Monday, 17 August 2026

naye avishkar

 हम असंभव को संभव नहीं मानना चाहते। बिना पंख हम नहीं उड़ सकते अनेकों प्रयोग हुए पर संभव नहीं हुआ । देवता ही उड़ सकते हैं,साधारण मनुष्य नहीं पर मनुष्य ने विमान बनाया फिर इन्तक्षि में पहुचा,चांद पर पहुंचा,और भी न जाने कहां कहां पहंुचना चाहता हैश्ह तभी संभव है ज बवह विश्वास करे। साधु नदी पर  चल रहा है, जरूर कुछ नीचे लगाया होगा,तब ही चल रहा है,तैराक नीचे जाकर देखते हैं पर कुछ नहीं मिलता,यह तो देवताओं के ही बस की बात है। पर संभव हुआ । नित्य नये आविष्कार सामने आते हैं,वे आते देवताओं की कल्पना सेही। वेद पुरान एवम् धर्म ग्रन्थों में कैसी कैसी कल्पनाएं हैंवे सब संभव होती जा रही हैं। संभवतः हमारा विज्ञान इतना ही उन्नत था ,तब ही अनेक अदभुत् कल्पनाऐं सामने आईं हैं । तैयार रहिये एक नये आविष्कार के लिए।

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