Saturday, 21 February 2026

Manav

 मानव 


मानव की उत्पत्ति कैसे हुई यह दुनिया की हर संसृति के मन में सवाल उठता रहता है ? प्राचीन ग्रीक कथाओं में मनुष्य या तो देवता जब शापित हुए तो मानव बने या मिट्टी और पानी से मनुष्य का निर्माण किया। बाईबिल में देा भिन्न कथाऐं मिलती हैं। एक कथा में जब ब्रह्मांड का निर्माण हुआ तब उसकी मिट्टी से मानव का जन्म हुआ। दूसरी कथा में अदम को देवताओं ने मिट्टी से बनाया फिर उसमें जीवन डाला। उसके बाद जानवरों का निर्माण किया। यही धारणा सुमेरियन सभ्यता में मनुष्य के निर्माण की पाई जाती है। 

बेबीलोन की सभ्यता में मनुष्य का निर्माण किंगू (ापदहनष्े ) के रक्त से हुआ है। प्रारम्भिक सुमेररियन पौराणिक कथा में निम्नह ने मिट्टी से मानव बनाया। ऐंकी ने भी मानव बनाने का प्रयास किया ,लेकिन उसका मानव संपूर्णता के साथ नहीं बना। वह निम्नह के प्रश्नों का उत्तर नहीं दे सकता था। वह खड़ा नहीं हो सकता था। झुक नहीं सकता था, वह रोटी तक नहीं पहुँच सकता था। इसी प्रकार ग्वाईमाला की पौराणिक कथाओं का मानव भी मिट्टी से बना था ओर खड़ा नहीं हो सकता था ,उसके पास अक्ल भी नहीं थी। उसे नष्ट कर दिया । दूसरी जाति मानव की लकड़ी से बनाई। यह प्रजाति ईश्वर में जरा भी विश्वास नहीं करती थी और उसका अनादर करती, बस अपने को ही मानती थी। दुनिया ने उनके प्रति विद्रोह कर दिया और वे अपने ही घरेलू जानवरों द्वारा नष्ट कर दिये गये। 

मनुष्य की तीसरी संरचना सफल हुई ,जिन चार व्यक्ति ने उनकी संरचना की वे मानव जाति के पूर्वज कहलाये। पत्थर, लकड़ी ,मिट्टी, दुनिया में अधिकांश स्थानों पर मानव के निर्माण में उपयोग में लाई गई। मनुष्य के शरीर में पाये जाने वाले रक्त, जीव, कीटाणु आदि सब बालू, पसीना, राख आदि समझा जाता है ,सब इन्ही से मनुष्य का निर्माण हुआ है। 

कहीं कहीं मानव का निर्माण किसी के बनाने से नहीं वरन् कहीं से प्रगट होने से हुआ। दक्षिणी अमरीका के रैडइंडियन मानते हैं कि मनुष्य कारू के कान से पैदा हुआ। दूसरी कथा है कि वह जमीन से निकला। दक्षिणी अमरीका में चाको मानव कुत्ते द्वारा जमीन खोदने पर निकला। कुत्ते  को जमीन में एक छेद में से गंध आई। वे मानव एक विशाल पेड़ की जड़ के अंदर थे जो कि बिखर गया, वे जड़ से बाहर मिट्टी में थे ,कुत्तों ने खोदा तो वो बाहर निकल आये। 

प्रथम मानव एक चिड़िया ने पहाड़ी पर बड़े से गड्डे में बने घोंसले में पाला। इंडोनेशिया में प्रचलित है कि पहला मानव अंडे से निकला। पूर्वी इंडोनेशिया का मानव कीड़े और लार्वा से जमीन से निकला। फिलीपींस में प्रचलित है कि पहले आदमी और औरत बांस के पेड़ के अंदर बने, जिसे समुद्र के किनारे एक चिड़िया ने चांेच से फाड़ा। फोरमोसा के अनुसार मानव का जन्म पहाड़ के दो भागों में फटने से उसके अंदर से हुआ। इंडोचाइना के  अनुसार मानव का जन्म टेडपोल के रूप में हुआ, फिर वह बढ़ता हुआ मानव हुआ। हर जाति का अपना विश्वास है , मान्यता है ,जितने मानव है उतनी ही उत्पत्ति कथायें हैं। 

मानव का दोहरा स्वभाव है ,कभी वह अच्छा होता है कभी बुरा, ग्रीक के अनुसार मनुष्य का स्वभाव पषुवत् है, लेकिन जब कभी वह अच्छा हो जाता है तब उसमें प्रभाव उस राख का है जिससे वह उत्पन्न हुआ है। टिटान की राख जो डाइनोसस जगरस को खाने के बाद बनी वही कुछ देवत्व उसके अंदर आ जाता है। 

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रोमानिया में प्रचलित है दानवों को मानव बनाने का विचार आया । उसने मानव के शरीर को सजाया, उसके शरीर को सजाने में उन्हें देवताओं की सहायता लेनी पड़ी। इसीलिये मानव में कभी दानव कभी देवत्व का भाव रहता है। 

हर देश के अपने धर्म ग्रन्थ होते हैं जिनमें पौराणिक कथाऐं समानान्तर चलती हैं लेकिन साथ ही जनश्रुतियाँ भी चलती हैं। हर जाति की हर कबीले की अपनी मान्यता हेाती थी, उनकी अपनी कथाएँ चलती थीं। स्लोवान की कहानी में मनुष्य का निर्माण देवता ने बालू के कण से किया। सबसे पहले उसने नाखून बनाये, जब वह काम कर रहे थे तब कुछ पसीना बालू पर गिरा, उससे मनुष्य बनाया। सही कारण है कि मनुष्य को रोटी पसीना बहाकर ही मिलती है। औरत का निर्माण इन्ही कथाओं के अनुसार पुरुष की नस से हुआ। बहुत जगह कहते हैं कुत्ते की पूॅछ से या दानव की पूंछ से हुआ। बोर्नियो में प्रचलित है कि औरत का निर्माण तलवार की मूठ से या हत्थे से हुआ। 

उत्तरी अमेरिका के इंडियन्स का पृथ्वी के निर्माण पर अधिक जोर है, मानव के निर्माण पर कम। पृथ्वी के निर्माण के साथ मनुष्य का निर्माण हो गया और उसकी आवश्यकता अनुसार वनस्पति आदि बनती गई। बहुत सी जातियाँ ऐसी भी हैं, जिनकी इस प्रकार की न कोई जनश्रुति है न कोई पौराणिक संदर्भ। एस्किमो में मानव की उत्पत्ति के विषय में किसी प्रकार की कथा प्रचलित नहीं है। पृथ्वी की उत्पत्ति की और मानव की उत्पत्ति की जनश्रुति सबसे पहले अमेरिकन  इंडियन्स के मध्य पाई गई। अधिकांष जातियों में मानव और पशु सभी की उत्पत्ति जमीन के अंदर से हुई है। दक्षिणी कैलीफोर्निया में मानव की उत्पत्ति विधाता (धरती को बनाने वाला ) के शरीर की खाल, लकड़ी रगड़कर उससे हुई और नोवाहो के कान से हुई। स्वाही के अनुसार मिट्टी राख और मोतियों से मानव को धरती बनाने वाले ने बनाया। अमरीका की रैड इंडियन जाति का निर्माण लाल मिट्टी से हुआ। सफेद मनुष्य का जन्म समुद्र के झाग से हुआ या सफेद मिट्टी से, नीग्रो का निर्माण काली मिट्टी से हुआ। मानव के बनाने में कभी कभी उससे भूल हो गई, और गलती सुधारी। पहले मानव के हाथ लचीले नहीं  थे तब छिपकलियों ने मानव को कहा कि वह उसके जैसे हाथ लेले। तब से मानव के हाथ लचीले हो गये। 

उत्तरी अमेरिका में कथा प्रचलित है कि पहले विधाता ने पुरुष की पौरुष ग्रन्थि उसके माथे पर बनाई फिर अन्य भागों में बनाया पर कहीं मन के अनुसार नहीं हुआ तो अंत में वर्तमान स्थान पर स्थित किया। 

जूनी की कथाओं अनुसार जब मानव पाताल से बाहर आया तब वह कुछ खा नहीं सकता था। उसके साथ उसका बड़ा भाई और छोटा भाई भी था। उन्होने उसके सिर को दो हिस्से में काटा दिया। जिस चाकू से काटा ,लाल पत्थर पर तेज किया था ,इसलिये होेठ लाल हो गये। बड़े भाई ने दो छेद बना दिये जिससे हवा अंदर जा सके। हाथ जालीदार थे उंगलियां काट कर अलग कर दीं। मानव के पंूछ और सींग तब भी थे। दोनों भाई हर घर में गये और पूंछ और संींग काट दिये जिससे मनुष्य बहुत खुश हुआ कि मुसीबत से छुटकारा मिला। 

मानव उत्पत्ति की बहुप्रचलित  कथा दक्षिणी अमेरिका के इंडियन्स मंे मिलती हैं। मानव का निर्माण मिट्टी से हुआ, वे अन्य स्थान से आये। कथाओं के अनुसार वे पाताल से आये। चाको मानव के निर्माण की जो कथा कहते हैं वह माया सभ्यता से मिलती हुई है। प्रकृति पुरुष ने मानव का निर्माण पहले पत्थर से किया, तब लकड़ी से अंत में मिट्टी से । वीराकोचा सभ्यता के अनुसार इंका देवता ने पहले सफलता पूर्वक दो जातियाँ बनाईं। पहले उस बनाये

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मानव को उसने पत्थर मंे बदला उसके बाद उसने एक दूसरी प्रजाति बनाई जो वर्तमान में पृथ्वी पर मिलती है। ताउलीपैंग इंडियन्स के अनुसार पहले मानव मोम से बनाया लेकिन वे सूरज की गर्मी से पिघल जाते थे, तब उसने उन्हें मिट्टी से बनाया। 

मुंडू यारूयारू विटोटा जातियों के अनुसार मानव आकाश मार्ग से आया। आकर प्रथम पुरुष गुफाओं में रहा। कास्नोवा के अनुसार मानव का जन्म विशाल दानव के अंदरूनी अंगों से हुआ जो बाद में डूब गये थे या वे बीज से उत्पन्न हुए। 

पहला मानव अंडे से हुआ, यह दक्षिणी अमरीका की धारणा है। उनकी पौराणिक कथाआंे में मानव अपने समाज में स्थान के अनुसार तीन अंडांे से उत्पन्न हुआ। तॉबा चांदी और सोने के अंडे से उसी प्रकार का वैभव उसे मिला। ये अंडे सूर्य देवता ने पृथ्वी पर भेजे। ये विशाल चिड़ियाओं द्वारा लाये गये और उन्होंने उसे सेया। 

भारतीय वेद , पुराणों के अनुसार मानव की उत्पत्ति ब्रह्मा जी द्वारा पंचतत्वों ( अग्नि ,जल, वायु,पृथ्वी और आकाश ) से की गई। ब्रह्म से आत्मा ,आत्मा से जगत की उत्पत्ति हुई । पृथ्वी सूर्य से निकला एक अग्नि पिंड है जो कालांतर में ठंडा हुआ और उस पर वर्फ और जल का निर्माण हुआ,जैसे जैसे धरती ठंडी होती गई चारों ओर जल ही जल हो गया और प्रथम जीव की उत्पत्ति जल में हुई। ब्रह्मा ने पंचतत्वों से निर्मित आत्मा का रूप धारण किया और वे ब्रह्मा नाम से जाने गये । ब्रह्मा ने अपने को दो भागों में विभक्त किया ,स्वयंभू मनु और शतरूपा। इस प्रकार भारत खंड  में मनुष्य जाति की उत्पत्ति हुई ।

कुछ दिन पूर्व न्यूयार्क टाइम्स में समाचार  प्रकाषित हुआ कि इस्त्राइल की एक खंडहर गुफा में मानव जबड़े का जीवाष्म मिला है। इसका अध्ययन करने पर वैज्ञानिकों ने मनुष्य की उत्पत्ति 1 ़77 लाख वर्ष से 1़94 लाख साल पहले होने का अनुमान जताया है। साइंस पत्रिका के अनुसार पहला इंसान अफ्रीका से करीब 2.20 लाख साल पहले बाहर गया होगा । इस़्त्राइल की इस गुफा से वैज्ञानिकों को जबड़े की हड्डी के अलावा कुछ सख्त पत्थरों वाले औजार भी मिले हैं,जिनसे पता चलता है कि आधुनिक मानव अफ्रीकी महाद्वीप को काफी पहले छोड़ चुका था। इसका मतलब यह हुआ कि अफ्रीका में आस्तित्व करीब तीन से पांच लाख साल पहले प्रकाष में आया । 




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