जिंदगी हमें कुछ न कुछ अवसर अवश्य देती हैलेकिन यह हम पर निर्भर हे कि हम उसे कैसे लेते हैं,उसे पकड़ पाते हैं या नहीं अगर उस अवसर को जीवन में उतार लिया या उस पर आगे कदम बढ़ाये तो सफलता अवश्य मिलेगी। और पहली सफलता पर अपने को बहुत होशियार समझ लेना सबसे बड़ी भूल है। अवसर को पकड़ने का पहला प्रयास शिक्षा देता है कि हमें आगे किस प्रकार अवसरों पर ध्यान देना है न कि यह सोच लेना िकवे तो एक्सपर्ट हो गये हैं उनकी पकड़ मजबूत है उनमें आगे देखने की शक्ति है,और यहीं जीवन में मात खा जाते हैं । अधिक आत्मविश्वास मनुष्य की देखने की शक्ति कम कर देता है। हमेशा अपने को नौसिखिया ही समझें। सफलता की सीढ़ी पर चढ़ने के साथ यदि असफलता हाथ लगती है तो डिप्रैशन में चला जाता है,अपने ऊपर से आत्मविश्वास डगमगा जाता है,परंतु मनुश्य वही है जो न हार से डरे न जीत पर अधिक धमंड करे। महान् व्यक्तियों की जीवनी पढ़े पायेंगे वे हारे थे पर टूटे नहीं और सफल हुए। सफलता उन्हें एकदम से नहीं मिलीटूट टूट कर मिली । मनोबल गिरने न दें।मनोबल रहेगा तो असफलता सफलता में बदल जायेगी।यह देखें असफल क्यों हुए। अपनी योजना पर घ्यान दें । उसमें स्किल बढ़ायें,अवश्य कहीं कोई कमजोरी रही होगी उसकी ओर ध्यान दें सफलता अवश्य मिलेगी ।
Shashi Goyal
Sunday, 23 August 2026
Saturday, 22 August 2026
shanti aur shakti
ईश्वर ने हमें अनंत शक्ति प्रदान की है परंतु उस शक्ति को पहचानना यह हमारे ऊपर है। अपने ऊपर विश्वास कि वह कर सकता है तभी वह आगे बढ़ सकता हैएतब ही वह कह सकता कि हार या जीत उसके अपने अंदर हैए जब आत्म विश्वास बना रहेगा तब ही वह अपने मन को नियऩ्त्रण में लायेगा। मन का नियन्त्रण ही सच्चा विश्वास है। अपने विचारों को परिपक्व करने के लिए आत्म विश्वास बहुत आवश्यक है। जब मनुष्य आत्म शक्ति पर मन केन्द्रित करता है तो मन स्थिर हो जाता है और उसके कदम आगे की ओर बढ़ने लगते हैं। मन पर नियन्त्रणएएक चित्त होनाएअर्थात् अपने विकारों पर नियन्त्रणएअस्थिरता पर नियन्त्रण है जो आत्म शांति को प्रेरित करता है। मन तो चंचल हैएउसका एकाग्र होना कठिन हैएपरंतु यदि निय़न्त्रण में रखे तो वह एकाग्रता की ओर बढ़ सकता है। अपने मन के विकारों पर निय़न्त्रण रखना भी एक कदम है । आत्म नियन्त्रण से वह जीवन में अनुशासित हो परम सत्य से साक्षात्कार कर सकता है ।
Thursday, 20 August 2026
bahut din baad
एकाएक बहुत दिन बाद किसी से मिलते हैं तो समझ में नहीं आता कि क्या बात करें,तो कहते हैं ‘और क्या हाल है ,क्या चल रहा है ?’ अब सामने वाला चुप सा है । असहज वह क्या बताए कि क्या चल रहा है ,बेमन से कहता है ठीक ही चल रहा है। असहजता से अलग ’अरे मजे में हैं या बुरे हाल है ।’यही जबाव हो सकते हैं। कुछ भी एकाएक कहना मुश्किल होता है और बातचीत सीमित हो जाती है। परंतु यदि व्यक्ति की प्रशंसा की जाये कि अरे भाई बहुत बढ़िया या प्रशंसा में कुछ कहा जाये तो सामने वाला प्रसन्न हो जाता है। हर व्यक्ति अपने लिए अच्छा ही सुनना चाहता है,अगर अधिक परेशानी में नहो तो परेशान व्यक्ति से सहानुभूति के बोल उसके मन को खोल देते हैं। या यह कहना -अरे भाई जरा सलाह दो मुझे बच्चे का नाम रखना है या उसे पढ़ाना है कौन सा स्कूल अच्छा है या बच्चे के लिए, कोई संबंध बताओ बेटी के लिए अपनापन दिखाता है ।
Wednesday, 19 August 2026
jindagi
मैदान में हारा फिर से जीत सकता है परंतु मन से हारा हुआ कभी जीत नहीं सकता। आपका आत्मविश्वास ही आपकी सर्व श्रेष्ठ पूंजी है।
जिंदगी ने हर किसी से कोई न कोई कीमत जरूर वसूली है, कोई सपनों के लिए अपनों से दूर हो गया तो कोई अपनों के लिये अपने सपनों से दूर हो गया ।
जमाने में आये होतो जीने का हुनर रखना दुश्मन से कोई डर नहीं,अपनों पर नजर रखना। हर मुसकान सच्ची नहीं होती यहां वक्त के साथ चेहरे बदलते हैं यह ध्यान रखना ।
किसी ने सच कहा है दुनिया की सेाच बदलने से आसान है अपनी सोच बदल लेना ।
हर जुबान पर ताला डालने से बेहतर है अपने कानों पर सब्र डाल लेना ।
जिंदगी में अपनापन हर कोई दिखाता है,पर अपना कौन है यह बात वक्त बताता है ,क्योंकि हालात बदलते ही चेहरे बदल जाते हैं और जो हर दौर में साथ निभाये वही सच में अपना कहलाता है ।
तार वाले फोन में इंतजार था और मुलाकात की कद्र थी मोबाइल ने सबकुछ तेज कर दिया पर दिलों की दूरी बढ़ा दी ।
रुपये का मूल्य सामाजिक होता है क्योंकि इसका निर्माण समाज द्वारा किया जाता है ।
Tuesday, 18 August 2026
pin code
पिन कोड क्यों जरूरी है ?
अब डाक में पिन कोड लिखना जरूरी माना जाता है । पिन कोड क्या है और क्यों जरूरी है ? पिन कोड का पूरा नाम ‘पोस्टल इंडैक्सनंबर’ है ।यह पत्र या लिफाफे के पते के सबसे नीचे लिखा जाता है। इस प्रणाली का प्रारम्भ भारत की स्वतंत्रता की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर अर्थात 15 अगस्त् 1972 को हुआ था । पिन में छः सार्थक अंक होते हैं उदाहरण के लिये लखनऊ का पिन कोड है 223001। इस छः अंकों में पत्र को जल्द और सुनिश्चित वितरण के लिए इस प्रणाली में भारी योजना सम्मिलित है। पिन कोड का पहला इंक प्रदेश एवं द्वितीय उप प्रदेश को व्यक्त करता है। अर्थात््ा 11 अंक दिल्ली 12से 17 तक हिमाचल प्रदेश ,20 से 29 तक उत्तरप्रदेश,30 से 34 तक रास्थान ,36 से 39 तक गुजरात ,के लिय 56 से 59 तक कर्नाटक 50 से 53 तक आंध््रप्रदेश ,60 से 64 तक तमिलनाडु 67 से 69 तक केरल 70 से 74 तक पश्चिम बंगाल 75 से 77 तक उड़ीसा के लिये जब कि उत्तरी पूर्वी पोस्टल सर्किल अर्थात (अरुणाचल, असम, मेघालय, मणिपुर ममिजोरम ,नागालैंड, त्रिपुरा , के लिए 75 एवं 79 अंक निर्धारित है ।)
तीसरा अंक जिससे कि प्रथम तीन अंक से डाक छटनी जिले को प्रदर्शित करते हैं जैसा कि लखनऊ शहर के प्रथम तीन अंक 226 है । पिन कोड का चौथा अंक डाक भ्रमण मार्ग को प्रदर्शित करता है जिस पर डाक घर को संकेत करते हैं। उदाहरणार्थ 001 लखनऊ डाकघर के लिए है । इस छटाई से भौगोलिक जानकारी की कोई आवश्यकता इसके प्रयोग से नहीं रह जाती हे साथ ही साथ पत्रों की छटाई बहुत आसानी से और तीव्रगति से सहीप्रकार होती है। क्योंकि इस विधि में पत्रों की छटाई स्थानों के नाम के बजाए नम्बर के अनुसार की जाती है इसलिए एक ही या लगभग एक जैसे नाम वाले स्थानों के लिये गलत छटाई की गंुजाइश नहीं रहती है । इसके अतिरिक्त कई प्रकार की लिपि या लिखावट की समस्या भी सामने नहीं आती है क्योंकि पिन कोड सदैव अंकों में लिखे जाते हैं ।
Monday, 17 August 2026
naye avishkar
हम असंभव को संभव नहीं मानना चाहते। बिना पंख हम नहीं उड़ सकते अनेकों प्रयोग हुए पर संभव नहीं हुआ । देवता ही उड़ सकते हैं,साधारण मनुष्य नहीं पर मनुष्य ने विमान बनाया फिर इन्तक्षि में पहुचा,चांद पर पहुंचा,और भी न जाने कहां कहां पहंुचना चाहता हैश्ह तभी संभव है ज बवह विश्वास करे। साधु नदी पर चल रहा है, जरूर कुछ नीचे लगाया होगा,तब ही चल रहा है,तैराक नीचे जाकर देखते हैं पर कुछ नहीं मिलता,यह तो देवताओं के ही बस की बात है। पर संभव हुआ । नित्य नये आविष्कार सामने आते हैं,वे आते देवताओं की कल्पना सेही। वेद पुरान एवम् धर्म ग्रन्थों में कैसी कैसी कल्पनाएं हैंवे सब संभव होती जा रही हैं। संभवतः हमारा विज्ञान इतना ही उन्नत था ,तब ही अनेक अदभुत् कल्पनाऐं सामने आईं हैं । तैयार रहिये एक नये आविष्कार के लिए।
darshan
आजकल मंदिर में दर्शन करने की होड़ सी लगी है। एकाएक जिन्हें शायद मंदिर के देवता के नाम भी नहीं मालुम होंगे मंदिर की सीढ़ी चढ़ रहे हैं किसलिये कि लोग यह न कहें कि अरे मंदिर नहीं गये दर्शन नहीं किये आज का श्रंगार गजब का था । मंदिर क्या भव्य सजा था । जैसे ज्ञानचक्षु खुल गये । जो साधारण आदमी है वह श्रद्धा से दर्षन करना चाहता है वह दर्षन में समय लगाना चाहता है वह ईश्वर की ऑंखों में झांक कर भाव देखना चाहता है । मन के साथ मूर्ति का भाव बदलता है पल पल पर आशा बढ़ती है कि भगवान् से तादात्म्य होगा पर वहॉं तो भीड़ ही भीड़ आगे बढो चाहे आगे वाले भक्त का सिर ही देखा हो पर रेले से बढ़ते जाओ । अंधेरे में खड़ी भगवान् की मूर्ति को ढू़ढने का प्रयास करते आगे बढ़ जाओ अगर जरा ठिठके कि पुजारी का हाथ सिर को सरकाने में लग जायेगा ,हो गये दर्शन मंदिर की सजावट निहारो और शान से कहो हम भगवान् के दरशन कर आये दुनिया को बताने लायक हो गया कि दर्शन कर आये भाव हीन ढंग से , पंडा पुजारी प्रसन्न आप प्रसन्न।