Tuesday, 8 April 2014

pyar

चार लकीरें चिंता की
जब गहरी होती जातीं  हैं
इच्छा कि बनती तस्वीरें
धुंधली पड़ती जाती हैं
मुस्कानों के बीज जरा से
बोकर तो देखो
होंठों पर मुस्कान किसी के
 दे कर तो देखो .
हर मिलने वाले कि चिंता
कुछ कुछ कम हो जाये
दुःख कि आग रही तो जग की
धरती जलती जाए
प्रीत प्रेम की  बारिश  बस
बरसा  कर तो देखो

kaliyan kam hai

सूर्य धुंधला धुंधला  सा है
चाँद कि रौशनी नम है
तारों का  नूर भी कहीं ज्यादा
और कहीं कम है।
टूट कर रोया था चाँद रात को
फूलों पर आंसू कि बूँद शबनम है।
लड़े थे कांटे भी खरोंचा था बहुत
तब भी गुलाब पर कलियाँ कम हैं।
धोकर डाले थे वस्त्र अपने तन के
अमावस के अँधेरे मैं कुछ तो दम है

Monday, 7 April 2014

mahila Divas

महिला दिवस आया और बीत गया  सयुक्त राष्ट्र संघ ने नारा दिया "महिला की बराबरी सबकी तरक्की "लेकिन  महिला कि तरक्की  कितनी। धीरे धीरे महिलाओं मैं बदलाव आ  रहा है वह बदल रही है  पर किस लिए क्या अपने अधिकारों  के लिए  या जागरूकता के लिए ,क्योंकि संयुक्त राष्ट्र संघ  महिलाओं के लिए हर वर्ष कोई भी एक नारा दे देता है।  लेकिन क्या नारा है यह तक एक से एक बोलने वाले वक्ता महिला के लिए काम करने वाले नहीं जानते हैं  तव कैसे महिला सशक्तिकरण के लिए प्रचार प्रसार  कर सकते हैं। वेसे देखा जाये तो बर्बरी किस बात की अगर महिला सशक्त है तो वह पुरुष से कहीं ज्यादा काम करती  है तब बराबरी से अधिक मान मिलना चाहिए ,महिला दो घरों की नींव है  वह पिता के घर कि नींव  है तो पति के घर की भी नींव  है क्यों महिला के विवाह के साथ दहेज़ समस्या जुडी हुई है ,वह दूसरे घर जाती है उसका घर संभालती है  उस घर कोजीवन देती है घर को वंशबेल देकर गुलजार करती है  तब फिर क्यों दहेज़ साथ लाये  जब वह एक महिला को खाना नहीं खिला सकता उसे  घर का दर्ज नहीं दे सकता इतना निकम्मा है तो विवाह का अधिकार नहीं है  क्या यह क्रय विक्रय का खेल है अगर औरत को दासी मान रहे हो तो दास पैसे देखाएर खरीदा जाता है दहेज़ देकर स्त्री पुरुष को उसके घर को खरीदती है और उसे कोई अधकार नहीं कि वह अपने माँ बाप के पास रहे वह खरीदा गया है उसे ससुराल मैं रह कर काम करना चाहिए। दहेज़ लेकर विवाह करनेवाला निकृष्टतम  व्यक्ति है  पति पत्नी रथ के दो पहिये हैं फिर दहेज़ लेने देने का कोई काम ही नहीं।

Tuesday, 25 March 2014

chunabi nata

जब तक वोटर वोट न देदे तब तक उससे नाता है
तू ही भइया  तू ही चाचा  तू तो मेरी माता  है '
उसके  साथ सड़क पर चलना  तब तक ही बस भाता है ,
फिर तो उसका रास्ता केवल संसद तक ही जाता है।
गले लगाए बड़े प्रेम से घर जाकर फिर नहाता है।
धुले हुए कुर्ते को भी फिर बार बार धुलवाता है।
इसके बाद गांव  का रिश्ता  तस्वीरों मैं पाता है
बिना काम  के करे कमाई स्विस बैंक मैं खाता है.

Thursday, 13 March 2014

purush soch

सत्ता की उंचाइयों  पर बैठे  समाज का मान सम्मान प्राप्त व्यक्ति  जब निम्न  श्रेणी  की हरकत करता है  और पकड़ा जाता है छेड़छाड़  या बलात्कार के जुर्म  तब सबसे ज्यादा  शर्म जिसको आती है वह है उसकी पत्नी  . हरकत उसका पति करता है समाज की  आँखों का ब्यंग झेलना उसकी पत्नी को पड़ता है कि वह अपने पति को सम्भाल  नहीं पाई  उंगलिया उसकी ओर  ही उठती हैं कि इसी का आदमी है जो इतनी ओछी हरकत करता पकड़ा  गया।  हर तरह से परेशानी औरत को ही झेलनी पड़ती है। वह घर भी नहीं छोड़  सकती  और घर मैं रहना जैसे काँटों पर बिंधते  रहना है  अपने अंतर्मन की व्यथा किसी से बाँट भी नहीं सकती  बल्कि क्लिंटन हिलेरी की तरह हाथ मैं हाथ दाल कर और खड़े होना पड़ता है दर्द बनता जा सकता है शर्म नहीं  बड़ी उम्र मैं तो जैसे पूरे जीवन कि तपस्या भंग हो जाती है  क्या पुरुष मैं सोचने समझने की  शक्ति है ही नहीं  जिस समय कुर्सी के मद मैं मस्त  अपनी उँगलियों को हिलता है तब सोचता है सब उसके इशारे पाए नाचेगे  क्योकि उसके पास सत्ता है वह ऊपर चढ़ने की सीढ़ी  है  तो लालच देने भर कि जरूरत है  वह यह नहीं सोचता कि इससे उसका घर  हिल जायेगा  उसके दिल मैं न घर का न समाज का खौफ होता है वह सोचता है ओरत को अपनी इज्जत का ख्याल रहता है वह किसी से नहीं कहेगी उसकी हरकत को सहन करेगी  क्योकि सहन करना औरत का धर्म है घर की स्त्री तो उसकी जागीर है वह जैसे चाहेगा  उपयोग करेगा उसके लिए औरत वस्तु है औरत धरती की तरह सहनशील है उस पर फावड़ा चलाओ  या कुल्हाड़ी  उस पर महल बनाओ या शराबखाने  सब उस को सहना  है पर यह नहीं सोच पता  वह दुर्गा भी है काली भी जिसके हाथ मैं भाला है

Monday, 3 February 2014

sandesh for Lovers

बसंत आ  गया  दिल की  कली मुस्कराई'प्रिया  या प्रिय  को सन्देश देने को बेक़रार है 'प्रस्तुत हैं  सन्देश

दिल यों ही किसी पर आता नहीं
प्यार यूं  हीं किया जाता नहीं
प्यार करो तो दर्द सहने कि आदत डाल लेना
क्योंकि यह वो दर्द है भूख से जाता नहीं

मोहब्बत बिन जिंदगी वीरान होती है
 अकेले हर राह  सुनसान होती है
एक प्यारे से दोस्त  का होना जरूरी है
क्यों कि उस् की  दुआ से हर मुश्किल आसान होती है

बदन पर सितारे यूँ  सिमटे हैं तुम्हारे
चाँद भी मदहोश है  बहके हैं सारे नज़ारे

मुझ से बिछड़ कर खुश रहते हो
मेरी तरह तुम भी झूठे हो
इक टहनी पर चाँद टिका था
मैं समझा कि तुम बैठे हो

लम्हे लम्हे मैं बसी है तेरी यादों कि महक
आज कि रात तो खुशबू  का सफ़र लगती है

है तुम्हीं से रोशन ये चाँद ये सितारे
नूर ही नूर है  दामन मैं तुम्हारे
मेरे घर मैं जो रखा कदम तुमने
तो जल उठे चराग सभी  और शाम हो गए सवेरे

Happy Anniversary To Aditya Alpna

मैंने देखा था रामेश्वरम्  मैं  शिव पार्वती  का मंदिर
बहुत ही भव्य  और था  सुन्दर
नहीं है बस यह मेरी कल्पना
मुझे लगा ये हैं आदित्य और अल्पना
अनेकों सूर्य मस्तक पर जगमगाते रहें
दक्षा और मनु के साथ  सदा मुस्कराते रहें
सुखी रहें स्वस्थ रहें प्रसन्न रहें
जीवन पथ पर साथ साथ बढ़ते रहें