंने अकेले पहल की और दंनिया को भौचक्का कर दिया भारत का गौरव वापस दिलाय


Sunday, 8 October 2023

rangoli

 रंगोली अर्थात रंगों की श्रंगला । रंगोली के बिना कोई पर्व उत्सव मांगलिक कार्य आदि अपूर्ण माना जाता है। षिव गौरा ,रामसीता के विवाह में भी रंगोली सजाई गई यह प्रमाण ग्रन्थों में है। इन्द्र के इन्द्रलोक में अप्सरायें विषेष रूप से रंगोली पर नृत्य का ष्षुभारंभ करती थीं। रंगोली ष्षुभ का प्रतीक है। वास्तु के अनुसार रंगोली घर की नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकालती है और सकारात्मक ऊर्जा को लाती है।यह सुख समृद्धि और खुषहाली का प्रतीक है। रंगोली को उत्तम स्वास्थ का प्रतीक माना जाता है। रंगोली दीर्धायु प्रदान करने वाली होती है । जिस तरह से अनेक रंग मिलकर एक रंगोली बनाते हैं उसी तरह से रंगोली परिवार की एकजुअता को दिखाती है रंगोली के माध्यम से हम अपने भावों को प्रकट करते हैं रंगोली सफलता का प्रतीक मानी जाती है।

जियें जीवन का हर पल किसी उत्सव के मानिंद

न जरने कौन सा पल करदे जिंदगी से जुदा ।


Saturday, 7 October 2023

kya hum sahi hain

 क्या सही क्या गलत ? हम क्या खा रहे हैं -

मिर्च - बीटा कैरोटिन और विटामिन सी का अच्छा स्त्रोत है ,बंद नाक खोलने में सहायक है,खून के थक्के न बनने देने में सहायक है ,खाने का स्वाद बढ़ाती है। षिमला मिर्च लो कैलोरी है हरी मिर्च में लाल मिर्च के मुकाबले अधिक न्यूट्रिटैंट वेल्यू है।एन्टी आक्सीडेंट का अच्छा स्त्रोत है 45 ग्राम लाल मिर्च में 65 मिली ग्राम विटामिन सी होता है 100 प्रतिषत आर डी ए , ऊतक निर्माण और कैंसररोधी तत्व होते हैं। मिर्च में पाये जाने वाले कैप्सीसिन तत्व जिससे तीखापन आता है वह रक्त में थक्के बनने से रोकता है,गठियावात से बचाती है। कीमो थैरेपी से होने वाले दर्द को भी कम करती है। मिर्च से अल्सर होने या अपच की बीमारी होती हे यह सिद्ध नहीं हो सका है


Friday, 6 October 2023

lottery

 लाटरी

रोमन सम्राट आगस्टस व नीरो ने निर्माण कार्य के खर्च के लिये लाटरी आरम्भ की। इंगलैंड की रानी ऐलिजाबेथ प्रथम ने लाटरी पर पुरस्कार की अनुमति दी थी। हमारे भारत में केरल के साम्यवादी मंत्रिमंडल ने लाटरी षुरू करके खूब पैसा कमाया है इसके पूर्व रूस की साम्यवादी सरकार ने दूसरे महायुद्ध का खर्च निकालने  के लिये लाटरी चलायी और एक लाख रूबल पुरस्कार की घोषणा की। भारत में ब्रिटिष राज्य में ही लाटरी का पा्ररम्भ हो चुका था। 1789 में पीटर मैसे कैसीन नामक व्यापारी ने स्टाॅक एक्सचेंज की इमारत बनवाने के लिये लाटरी की योजना सोची। उस समय स्टार पागोडा वाला 3.50 रु॰ कीमत का सिक्का चलता था। ऐसे एक लाख पगोडा के इनाम की घोषणा की गई जिसमें पहला इनाम पांच हजार पागोडा का था,फिर ढाई ढाई हजार के दो, एक हजार के पांच, पांच सौ के दस,,ढाई सौ के बीस ,एक सौ के पचास और पचास के  सौ था बीस पागोडा के 3212 यानि कुल 3400 पुरस्कार रखे गये थे। इसके अलावा पहला टिकिट लेने वाले को 500 और आखिरी टिकिट खरीदने वाले के लिये 360 पगोडा का पुरस्ैकार रखा गया था ।


Saturday, 6 May 2023

adani ambani ka rona

 ऽ रात दिन अदानी अंबानी का रोना रोने वाले ,चिल्लाने वाले अपने गरेबां में झांक कर देखें वे समाज के लिये क्या कर रहे हैंकेवल नौकरियों का रोना रोते हैं सबको सरकारी नौकरी चाहिये वह भी इसलिये कि काम न करना पड़े हराम की खाना चाहते है। ।हराम की खाने के लिये सरकार की नौकरी चाहिये जो लाखों लोगों को नौकरी देरहे हैं उन्हें ठलुए लोग सरकारी माल हजम करने वाले गाली दे रहे हैं। उनका स्तर उतना ही है कि वे बस गाली देलें ं उन्हें देष का समाज का कुछ पता नहीं बस बाबूगिरी करले बस हो जायेगा। अगर अंबानी अदानी जैसे लोग नहीं होंगे तो देष की अर्थ व्यवस्था चैपट हो जायेगी। छोटे से छोटा व्यपारी यहां तक कि ठेले वाला भी एक को तो नौकरी दे ही रहा है और सरकारी नौकरी करने वाला केवल उन्ही व्यपारियों के टैक्स के पैसे से हराम की खा रहे हैं । कुर्सी तोड़ते हैं और चले जाते हैं। निठल्ले लोगों को बड़े व्यपारियों को देख कर जलन होती हैंयदि वे हवाई जहाज में चल रहे हैं तो अपनी मेहनत के पैसे से सरकारी पैसे से नहीं । उनके सिर पर रात दिन तलवार लटकी रहती है। व्यापारियों को गाली देने वाले सोच कर गाली दें सोचलें कि वे किसकी दी हुई रोटी ख रहे हो । सरकार भी नौकरी उन्हीं के दम पर देगी

केवल गाली देना अकर्मण्य लोगों का काम हैया विपक्षी नेताओंका क्यों कि उन्हें गद्दी जो नहीं मिली इसलिये रोत रहो। 70 साल से केवल यही सुना जा रहा है कि नौकरी नहीं नौकरी नहीं सबको नौकर बना दो मालिक मत बनने दो मालिक बन गये तो सिर उठायेंगे।