Saturday, 11 April 2026

manidhara

 स्वच्छ हवा जैसी चीजें बाजार के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकतीं, क्योंकि ये सबकी भलाई के लिए होती हैं 

आज के डिजीटल गणतंत्र में डिजिटल साक्षरता पारंपरिक साक्षरता की तरह ही महत्वपूर्ण है। 

आदमी के अंदर भी जंगल उग आते हैं और उसमें कटीली झाड़ियां सिर उठाने लगती हैं। आंतरिक क्रोध दुश्चिंता से कुछ हरकत एसी हो जाती हैंजब मन शांत हो जाता है तब बहुत ग्लानि होती है कि यह हमने क्या कर दिया? हम अवसाद में धिरने लगते हैं। इससे अच्छा है उस स्थिति से उबर जाना न कि यह सोचते रहना कि हमने यह क्या कर दिया। हमसे ऐसा कैसे हो गया। अपने को समझायें कि जो कुछ हुआ परिस्थ्तििवश हो गया,परंतु जहां तक है उस स्थिति पर काबू पायें । यह जरूरी नहीं कि इसके लिए आप अपने को सजा दें बल्कि परिस्थिति  को सुलझाने का प्रयास करें । एक मुस्कान बहुत सी समस्याओं से छुटकारा दिला देती है ।


Friday, 10 April 2026

man manidhara

 गुरू गोविंद सिंह ने अनेक युद्ध जीते। युद्ध में घायल सैनिकों को पानी पिलाने का काम उन्होंने भाई कन्हैया को सौंपा। भाई कन्हैया केवल अपनी तरफ के सिपाहियों को ही नहीं बल्कि दुश्मन  के घायल सैनिकों को भी पानी पिलाते थे । कुछ लोगों ने गुरू से इस बात की शिकायत की। गुरू गोविंद सिेह ने भाई कन्हैया से इसका जवाब पूछा तो भाई कन्हैया ने गुरू साहब को कहा,‘ मैं जहां आपकी ज्योति देखता हूं वहां पानी पिला देता हूं’। इस पर गुरू गोविंद सिह ने कहा कि यही एक व्यक्ति है जिसने मेरी शिक्षा को सही रूप् में समझा है और उस पर अमल किया है । उन्होंने भाई कन्हैया से कहा अब आगे से पानी ही नहीं बल्कि उन सिपाहियों की मरहम पट्टी भी किया करो ।धर्म की रक्षा के लिए गुरू गोविंद सिंह जी ने अपने समस्त परिवार का बलिदान भी किया,इसलिए उन्हें सरबसदानी यानि पूरे परिवार का दानी भी कहा जाता है। उन्होंने बैसाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना कर समस्त मानव जाति को प्रेम और बलिदान का संदेश दिया, वो अपने उपदेश में कहा करते थे कि हम अच्छे कर्म करने मे कभी पीछे न हटें,नतीजा कुछ भी हो। धर्म की रक्षा की खातिर अपने परिवार के चारों ओर पु़त्रो को कुरबान कर दिया। उनहोंने प्राणि मात्र को समझाया  कि जबयह अनुभाव करते हैं कि हम एक शरीर नहीं एक आत्मा हैं तब इस सृष्टि के प्रति और ज्यादा । हम धरती रहने वाले जागरूक हो जाते 

Thursday, 9 April 2026

man manidhara

 गुरू गोविंद सिंह ने अनेक युद्ध जीते। युद्ध में घायल सैनिकों को पानी पिलाने का काम उन्होंने भाई कन्हैया को सौंपा। भाई कन्हैया केवल अपनी तरफ के सिपाहियों को ही नहीं बल्कि दुश्मन  के घायल सैनिकों को भी पानी पिलाते थे । कुछ लोगों ने गुरू से इस बात की शिकायत की। गुरू गोविंद सिेह ने भाई कन्हैया से इसका जवाब पूछा तो भाई कन्हैया ने गुरू साहब को कहा,‘ मैं जहां आपकी ज्योति देखता हूं वहां पानी पिला देता हूं’। इस पर गुरू गोविंद सिह ने कहा कि यही एक व्यक्ति है जिसने मेरी शिक्षा को सही रूप् में समझा है और उस पर अमल किया है । उन्होंने भाई कन्हैया से कहा अब आगे से पानी ही नहीं बल्कि उन सिपाहियों की मरहम पट्टी भी किया करो ।धर्म की रक्षा के लिए गुरू गोविंद सिंह जी ने अपने समस्त परिवार का बलिदान भी किया,इसलिए उन्हें सरबसदानी यानि पूरे परिवार का दानी भी कहा जाता है। उन्होंने बैसाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना कर समस्त मानव जाति को प्रेम और बलिदान का संदेश दिया, वो अपने उपदेश में कहा करते थे कि हम अच्छे कर्म करने मे कभी पीछे न हटें,नतीजा कुछ भी हो। धर्म की रक्षा की खातिर अपने परिवार के चारों ओर पु़त्रो को कुरबान कर दिया। उनहोंने प्राणि मात्र को समझाया  कि जबयह अनुभाव करते हैं कि हम एक शरीर नहीं एक आत्मा हैं तब इस सृष्टि के प्रति और ज्यादा । हम धरती रहने वाले जागरूक हो जाते हैं ।

Monday, 6 April 2026

Man manidhara

 जब तक सोच मौजूद है शब्द जिंदा रहते हैं और साहित्य का जरिया बन जाते हैं - सिरिल कानेैली

जीवन हर दिन किये जाने वाला नया ईमानदार प्रयोग है, जो बीत गया वह बोझ नहीं अगर उससे सीखे ले। गलतियां हमें तोड़ने नहीं बल्कि तराशने आती हैं। असली ऊर्जा शोर में नहीं उद्देश्य की स्पष्टता में जन्म लेती है। धैर्य दिशा देता है और संयम गति को स्थिर रखता है । हर  सुबह खुद से बेहतर बनाने का प्रण करना ही सच्ची आशा है।


Sunday, 5 April 2026

Man manidhara

 जब हम एक पड़ाव पर ठहरा हुआ महसूस करते हैं तब मन स्वाभाविक रूप से पीछे भी देखता है और आगे भी । वही क्षण है यह स्वीकार करना चाहिये जो बीत गया उसने हमें कुछ सिखाया ही होगा । भूलें जीवन की सबसे बड़ी शिक्षक होती हैं,अपनी गलती समझ लेना उसे दोहराने से बचना है और यही सीख भविष्य की ताकत बन जाती है ।

अधीरता हमें भटका देती है संयम हमें स्थिर रखता है यदि दिशा सही हो तो धीरे धीरे चलना कमजोरी नहीं है। छोटे शांत और ईमानदार प्रयास समय के साथ बड़े बदलाव की नींव रखते हैं। सच्चा परिवर्तन बाहर नहीं भीतर से शुरू होता है। दुनिया व्यवस्था और लोग इन पर प्रश्न उठाना सरल है पर  स्वयं से प्रश्न करना कठिन है जब तक विचार और आचरण के बीच दूरी बनी रहती है तब तक कोई सुधार टिकाऊ नहीं हो सकता। क्रोध और अहंकार तत्कालिक संतोष दे सकते हैं लेकिन भीतर रिक्तता छोड़ जाते हैं। संयम और अनुशासन धीरे धीरे चरित्र निर्माण करते हैं 


Saturday, 4 April 2026

jeevan

 जीवन हर दिन किए जाने वाला ईमानदार प्रयोग है जो बीत गया वह बोझ नहीं अगर उससे सीख लो । गलतियां हमें तोड़ने नहीं बल्कि तराशने आती हैं। असली ऊर्जा शोर नहीं बल्कि उदेश्य की स्पष्टता में जन्म लेती है,धैर्य दिशा देता है और संयम गति को स्थिर रखता है,हर सुबह खुद से बेहतर बनने का प्रण करना ही सच्ची आशा है।

क्रोध व अहंकार तात्कालिक संतोष दे सकते हैं लेकिन वे भीतर रिक्तता छोड़ जाते हैं,जीवन में वास्तविक प्रगति न तो शोर करती है ,नही दिखावा वह भीतर मजबूत बनाती है ।


Thursday, 2 April 2026

drashtibadha

हम अपने अंदर कुछ धारणाऐं बना लेते हैं और उन पर ही चलते हैं उसी दृष्टि से संसार देखते हैं । ये धारणाऐं  है हमें कुछ नहीं दिखाई देता ,हम उन्हें खोलने की कोशिश नहीं करते। हम अंधेरा है उसे स्थायी मान लेहमारे  मन की खिड़कियां होती हैं,लेकिन जब इन खिड़कियों पर धूल जम जाती है तब हम आहत होते हैं बाहर अंधेराते हैं,उसके पार देखने की कोशिश ही नहीं करते । मन की परतों को समय समय पर साफ करने से दृष्टि बाधा समाप्त होती है,दृष्टिकोण बदलता है,और हम दुनिया को  साफ नजरों से देखने लगते हैं,दुनिया जब नये रंगों में दिखाई देती है, क्योंकि रोशनी बाहर है रोशनी की ओर देखेगो तभी दुनिया दिखाई देगी ।

मैक्स मूलर ने वेदों उपनिषदों और अन्य संस्कृत ग्रन्थों की दुर्भावनापूर्वक अंग्रेजी अनुवाद किया। मैक्समूलर ने 1836 में अपनी पत्नी को पत्र लिखा ,‘ मुझे पूरा विश्वास है कि मेरे द्वारा किया गया अनुवाद भविष्य में भारत के भाग्य पर गहरा प्रभाव डालेगा । पिछले तीन हजार वर्षो में उससे जो भी उत्पन्न हुआ है उसे जड़ से उखाड़ फेंकने का यही एक मात्र उपाय है ।