Friday, 25 September 2026

jeevan ka aarambh

 जीवन का प्रारम्भ 

प्रारम्भ में पृथ्वी आग का गोला थी। जीवन उसमें असंभव था लेकिन लाखों साल में जब ठंडी हुई उस पर पर्त दर पर्त चढ़ती गई। फिर भीषण वर्षा ने चारों और पानी ही पानी कर दिया और बातावरण में कार्बनडाई आक्साइड और अमोनिया भर गई। बिजली गिरने से सूर्य की प्रखर किरणो से अनेकों रासायनिक परिवर्तन हुए तो छोटे छोटे जीवणुओं की उत्पत्ति हुई। स्वंय हमारा शरीर छोटे छोटे करोड़़ांे जीवाणुओं से मिलकर बना है। कालचक्र से ये जीवाणु दो प्रकार के बन गये काई वैक्टीरिया एक तरफ और दूसरी तरफ प्रोटोजा। प्रथम प्रकार से वनस्पति का निर्माण हुआ दूसरे प्रकार से जीव जन्तु का। इस प्रकार से हम कह सकते हैं जीव जन्तुओं के पिता प्रोटोजा है जिसका जन्म समुद्र में हुआ। 

सर्वप्रथम काई ने फोटो सिन्थेसिस शैली के आधार पर आक्सीजन का निर्माण आरम्भ किया लेकिन उसके भी कई लाख साल अब से करीब बारह अरब वर्ष पहले पृथ्वी पर आया। 

जीवन का प्रारम्भ समुद्र में हुआ लेकिन पृथ्वी के स्थान पर उभरने से जमीन का और पहाड़ों का निर्माण हुआ और ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ने लगी। पृथ्वी पर सर्वप्रथम जिस प्राणी का आविर्भाव हुआ वह था एम्फीबियन जो पानी और जमीन दोनों पर जीवित रह सकता था। कभी एक बार यह जीवाणु अधिक विकसित फेफेड़ों के साथ उत्पन्न हुआ और सूखी जमीन पर जीवित रहने में सफल हुआ धीरे धीरे उनकी मात्रा बढ़ी साथ ही ऊँचाई बढ़ती गई। ये जन्तु करीब 70,000,000 वर्ष पहले उत्पन्न हुए। ये बहुत भयानक और शक्तिशाली जन्तु ब्रोन्टोसोरस कहलाया है। चमड़ा माँस और हड्डियों का विशाल पिंड करीब 25 मीटर लम्बा, यह जीवन अपने अगले पैरों पर बड़ी मुश्किल से खड़ा हो पाता था। विशाल शरीर के मुकाबले दिमाग बहुत छोटा और अक्ल बहुत कम होती थी। कुछ जन्तु नीचे नीचे आकाश में उड़ने लगे थे वे पक्षियों के पूर्वज पैट्रोसॉरस थे। 

कई लाख साल बाद इतने विशाल पशुओं के बीच स्तन पायी जीव उत्पन्न हुआ यद्यपि शरीर अधिक बड़ा नही था लेकिन दिमाग बड़ा था और इसलिये वह विशाल जीवों के बीच अपने को बचा सका। 

फिर हिमयुग आया जिसमें तापमान 0 डिग्री से भी चालीस पचास डिग्री नीचे चला गया यह उन विशाल पशुओं के लिये विनाशकारी रहा लेकिन स्तनपायी जीव और पक्षियों के लिये विशेष नुकसानदायी नही रहा क्योंकि उनकी रगों में गर्म ख्ूान था। प्रकृति ने उनका शरीर बालों ओर पंखों से ढक दिया था जबकि विशाल शरीर और रेंगने वाले जीव ठन्डे रक्त वाले थे, साथ ही सादा चमड़ी से अपने को जीवित नही रख पाये और समाप्त हो गये जो बच गये थे वे थे मगर कछुआ साँप और छिपकलियाँ। हिम युग कई साल तक चला। बीच बीच में कुछ वातावरण गर्म होता  उस समय स्तनपायी जीवों और पक्षियों की प्रजातियाँ बढ़ती गई। एक प्रकार का दो मीटर लम्बा भेड़िया नुकीले दाँतों वाला शेर पाँच मीटर लम्बें डैन वाले गिद्ध अन्य नई प्रजातिया उत्पन्न हुई वे थे भैसें, बैल घोड़े और मैमथ, (हाथी का पूर्वज) गंेडा, हिप्पों हाथी बच गये। नई कुत्ते बिल्लियाँ की जातियाँ उत्पन्न हुई इस प्रकार आधी से अधिक पशु पक्षियों की जाति 30,000,000 साल पहले मौजूद थे। 

हिम युग के समय ही जो सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण उत्पत्ति हुई थी वे थे आदिमानव ये कुछ कुछ वन मानुष जैसे थे। अफ्रीका के मैदानों मंे घूमते थे तथा सीधे दो पैरों पर चलते थें ये अपने हाथों का उपयोग करना जानते थे। ये करीब 101, 120 सेन्टीमीटर लम्बें होते थे। पहला आदि मानव करीब 5000,000 साल पहले प्रगट हुआ लेकिन आधुनिक मानव 35,000 साल पहले बन पाया। 


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