हर जगह जेन जी जेन जी शब्द सुना जा रहा है,यह हमारी युवा पीड़ी के लिए हैं शब्द चीन का है। हम अपने देश से कभी नहीं जुड़ना चाहते ,दूसरों के पीछे चलते हैं आगे नहीं ,तलवे चाटने की आदत हो गई हैक्यों अपनी युवा पीढ़ी को जेन जी ,झेन जी कहकर गुलाम बना रहे हैं जैसे हम चीन जापान के पिछलग्गू हैं। उनके पीछे दुम हिलाते चल रहे हैं। जेन जी की उपाधि पा युवाओं का सीना चौड़ा हो रहा है और वो चुस्त दुरुस्त हो जाते हैं ।
आज भी राम आदर्श हैं,उनके भक्त हैं,पर राम की तो कोई पार्टी नहीं थी। उन्होंने तो प्रेम की धारा बहाई,जो उसमें आता गया पीता गया और पीकर तृप्त होता गया,न उन्होंने बांटा न काटा न अलग किया,सबको समान भाव दिया चाहे निषादराज हो या राक्षराज,वानर हो या गृद्धराज, उनके लिए सब एक ही है।
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