Saturday, 17 January 2026

ek hi bhool kahani

 एक छोटी सी भूल,


                 प्रस्तुति. डा0 शषि गोयल


   रात के अंधेरे में एक्सप्रैस ट्रेन सरबरी नदी के लंबे पुल पर धड़धड़ाती चली जा रही थी। स्टीम इंजन से सीटी की तीखी आवाज और पहियों की घड़घड़ाहट के बीच एक आवाज और हुई वह थी नदी में छपाक की आवाज। प्रथम श्रेणी का दरवाजा खुला और उसमें से किसी वस्तु को बाहर धकेल दिया गया और उसी की आवाज पानी में हुई थी, लेकिन ट्रेन चलती रही और किसी ने भी ध्यान नहीं दिया  कि उसकी एक सवारी कम हो गई है । 

   घड़ी की सुई और ट्रेन दोनों चलती रहीं। समय का पहिया चलता रहा। सेकंड मिनट घंटे बीतते गये और सुबह ने बाहर झांका तो नहीं था हॉं तैयारी में थी। धीरे धीरे ट्रेन ने भी अपनी गति कम की और प्रषांतपुर से कुछ पहले जंगली इलाके में गाड़ी रुक गई आमतौर पर प्रषांतपुर स्टेषन पर एक्सप्रैस ट्रेन रुकती नहीं थी । संभवतः किसी ने जंजीर खींची थी ।

    सीनियर गार्ड अपनी लालटेन लेकर अपने डिब्बे से यह देखने के लिये उतरा कि किसने जंजीर खींची । वह ट्रेन के साथ साथ आगे बढ़ रहा था,दो टिकिट चैकर भी अब उसके साथ आ गये थे । शीघ्र ही तीनों ने वह स्थान ढॅूढ लिया था । वह था फर्स्ट क्लास का कंपार्टमेंट, वहीं से जंजीर खींची गई थी । अंदर गहन अंधेरा था । गार्ड ने अंदर की बिजली खोली,‘ यह क्या? डिब्बा खाली था ’। वहॉं की दषा देख तीनों व्यक्ति भय से जड़ हो गये। चारों ओर खून ही खून था गद्देदार सीट पर, कंपार्टमेंट की लकड़ी की दीवार पर ,फर्ष पर। पंखा फुल स्पीड पर चल रहा था। एक सूटकेस रस्सी के सहारे ट्रेन की जंजीर से लटका हुआ था। वे भयानक मंजर की स्थिति से उबरे  तब भयभीत गार्ड ने पुलिस के लिये फोन किया। गाड़ी को रोक लिया गया और पुलिस ने कई यात्रयों से पूछताछ की लेकिन कोई भी व्यक्ति हादसे पर प्रकाष नहीं डाल पाया। रक्तसना फर्स्टक्लास का डिब्बा ट्रेन से अलग किया गया बाकी की टेªन आगे बढ़ी ।अब पुलिस के सामने सवाल था वह कंपार्टमेंट किसने बुक कराया था। उन दिनों फर्स्टक्लास कंपार्टमेंट में कोई भी परिचालक नहीं चलता था।

 पता चला यह डिब्बा मिस्टर एन्ड मिसेज सोम गोस्वामी के नाम पटना से  रिजर्व कराया गया था ।  जंजीर से लटके सूटकेस में दो लम्बे फल वाले  चाकू एक भारी हथैड़ा और एक खूबसूरत बैग निकला । लग रहा था खून करने के लिये इन्हीं औजारों का प्रयोग किया गया है लेकिन न तो उन पर खून लगा था न किसी प्रकार के उंगलियों के निषान ।  डिब्बे में भी किसी प्रकार की उंगलियों के निषान नहीं मिले और पुलिस को यही परेषान कर रहा था। संभवतः हत्यारे  ने ग्लब्स पहन कर खून किया अर्थात सोच समझ कर पहले से बनाई गई योजना के तहत खून किया गया था ।

  पुलिस ने तहकीकात में अनुमान लगाया कि हत्यारे ने इतमीनान से क्रूरतम तरीके से हत्या की ।संभवतः महिला की हत्या कर उसेनदी में फेंक कर चेन पर सूटकेस लटका कर ट्रेन रोकी और स्वयं प्रषांतपुर के आस पास ही कहीं उतर गया। पंखा फुल स्पीड पर चला दिया जिससे कि रक्त जल्दी सूख जाये । लेकिन फिर भी एक बात उन्हें परेषान कर रही थी कि यदि महिला पर आघात किया गया होगा तो वह चीखी अवष्य होगी तो किसी न किसीने तो उसकी चीख सुनी होगी लेकिन किसी भी यात्री ने नहीं कहा 

कि उसने चीख सुनी है। प्रषांतपुर की पुलिस केवल हाथ मल कर रह गई उनके पास किसी प्रकार का कोई सबूत नहीं था यहॉं तक कि लाष भी नहीं  वे कह सकते कि खून हुआ है ।

  कुछ दिन बाद ही सरबती नदी में उफान आया और सरबती नदी के किनारे के गॉंव के पास अधगली अधसड़ी लाष आकर लगी यह गॉंव रेल के पुल से अधिक दूर नहीं था। एक धोबी कपड़े धो रहा था उसने देखा एक नंगी लाष उधर ही बहती आ रही है। लाष पानी में पड़ी रहने के कारण फूल गई थी । धोबी डर से अधमरा हो गया और भागा भागा समीप के थाने पर पहुॅंचा । पुलिस ने लाष अपने कब्जे में की और पोस्टमार्टम के लिये भेज दी । फोरेंसिक विभाग के एक्सपर्ट ने  बताया कि लाष किसी स्वस्थ नवयुवती की है जिसका चेहरा और सिर किसी भारी चीज से कुचल दिया गया है। पुलिस द्वारा निष्कर्ष निकाला कि यह 

लाष फर्स्टक्लास में यात्रा कर रहे यात्री की ही है ।मृत शरीर मिल गया था। अब प्रषांतपुर पुलिस ने सारा ध्यान सूटकेस में मिली वस्तुओं पर लगाया। गहन छानबीन से उन्हें एक सुराग हाथ लगा। बैग के अंदर पेंसिल से दो ष्शब्द लिखे मिले  । संभवतः दुकानदारका 

अपना मार्का था।

अब पुलिस ने अपना ध्यान पटना में केन्द्रित किया जहॉं से टिकिट बुक की गई थी। पटना पुलिस की सहायता से पुलिस दुकानदारोंको चिन्हित शब्द दिखा रही थी संभवतः पहचान जायें । एक एक  दुकानदार से पूछना बड़ा ही थका देने वाला काम था । कई महिने बाद अंत 

में मेहनत रंग लाई ।

एक छोटे से दुकानदार ने जो फैंसी टॉयलेट का सामान बेचता था पहचान लिया। वह बैग उसी की दुकान से खरीदा गया था। साधूराम नामक दुकानदार की याददाष्त अच्छी थी। उसे खरीददार तक की याद थी । वह बोला,‘ मेरी दुकान पर आने वाले आमतौर पर ऐसा बैग

 नहीं खरीदते इसलिये मुझे याद है । वह एक औरत के साथ था । वह उस औरत से इषारों में बात कर रहा था । संभवतः वह औरत 

गूंगी बहरी थी एक भी ष्शब्द नहीं बोली थी ं’।

  पुलिस के अफसर को याद आ गया कि किसी ने भी उस औरत की चीख नहीं सुनी थी । संभवतः वह गूॅंगी बहरी ही थी लेकिन प्रष्न यह उठ खड़ा हुआ कि वह कौन थी और उसके साथ वाला व्यक्ति कौन था ।

     यद्यपि केस के कुछ मुद्दे हाथ आ गये थे लेकिन फिर भी अभी भी आगे बढ़ने का रास्ता नहीं मिल रहा था। तभी पटना के एक हिस्से में आग लगी और पुलिस का ध्यान उधर गया। आग लगने में षडयन्त्र नजर आ रहा था इसलिये वहॉं रहने वालों के घरों की 

गहन जॉच पड़ताल से एक नाम पुलिस की निगाह में आया वह था - बाबू सोम गोस्वामी ।

    पुलिस अफसर तुरंत उस व्यक्ति से मिलने के लिये चल पड़ा। गोस्वामी जहॉं काम करता था उसके मालिक का नाम  बलराम 

सिन्हा था। सिन्हा की पत्नी गूॅंगी बहरी थी। पूछताछ करने पर गोस्वामी ने बताया कि सिन्हा की पत्नी है नहीं इन दिनों इलाज के लिये इलाहाबाद गई है ।

  अब पुलिस का सारा ध्यान बलराम सिन्हा पर केन्द्रित हो गया। उसने  गोस्वामी से बलराम सिन्हा का पता लिया और मिलने चलदिया। दरवाजा एक खूबसूरत औरत ने खोला। नाम था ‘प्रीति मान सिंह ’ । पूछताछ पर ज्ञात हुआ प्रीति सिन्हा की नौकरानी थी । उसकी पत्नी

 के जाने के बाद से घर की देखभाल के लिये  वहीं रहने लगी थी ।

      बलराम सिन्हा को थाने लाया गया और पूछताछ की गई। पहले तो वह हर बात से इंकार करता रहा । बैग और दुकानदार के पहचाने जाने के बाद वह चुप हो गया। काम पर उन्हीं दिनों अनुपस्थित रहना जिन दिनों महिला का खून हुआ संदेह बढ़ा रहा था। अंत में उसने हथियारडाल दिये और स्वीकार कर लिया कि खून उसी ने किया है ।

‘ विमला मेरी दूर की रिष्तेदार थी उसके मॉं बाप बहुत अमीर थे उन्होंने ष्शादी में बहुत दहेज दिया। मेरे अनेकों महिलाओं से ताल्लुकात थे - विमला यह जानती थी फिर एक दिन मेरी प्रीति से मुलाकात हुई - वह मेरे ऑफिस में स्टेैनो थीकृ उससे मेरे नाजायज 

संम्बन्ध बन गये  उसे मैंने एक अन्य घर में रख लिया- प्रीति के रिष्तेदारों को यह पता लगा तो उन्होंने धमकाना प्रारम्भ कर दियावे चाहते थे कि मैं प्रीति से शादी कर लॅूं - मैंने वादा किया कि मैं प्रीति से शादी करुॅंगा ।

विमला से मुझे लगाव कभी नहीं हुआ था मैंने तो केवल उसके रुपयों की वजह से  उससे शादी की थी और उसका रुपया मेरे पासथा इसलिये  मैंने उससे छुटकारा पाना चाहा और एक ही तरीका था - उसकी हत्या ।

मैंने एक इंगलिष पिक्चर देखी थी जिसमें एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की हत्या ट्रेन में की थी , मैंने उसी तरीके को अपनाने का फैसला किया। मैंने अपनी पत्नी से कहा कि हम लोग घूमने चल रहे हैं । वह ट्रेन के सफर से उत्साहित थी । मैंने दो टिकिट अपने क्लर्क गोस्वामी के नाम से बुक किये । वह मेरे बहुत नजदीकी है । इसलिये मुझे उसके नाम का प्रयोग ही बहुत उपयुक्त लगा ,लेकिन मैं उसे किसी झंझट में नहीं डालना चाहता था इसलिये पता गलत लिखाया ।उस रात हमारे कंपार्टमेंट का आखिरी व्यक्ति भी उतर गया । हम अकेले रह गये । मैंने विमला के सिर पर हथौड़ा मारा । वह तड़पीऔर षांत हो गई। मैंने उसके कपड़े उतारे और नग्न शरीर नदी से बाहर फेंक दिया। हॉं बैग जरूर रख लिया सोचा प्रीति को उपहार में दे दूॅंगा लेकिन हड़बड़ी में उसे भूल गया । मैंने सारे हाथों के निषान पोंछे इसमें काफी समय लग गया फिर प्रषान्त पुर के पास उतरकर बस से वापस आ गया । मुझे जरा भी उम्मीद नहीं थी कि जिप बैग मुझे फंसा देगा ।’सिन्हा के खिलाफ पत्नी की हत्या का अभियोग सिध्द हो गया उसे दोषी पाया गया और उसे मृत्युदंड की सजा सुनाई गई । 

उसकी पटना हाइकोर्ट में की गई अपील खारिज हो गई और मृत्युदंड बहाल रहा । अपनी मृत्यु से पूर्व उसने प्रीति से मिलने की इच्छा जाहिरकी लेकिन प्रीति ने आखिरी इच्छा पूरी करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई ।


प्रस्तुति द्वारा - ड0 ष्शषि गोयल