हम अपने को बदलने के लिए चमत्कार का इंतजार करते हैं,जीवन में कुछ जरूर ऐसा होगा जो हमारा जीवन बदल देगा। सब िदन एक से नहीं होते,लेकिन आवश्यकता है बदलाव के इंतजार करने का नहीं वरन् अपने अंदर बदलाव लाना स्वयं हमारी जिम्मेदारी है । हम अपने चारो ओर स्वयं एक वलय का निर्माण कर लेते हैं और उससे आगे निकलना नहीं चाहते पर अपने बनाये बंधन को स्वयं तोड़ना होगा । जो कुछ भी हो रहा है वे आपकी अपनी आदतों का परिणाम है,प्रतिबिंब है । गोल करने का श्रेय हर व्यक्ति लेना चाहता है पर पाता वही है जो लक्ष्य पर घ्यान केन्द्रित करता है और अवसर की तलाश करता है। अवसर आने पर उसे पकड़ लेता है । ‘मैं अपने को बदलने की कोशिश तो बहुत करता हूं पर बदल नहीं पाता‘यह केवल बहाना है,अनिच्छा अपने को बदलने की लेकिन वह तो आपका स्वभाव बन चुका है। आप अपने को बदलना नहीं चाहते । बदलाव क लिये कार्यशैली पर घ्यान केन्द्रित करना पड़ेगा जिस आदत को अदलना चाहते हैं उस पर भी ध्यान देना पड़ेगा कि उसे बदलने की नौबत क्यों आई है हम गलत थे यह स्वीकारोक्ति करते ही आप लक्ष्य की ओर बढ़ लेते हैं। यह घ्यान रहे कि पहले अपनी आदत को परखें कि कौन सी आदत बदलनी है । अच्छी आदत को बढ़ावा दें और बुरी आदतों को कम करने का प्रयत्न करें सोचलें उस पर अमल अवश्य करना है। आपकी यह छोटी सी पहल आपके सामन सफलता के द्वार खोल सकती है । निरंतरता बनाये रखने से सफलता का द्वार भी बड़ा होता जाता
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