बड़ी बड़ी बहसे चलती हैं .अखबारों मैं स्त्री सुरक्षा पर सवाल उठाये जाते हैं सैल खुलती हैं सेनाएं बनती हैं आयोग बनते हैं और नेता संत प्रवचन देते हैं कि महिलाओं को यह करना चाहिए वह करना चाहिए उन्हे रात मैं नहीं निकलना चाहिए उन्हे घर से निकलना ही नहीं चाहिए तो कोई बुरका पहना रहा है लेकिन दिन भर महिलाएं शिकार होती छोटी बच्चियां ,परन्तु महिलओं को सुरक्षा किससे चाहिए जबाव चाहिए की महिलाओं को सुरक्षा किस से चाहिए बड़ा बड़ा प्रश्न चिन्ह है कि महिलाओं को सुरक्षा किससे चाहिए तो जबाव भी है कि पुरुष से तो दोषी कौन है पुरुष और सजा भुगते औरते क्यों नहीं पुरुष अपना आचरण सभालते आवष्यकता उन्हे ठीक होने की है
Tuesday, 12 April 2016
Saturday, 2 April 2016
kursi
पहले कहा जाता था कि कुर्सी के ऊपर कच्चे धागे से तलवार बंधी रहती है लेकिन टूटकर वह तलवार अब हाथ मैं आ गई है और जिसे कुर्सी मिल गई है वह हर तरह से मजबूत हो जाता है दो पैर के स्थान पर छ पैर वाला हो जाता है और हाथ मैं तलवार उसे दबंग बन देती है और छात्रावस्था मैं जब पहले शिक्षा ही केंद्र मैं रहती थी अब कुर्सी पाना केंद्र हो गया है कुर्सी के बल पर शक्ति और शक्ति के बल पर सब कुछ आसानी से मिल जाता हे धन बल शोहरत तब पढ़ने की क्या आवश्यकता है पढ़ने के लिये तो मेहनत करनी पड़ती है लेकिन कुर्सी के बाद तो जेब से बस नोक ही बाहर करनी पड़ती है सब कुछ हाजिर
Thursday, 31 March 2016
उम्र नहीं पूछो
महिलाओं के लिए ४० की अवस्था एसी होती है जिसे पार कर पाना आसान नहीं होता कभी कभी तो उसे लांघने मैं दस साल लग जाते हैं
सफल उपन्यासकार वह है जो फिल्म देख कर उपन्यास लिखे और फिर उस उपन्यास पर फिल्म बनाये
सफल उपन्यासकार वह है जो फिल्म देख कर उपन्यास लिखे और फिर उस उपन्यास पर फिल्म बनाये
Thursday, 4 February 2016
Andar ki bbat
दिल की अपनी आवाज होती है , जुबान जो कुछ भी कहती है कहती रहे अंदर की आवाज उसमेँ आ ही जाती है। ध्वनि विस्तार ,ध्वन्यात्मकता ,गूँज, अनुगूंज, कुछ भी नाम देलो ,जिसे कहते हैं मन की बात जुवा पर आना पिता श्री कहते हैं एक साथ चार व्यक्ति बलात्कार कर ही नहीं सकते पर क्या होता है अगर जरा सा भी समझदार होगा ऐसी बात नहीं करेगा औरत जाट जिसमे छोटी बच्ची भी शामिल है मर्द के लिए मॉस की गुड़िया है न उसे तकलीफ होती है न दर्द यूज़ एंड थ्रो जिसने प्यार से पला अपने जीवन का लक्ष्य बनाया बेकार वह मात्र एक खिलौना खेलो तोड़ो फेंको जिस खेल के लिए वहशी हो जाते हैं एक बार आईने मैं अपनी बेटी का चेहरा लगाले कसम है किसी को हाथ लगाना भी भूल जायेंगे।
ध्वन्यात्मकता तो पुत्र की बात मैं भी झलकती है कि पुलिस अच्छा काम कर रही है तभी तो जेल कटनी पड़ी पुलिस अच्छा काम भी करती है यह भी खबर है जैसे कहा जाता है ईमानदारी जीवित है यह वैसे ही यदि पोलिस कोई अच्छा काम करती है तो वह खबर है अर्थात पुलिस अच्छा करने के लिए नहीं बनी कभी कभी गलती हो जाती है इसलिए उनसे अच्छा जाता है यह भी तो हो उस अपराधी से सेटिंग नहीं हो पाई इसलिए पकड़वा दिया या जेल की ही सेटिंग हो इससे ध्वनि निकलती है कि बुरे काम करने के लिए अपराधियों का सहयोग करने के लिए हम इतने पुलिस वालों की नियुक्ति करते हैं
ध्वन्यात्मकता तो पुत्र की बात मैं भी झलकती है कि पुलिस अच्छा काम कर रही है तभी तो जेल कटनी पड़ी पुलिस अच्छा काम भी करती है यह भी खबर है जैसे कहा जाता है ईमानदारी जीवित है यह वैसे ही यदि पोलिस कोई अच्छा काम करती है तो वह खबर है अर्थात पुलिस अच्छा करने के लिए नहीं बनी कभी कभी गलती हो जाती है इसलिए उनसे अच्छा जाता है यह भी तो हो उस अपराधी से सेटिंग नहीं हो पाई इसलिए पकड़वा दिया या जेल की ही सेटिंग हो इससे ध्वनि निकलती है कि बुरे काम करने के लिए अपराधियों का सहयोग करने के लिए हम इतने पुलिस वालों की नियुक्ति करते हैं
Friday, 8 January 2016
chakh chakh
अगर आप दो सगी बहनों मैं से छोटी को प्यार करते हैं तो बड़ी से शादी कर लीजिये छोटी से अपने आप रिश्ता जुड़ जायेगा
अभी तक कोई भी दाशर्निक ऐसा नहीं हुआ है जो वीरता से दाँत का दर्द सह ले
अभी तक कोई भी दाशर्निक ऐसा नहीं हुआ है जो वीरता से दाँत का दर्द सह ले
Saturday, 5 December 2015
Apni bhasha
कितने शर्म की बात है कि हमारे पास सब कुछ है पर राष्ट्र भाषा नहीं है जन्म से ही बच्चा बोलता है तो अपने जन्म स्थान की बोली बोलता है उसी मैं अपने भावों को अच्छी तरह समझा पाता है लेकिन हम इतने दिन गुलाम रहे तो कहने को आजाद हैं आत्मा गुलाम है दूसरों के तलुए चाटने की इतनी आदत हो गई है कि वही अच्छा लगता है उसके मोह मैं फसे है हम अपने को देसी नहीं सिद्ध करना चाहते हैं। हम भावनाओं की क़द्र नहीं करते। हम अपना रॉब डालना चाहते है। हिंदी शांत सौम्य भाषा है जब क्रोध आता है तो आदमी अंग्रेजी झाड़कर अपने को सही साबित करना चाहता है
Sunday, 29 November 2015
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