Saturday, 14 February 2026

Adbhut hai sansar

 अदभुत् है संसार

जंजैहली से दो कि मी पीछे  मंडी जिले की ओर एक स्थन है पांडव शिला। एक चौड़ी चट्टान पर टिकी इस शिला की ऊँचाई लगभग 10 फीट तथा परिधि 42 फीट हे। इस शिला से संबंधित रोचक बात यह है आप इस भारी भरकम शिला को अपने हाथ की कन्नी उंगली से  हिला सकते हैं। इस चट्टान को बुलडोजर से गिराने का प्रयत्न किया गया क्योंकि डर था कि जो चट्टान उंगली से हिल जाती है कहीं गिर न जाये। गिरना तो दूर यह चट्टान अपने स्थान से खिसकी भी नहीं ।

ब्राजील में भूतल के नीचे अज्ञात लोक नगर - पुरातत्व अन्वेषण के इतिहास में पहली बार धरती पर अज्ञातलोक की सभ्यता होने का अकाट्य प्रमाण उस समय मिला जब ब्राजील में साओपोलो के निकट पहाडत्रों में प्राचीन कला शिल्पों की खोज करने वाले एक पुरातत्व दल ने पृथ्वी तल के नीचेएक ऐसे नगर की खोज की जहाँ आज से 6 हजार वर्ष पूर्व आात लोक के प्राणी रहते थे । 

जिस पुरात्त्व दल ने यह आश्चर्यजनक खोज की है उसमें बीस छात्र थे । इस दल के नेता डा॰जार्ज तिजोर थे । इन्होंने अपनी खोज का रोमांचक विवरण देते हुए बताया कि उनके दल का एक छात्र अनजाने में उस भूमि पर पहुंच गया जिसके नीचे अज्ञात लोक का नगर बसा था। 

अचानक वह ठोकर खाकर लड़खड़ाया तो देखा कि बीस फुट गहरी खड़ी ढ़ाल है । दल के सदस्यों के मन में यह जिज्ञासा हुई कि ढाल के नीचे क्या ह।  वे सब छात्र नीचे उतरे तो देखा ढाल सीलन भरी अंधेरी गुफाओं की ओर जाती है। नीचे गुफाओं में उन्हें एक विशाल कक्ष मिला जिसमें बर्तन जवाहरात और चतुष्पदी जानवरों के कंकाल थे। जिन जीवों के ये कंकाल थे वे न मनुष्य थे न पशु उनके प्रत्येक के हाथ में दो उंगलियां थीं उनके प्रत्येक के पैर में तीन अंगूठे थे उनके एक लम्बा कान था जो सर में लम्बबत् आगे निकला हुआ था । उनकी खोपड़ियां बड़ी थीं । उनकी आंखें मनुष्य की आंखों से अधिक सटी थीं । अन्वेषकों को गुफा में ट्रांजिस्टर जैसे उपकरण तथा संचारयंत्र भी मिले । उन सबने जिस अज्ञात लोक की सभ्यता का पता लगाया उसके संबंध में अनुमान है  िकवह विकसित थी और दक्षिणी अमेरिका में फली फूली थी । ये जाति 6000 वर्ष पूर्व रहती थी । इनके शरीर मानव के शरीर से बिलकुल भिन्न थे। यहां बसने वाले लोग बुद्धि और ज्ञान में मानव से कई प्रकाश वर्ष आगे थे । उनके अत्याधुनिक उपकरणों से यह विश्वास होता है  िकवे पृथ्वी पर केवल आया जाया करते 


Friday, 13 February 2026

Dimag ka kuda

 मेरी कामवाली अभी पन्द्रह दिन की तीर्थ यात्रा से होकर आई है पूरी बस उन्ही की बिरादरी की थी। स्वाभाविक है मैं बाल्मीकि बिरादरी की बात कर रही हूँ और सब मंदिरो में जाकर पूजा अर्चना की प्रसाद चढ़ाया गंगा नहाये पर कहीं न उन्हें रोका गया न टोका गया। वो सभी त्यौहार हम सवर्णाे से अधिक विधि विद्यान से करते हैं देवी पूजा करते हैं तब उनकी देवी अस्पर्स्य हुई और सवर्णो को शुद्ध यह समझ से परे बात है। 

जरा सा दिमाग खुला रखें तो जाति विरादरी सब खत्म हो जायेगी अब यदि घरों में शौचालय इस प्रकार के बन गये हैं कि इनकी सफाई घर के सदस्यों को ही करनी पड़ती है तब घर के सब लोग एक दूसरे को न छुए सब पर एक नजर डाली जाये तो समाज में छोटे छोटे विग्रह बड़े बड़े नासूर बने हैं वह केवल सोच को छोटी करके देखने के कारण। 

अब मैला ढोने की प्रथा यदि सिमट कर कुछ स्थानों पर रह गई होगी तो इतना नहीं पता क्योंकि गाँवों में शौचालय जहाँ नहीं हैं वहाँ सारे खेत ही शौचालय होते हैं वहाँ मल उठाने का सवाल ही नहीं है कुछ घर अवश्य होंगे पर शहर अब बहुत दूर हो चुके हैं इस परिस्थिति से जितने भी वाल्मीकियों से रूबरू होती है सभी यह कहते हैं कि अब हमारी पीढ़ियों में यह काम नहीं होता है। सड़क झाड़ते हैं वहाँ कूड़ा उठाते हैं। सब कुछ उठा कर भरते हैं तो घरों में माँ अपने बच्चे का मल उठाती है। सब अपना मल हाथों से साफ करते हैं। घरों का कूड़ा उठाते हैं सड़को पर घरों का ही कूड़ा उठाते हैं जब कूड़ा घर से झाड़ने वाले नहाकर शुद्ध हो सकते है तो उठाने वाले क्यों नही ?