Wednesday, 14 October 2026

Insaan

 अगर बेटा बहू परिवार से अलग हो जाएतो बहू की गलती है,बेटे की मजबूरी थी,अगर बेटी सास ससुर से अलग रहने लगे तो जमाई बहुत अच्छा है,जो बेटी को अलग रहने ले गया।सच तो यह है अलग रहने का फैसला इकतरफा नहीं होता ,हालात दोनेों तरफ के होते हैं ।

लड़कियां मायके सिर्फ इसलिए नहीं आतीं कि ससुराल में कोई कमी होती है,बल्कि इसलिए आती हैं ,मायका वह जगह है जहां वह फिर से लड़की बनती है,जहां ढीले कपड़े पहनने पर कोई टोकता नहीं,बिना मेकप के भी खुद  को कम नहीं समझना पड़ता हैससुराल में बहू पत्नी मां होती है लेकिन मायके में सिर्फ बेटी होती है वहां सिर्फ जीत सकती है ।

हमेशा याद रखना इंसान नहीं बोलता उसका वक्त बोलता है। जब इंसान का वक्त नहीं बोलता तो उसकी कोई नहीं सुनता। शांत रहना सीखो,मेहनत करना सीखो कि तुम्हारा वक्त बोल सके ।

जब अपनों में ही गद्दार और चाल चलने वाले  पैदा हो जाए,मैदान में खड़ा शेर भी कुत्तों से बाजी हार जाता है। जो इंसान अपनों  को गिराने में अपनी जीत समझता है वह इंसान बहुत गिरा है 


Tuesday, 13 October 2026

Deepawali

 दीपावली


‘असतो मा सद्गमय,तमसो मा ज्योतिर्गमय्,मृत्योर्माऽमृतगमय।।


असत्य से सत्य की ओर,अंधकार से प्रकाष की ओर


मृत्यु से अमरता की ओर हमें ले जाओं ऊं षांति।’


ष्षुभ कर्म ष्षुभ लाभ ष्षुभ कामनायें ष्षुभदीपावली


दीपावली-पर्व नये धान के आगमन का भव्य और भक्तिपूर्ण अभिनंदन है,आदि षक्ति का                                   वंदन है। मन मंदिर का दीप आलोकित हो अज्ञान तिमिर का लोप हो। हम अपने हृदय के श्रद्धा सुमन विद्यावारिधि श्री गणेष और माता पदमासना के चरणों में अर्पित करते हैं माता महालक्ष्मी का न आदि है न अंत है वे आदिषक्ति हैं माहेष्वरी हैं योग सम्भूता हैं। उनके चरणों में हमारा षत ष्षत नमन।


हमारी मंगल कामना है कि माता विष्णुप्रिया हमारे मन मंदिर का अंधकार दूर करें। हमारे आंगन में हर्ष की फुुलझड़ियां छूट, राक्षसी प्रवृतियों का अन्त हो। धर्म की स्थापना हो सत्य की विजय हो । राष्ट्र में व्याप्त भ्रष्टाचार दुराचार और और तिमिर का नाष हो ।सर्वज्ञान का आलोक बिखरे। हर देहरी दीपों से झिलमिला उठे चाहे वह देहरी द्वारकाधीष कृष्ण की  हो या दीन हीन विप्र सुदामा की हो। सर्वत्र आलोक बिखरे तभी यह महापर्व सार्थक होगा और हम भक्त जन स्वर में स्वर मिलाकर कहेंगे ‘षुभदीपावली। दीपावली पर्वों का समूह है यह आवाजों नजारों कला और स्वाद का त्यौहार है ।


कार्तिक माह, भोर की सिहरन और उत्साह से भरे राधे राधे,राम राम करते जाते स्नानार्थी, कथकी का स्नान मोक्ष का रास्ता अर्थात् मोक्षदाता माह ,दीपावली भी कार्तिक माह में ही आती है,। कोजागिरी पुर्णिमा से माना जाता है लक्ष्मी घर घर झांकना षुरू कर देती है, कोजागिरी या षरत पूर्णिमा उस दिन चांदनी से अमृत झरता है जिसे आंखों में आंजने से नेत्र ज्योति बढ़ती है। घी बूरा और कालीमिर्च मिलाकर कोजागिरी पूणर््िामा की षीतल में चांदनी रखते हैं इसे नेत्र षक्ति का स्त्रोत माना जाता है। कार्तिक का स्नान अलस अंधेरे होता है। भोर से पहले सरसराती ठंड में नदी स्नान छापा तिलक और पितरों को देवमार्ग दिखाने के लिये आकाषी दिया दिखा कर तर्पण किया जाता है। आकासी दिया कार्तिक द्वितीया से आगामी मास की द्वितीया तक जलाये जाते हैं। ये दीप मनुष्य के बराबर पवित्र लकड़ी गााड़कर उसके ऊपर दो हाथ का बांस लगाया जाता है उसके ऊपर अष्टमुखी दीप जलाया जाता है। ये आठ दिये हैं 1 धर्म 2 महादेव 3 पृथ्वी 4 श्री राधा दामोदर 5 धर्मराज 6 प्रजापतिगण 7 पितृगण 8 अंधेरे में रहने वाले प्रेत। अब इसका स्थान कंदील ने ने लिया है ।


दीपावली दीपों से जगमगाती यह भारत भूमि आकाष में फैले अंधेरे को दूर करती यह धरती मुख्यतः हिन्दुओं का पर्व है, हिन्दू धर्म पर्वो और उत्सवों से लबरेज है, यह प्रतीक है आनंद और उत्साह का। हर पर्व के पीछे,हर मान्यता के पीछे वैज्ञानिक तथ्य हैं । 


 दीपावली क्यों और कब मनानी प्रारम्भ हुई इसकी बहुत सी कथायें हैं और दीप ही क्यों जलाये जाते हैं,तंत्र विद्या में दीप के ही अनेक भेद बताये गये हैं


दीपो ज्योति परब्रह्म, दीपो ज्योति जनार्दनः ।


दीपो ज्याति तमोहारी,दीपः सर्व सुखः प्रदः ।।


श्री विष्णु ने वामन अवतार के रूप में राजा बलि से तीन पग भूमि  मांगी और तीन पग में तीन लोक नाप लिये तो देव लोक में दीप जला कर खुषियां मनाई गईं।


दूसरी दीपावली की कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है जब देवासुर संग्राम हुआ तब तेरस के दिन धन्वतरि और अमावस्या के दिन लक्ष्मीजी प्रगट हुई इसलिये लक्ष्मी जी के आगमन की खुषी में दिये जलाकर उनकी पूजा की जाती है। छोटी दीवाली अर्थात चौदस के दिन श्री कृष्ण ने जरासंध का वध किया।


त्रेता युग में  राम चौदह वर्ष बाद पुष्पक विमान में रावण का वध करके लौट रहे थे,उनके स्वागत में नगर सजाया गया,खुषियां मनाई गईं और राम मार्ग न भटक जायें अंधेरी अमावस्या को रोषनी से जगमगा दिया था। उसी परंपरा को कायम रखते हुए हम राम का वनवास से लौटना दीपोत्सव के रूप में मनाते हैं।


राम ने सर्वप्रथम गणेष एवम लक्ष्मी की वंदना एवम पूजा की थी। कैकयी ने दुर्गा मां का आवाह्न किया इस प्रकार नव जीवन का प्रारम्भ हुआ। 


दीपावली पंच महोत्सव है। इसका प्रारम्भ दो दिन पहले धनतेरस से हो जाता है इस दिन बर्तन लक्ष्मी के भरने  के लिये खरीदते हैं। इससे संबंधित कथा है ‘ एक दिन यमराज ने अपने दूतों से पूछा ,‘क्या जीवों का प्राण हरण करते तुम्हें दया भी आई?’


दूतों ने कहा ‘ आपकी आज्ञा का पालन करना ही हमारा धर्म है,फिर भी कभी कभी विचलन होती है ।’


यमराज ने कहा ,‘कब और क्यों ?’


उत्तर देते हुए दूत ने हंस नामक राजा की कथा सुनाई जो जंगल में षिकार खेलते हुए हुए भटक कर पड़ोसी राजा की सीमा में चला गया जिसकी पत्नी का नाम हेमा था। जिसने कभी एक पुत्र को जन्म दिया था । जन्म समय के नक्षत्रों की गणना करने के बाद राज्य ज्योतिषी ने बताया  कि इस राजकुमार का विवाह होने के ठीक चार दिन बाद राजकुमार की मृत्यु हो जायेगी। यह सुनकर राजा ने यमुना के तट पर एक गुफानुमा घर में अपनी पत्नी और राजकुमार को रख दिया और यह निर्देष दिया कि राजकुमार पर किसी स्त्री की दृष्टि न पड़ जाये। समय बीतता गया। राजकुमार वयस्क हो गया। राजा हंस की नवयौवना बेटी एक दिन घूमती अपने पिता की तरह भटक कर उसी गुफा के पास से निकल। उसे देखने राजकुमार बाहर आया। राजकुमार ने यौवना को देखा राजकुमारी भी उस आकर्षक युवक को देखकर उस पर मोहित हो गई । दोनों ने वहीं गंधर्व विवाह कर लिया। जैसा कि राज ज्योतिषी ने बताया था विवाह के चौथी रात्रि राजकुमार की मृत्यु हो गई। यम दूतों ने कहा,‘ धर्म राज आपकी आज्ञा से हमने प्राणहरण तो कर लिये परन्तु उस नव परिणीता का रोदन सुनकर हमारा हृदय भी कंपने लगा ,वास्तव में युवावस्था की मृत्यु बड़ी दारुण होती है। इस मार्मिक दुर्धटना से युवकों की प्राणरक्षा का उपाय भी होना चाहिये।’


इस सुझाव पर ध्यान देते हुए यमराज ने कहा ‘ आज की तिथि में जो दीपदान करेगा उसके फलस्वरूप युवावस्था में होने वाली मृत्यु को टाला जा सकता है धनतेरस की रात दिया जलाने से यम को अनुकूल कर अपमृत्यु से बचा जा सकता है ।


धन तेरस के साथ दीपावली जिसे प्रकाषपर्व भी कहा जाता है का षुभारम्भ होता है। दीपावली अंधकार पर रोशनी की विजय,एक छोटा सा नन्हा सा दीपक भी मार्ग दर्शक बन जाता है बस अपने में विश्वास हो तो । वह भी घोर अंधेरे में राह दिखा देता है। नन्हा दीपक कह रहा है अपने को छोटा मत समझो असहाय मत समझो थेड़ी देर ही सही गहन अन्धकार को चीर कर कुछ कदमों के सहायक तो बनोगे । अर्थात् मन के अंधेरे को चीरने के लिये ज्ञान का दीपक जलाओ ,कुछ देर ही सही भला तो करेगा ही ।


अंधकार का भी अपना महत्व है ,अंधकार क्या होता है कितना कष्टप्रद है,यह तब ही ज्ञात होगा जब अंधकार है और दीपक का महत्व भी  तब ही ज्ञात होगा,नहीं तो उजाले में दीपक की क्या जरूरत? सब एक दूसरे पर आश्रित हैं,एक दूसरे का महत्व भी तब ही पता चलेगा ।


 नरक चतुर्दषी का दिन छोटी दिवाली के नाम से मनाया जाता है इस दिन के साथ छोटी बड़ी बहुत सी कहांनिया जुड़ी हुई हैं। कहा जाता है देवताओं के राजा इंद्र को हराने के बाद नरकासुर ने देव माता अदिति के कर्ण फूल छीन लिये व देवताओं व साधुओं की सोलह हजार कन्याओं को कारागार में डाल दिया। नरक चतुर्दषी के दिन श्री कृष्ण ने नरकासुर को मार डाला और देव व ऋषिकन्याओं को छुड़ाने के साथ ही देवमाता के कर्णफूल भ्ी वापस पालिये । इस विजय के प्रतीक स्वरूप श्री कृष्ण ने राक्षसराज के रक्त से अपने मस्तक पर तिलक किया। छुड़ाई गई कन्याओं ने भी इत्र चंदन आदि से स्नान कर स्वयं को पवित्र किया तब से इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान की प्रथा चल पड़ी।


कृश्ण ने नरकासूर का वध किया। विश्णु ने नरसिंह रूप में हिरण्याकष्यपु का वध किया था । इसी दिन समुद्र मंथन में धन्वन्तरि और लक्ष्मी प्रकट हुए। विश्णु से लक्ष्मी का विवाह हुआ। स्वर्ण मदिर का षिलान्यास इसी दिन हुआ । स्वामी रामतीर्थ का जन्म व महाप्रयाण दोनों इसी दिन इुए। दीन इलाही के प्रवर्तक सम्राट अकबर ने दौलतखाने के सामने 40 गज ऊंचे बांस पर आकाषदीप लटकवाया था। जहांगीर और बहादुरषाह जफर भी दीवाली धूमधाम से मनाते थे। महाभारत के अनुसार इस दिन पांडवों की वनवास और अज्ञातवास केबाद वापसी हुई । जैनियों के लिये महावीर स्वामी को मोक्ष प्राप्ति हुई। दयानंद सरस्वती का अवसान हुआ । 


दीपावली और जुए का चोली दामन का साथ है किसी अन्य पर्व पर द्यूतक्रीड़ा के विषय में नहीं सुना जाता। लक्ष्मी के साथ व्यापार का व्यापार अपने आप में जुआ है। लक्ष्मी पूजन के साथ साथ द्यूत क्रीड़ा या अक्ष क्रीड़ा को भी मान्यता मिली।ऋग्वेद में 63 पासों से खेले जाने वाले अक्षद्यूत का उल्लेख मिला है।पूजन के समय कौड़ी और पांसा फेंककर आगामी वर्षफल जानना चाहते हैं कि वह फल दायक रहेगा या नहीं। 


बरसात के बाद व्यापार फिर अपनी गति पकड़ता है कीट पतंगों को दूर करने के लिये सफाई पुताई और धंुआ किया जाता है।


सनातन धर्म ही में नहीं सभी धर्मों में किसी न किसी रूप में दीपावली मनाई जाती है । जैन धर्म में लक्ष्मी सरस्वती की पूजा होती है और लाडू चढ़ाया जाता है जिसका न आदि होता है न अंत उसी प्रकार जीवन का न आदि है न अंत।


दीपावली का त्यौहा भारत तें ही नहीं विदेषों में भी धूमधाम से मनाया जाता है । मेलबर्न में दीपावली में रोषनी के साथ तिरंगा भी लहराया जाता है। यह सन् 2006 में फेडरेषन स्क्वायर पर पहली बार ष्शुरू किया गया । कई देषों में सार्वजनिक अवकाष रहता है। नेपाल में पांच दिन यह त्यौहार मनाया जाता है लेकिन कुछ फरक ढंग से 


हमें नये युग के हिसाब से दीपावली मनानी चाहिये। उसे क्या स्वरूप दिया जाय ? किस ढंग से मनायें । हम मिट्टी के लक्ष्मी गणेष की पूजा करते हैं और फिर जमुना में प्रवाहित करते हैं। अब प्लास्टर ऑफ पेरिस से लक्ष्मी गणेष बनाये जाते हैं और उन्हें रसायन युक्त रंगों से रंगा जाता है जो जहरीले होते हैं वे यमुना के पानी में घुल कर उसे जहरीला बनाते हैं । मूर्तियां घुलती नहीं हैं और यमुना तल को प्रदूषित करतीं हैं।


आतिषवाजी में जहां गंधक का उपयोग किया जाता था जिससे कीट पतंगे मर जाते थे । अब आतिषबाजी का रूप बदल रहा है,समाज तरक्की कर रहा है परंतु अनेक हानिकारक रसायन लगाये जा रहे हैं तथा अग्नि कांडों का भी कारण बन रही है। दीपावली के षुभकामनाओं वाले कार्डों पर लक्ष्मी गणेष की या अन्य भगवानों की तस्वीर लगाते हैं फिर वे कार्ड बेकार हो जाने के बाद पैरों तले रौंदे जाते हैं । आतिषबाजी पर भी लक्ष्मी जी आदि की तसवीर लगाते हैं फिर वे जलाये जाते हैं क्या अपने देवताओं का अपमान नहीं है । इच्छा तो होती है हर दिन होली हो हर दिन दीवाली ऐसे ही उल्लास उमंग हो लेकिन कैसे ?नीरज जी की पंक्तियां याद आ रही हैं -


जलाओ दिये पर रहे ध्यान इतना 


अंधेरा घरा पर कहीं रह न जाये ।’ 


नयी ज्योति के घर नये पंख झिलमिल


उड़े मृत्य मिट्टी गगन स्वर्ग छूले


लगे रोषनी की झड़ी झूम ऐसी


निषा की बली में तिमिर राह भूले


खुले मुक्ति का वह तिमिर राह जगमग


उषा जा न पाये निषा आ न पाये ।




डा॰ ष्षषि गोयल


सप्तऋषि अपार्टमेंट


जी -9 ब्लॉक -3  सैक्टर 16 बी


आवास विकास योजना, 

आगरा 282010 ॰9319943446


म्उंपस दृ ेींेीपहवलंस3/हउंपसण्बवउ

Saturday, 26 September 2026

zen g

 हर जगह जेन जी जेन जी शब्द सुना जा रहा है,यह हमारी युवा पीड़ी के लिए हैं शब्द चीन का है। हम अपने देश से कभी नहीं जुड़ना चाहते ,दूसरों के पीछे चलते  हैं आगे नहीं ,तलवे चाटने की आदत हो गई हैक्यों अपनी युवा पीढ़ी को जेन जी ,झेन जी कहकर गुलाम बना रहे हैं जैसे हम चीन जापान के पिछलग्गू हैं। उनके पीछे दुम हिलाते चल रहे हैं। जेन जी की उपाधि पा युवाओं का सीना चौड़ा हो रहा है और वो चुस्त दुरुस्त हो जाते हैं ।

 आज भी राम आदर्श हैं,उनके भक्त हैं,पर राम की तो कोई पार्टी नहीं थी। उन्होंने तो प्रेम की धारा बहाई,जो उसमें आता गया पीता गया और पीकर तृप्त होता गया,न उन्होंने बांटा न काटा न अलग किया,सबको समान भाव दिया चाहे निषादराज हो या राक्षराज,वानर हो या गृद्धराज, उनके लिए सब एक ही है। 


Friday, 25 September 2026

jeevan ka aarambh

 जीवन का प्रारम्भ 

प्रारम्भ में पृथ्वी आग का गोला थी। जीवन उसमें असंभव था लेकिन लाखों साल में जब ठंडी हुई उस पर पर्त दर पर्त चढ़ती गई। फिर भीषण वर्षा ने चारों और पानी ही पानी कर दिया और बातावरण में कार्बनडाई आक्साइड और अमोनिया भर गई। बिजली गिरने से सूर्य की प्रखर किरणो से अनेकों रासायनिक परिवर्तन हुए तो छोटे छोटे जीवणुओं की उत्पत्ति हुई। स्वंय हमारा शरीर छोटे छोटे करोड़़ांे जीवाणुओं से मिलकर बना है। कालचक्र से ये जीवाणु दो प्रकार के बन गये काई वैक्टीरिया एक तरफ और दूसरी तरफ प्रोटोजा। प्रथम प्रकार से वनस्पति का निर्माण हुआ दूसरे प्रकार से जीव जन्तु का। इस प्रकार से हम कह सकते हैं जीव जन्तुओं के पिता प्रोटोजा है जिसका जन्म समुद्र में हुआ। 

सर्वप्रथम काई ने फोटो सिन्थेसिस शैली के आधार पर आक्सीजन का निर्माण आरम्भ किया लेकिन उसके भी कई लाख साल अब से करीब बारह अरब वर्ष पहले पृथ्वी पर आया। 

जीवन का प्रारम्भ समुद्र में हुआ लेकिन पृथ्वी के स्थान पर उभरने से जमीन का और पहाड़ों का निर्माण हुआ और ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ने लगी। पृथ्वी पर सर्वप्रथम जिस प्राणी का आविर्भाव हुआ वह था एम्फीबियन जो पानी और जमीन दोनों पर जीवित रह सकता था। कभी एक बार यह जीवाणु अधिक विकसित फेफेड़ों के साथ उत्पन्न हुआ और सूखी जमीन पर जीवित रहने में सफल हुआ धीरे धीरे उनकी मात्रा बढ़ी साथ ही ऊँचाई बढ़ती गई। ये जन्तु करीब 70,000,000 वर्ष पहले उत्पन्न हुए। ये बहुत भयानक और शक्तिशाली जन्तु ब्रोन्टोसोरस कहलाया है। चमड़ा माँस और हड्डियों का विशाल पिंड करीब 25 मीटर लम्बा, यह जीवन अपने अगले पैरों पर बड़ी मुश्किल से खड़ा हो पाता था। विशाल शरीर के मुकाबले दिमाग बहुत छोटा और अक्ल बहुत कम होती थी। कुछ जन्तु नीचे नीचे आकाश में उड़ने लगे थे वे पक्षियों के पूर्वज पैट्रोसॉरस थे। 

कई लाख साल बाद इतने विशाल पशुओं के बीच स्तन पायी जीव उत्पन्न हुआ यद्यपि शरीर अधिक बड़ा नही था लेकिन दिमाग बड़ा था और इसलिये वह विशाल जीवों के बीच अपने को बचा सका। 

फिर हिमयुग आया जिसमें तापमान 0 डिग्री से भी चालीस पचास डिग्री नीचे चला गया यह उन विशाल पशुओं के लिये विनाशकारी रहा लेकिन स्तनपायी जीव और पक्षियों के लिये विशेष नुकसानदायी नही रहा क्योंकि उनकी रगों में गर्म ख्ूान था। प्रकृति ने उनका शरीर बालों ओर पंखों से ढक दिया था जबकि विशाल शरीर और रेंगने वाले जीव ठन्डे रक्त वाले थे, साथ ही सादा चमड़ी से अपने को जीवित नही रख पाये और समाप्त हो गये जो बच गये थे वे थे मगर कछुआ साँप और छिपकलियाँ। हिम युग कई साल तक चला। बीच बीच में कुछ वातावरण गर्म होता  उस समय स्तनपायी जीवों और पक्षियों की प्रजातियाँ बढ़ती गई। एक प्रकार का दो मीटर लम्बा भेड़िया नुकीले दाँतों वाला शेर पाँच मीटर लम्बें डैन वाले गिद्ध अन्य नई प्रजातिया उत्पन्न हुई वे थे भैसें, बैल घोड़े और मैमथ, (हाथी का पूर्वज) गंेडा, हिप्पों हाथी बच गये। नई कुत्ते बिल्लियाँ की जातियाँ उत्पन्न हुई इस प्रकार आधी से अधिक पशु पक्षियों की जाति 30,000,000 साल पहले मौजूद थे। 

हिम युग के समय ही जो सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण उत्पत्ति हुई थी वे थे आदिमानव ये कुछ कुछ वन मानुष जैसे थे। अफ्रीका के मैदानों मंे घूमते थे तथा सीधे दो पैरों पर चलते थें ये अपने हाथों का उपयोग करना जानते थे। ये करीब 101, 120 सेन्टीमीटर लम्बें होते थे। पहला आदि मानव करीब 5000,000 साल पहले प्रगट हुआ लेकिन आधुनिक मानव 35,000 साल पहले बन पाया। 


vradhavastha

 वृद्धावस्था जीवन का अंतिम चरण नहीं वरन् अनुभवों का जमाना है । एक ऐसा पुस्तकालय जिसमें हजारों लाखों जीवंत  पुस्तकें हैं उनसे मिलिए बैठिये एक पुस्तक सामने होगी। उनके अनुभव जीवन की सफलताओं  असफलताओं  के विस्तृत कारण सुनने को मिलेंगे,उनको सुनोगे , समझोगे तो  आपने जीवन में इतने वर्ष जोड़ लिए, जो कुछ उन्होंने सीखा देखा आपने उनसे सीख लिया वे वर्ष आपके जीवन,और अनुभवों से जुड़ गये। श्वेत केश और चेहरे पर झुर्रिया,ये अनुभवहैं,अनुभूतियां हैं अगर आप ये उनसे लोगे तो से आपके लिए जीवन का उपहार ही होगा। इसलिए श्वेत केश को  केवल विगत समझने की भूल कभी मत करना। उनकी संचित विरासत को अपने हाथ में लेना यह आपका काम है,वे तो ऐसे दीपक हैं जो आने वाली पीढ़ी को प्रकाश देते हैं 

Wednesday, 23 September 2026

ukti sutra

 घर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल घर का बड़ा बेटा होता हे जो जिम्मेदारियों में निचोड़ा जाता है और बदले में सुनने को मिलता है। इसलिए बड़ा बेटा सबसे बेवकूफ कहलाता है जो परिवार को संभालते संभालते  खुद का ख्याल रखना भी भूल जाता है सुनने को मिलता है तूने किया ही क्या है ?

 किसी ने क्या खूब कहा है देर लगेगी सब ठीक होगा जो तुम्हें चाहिये वही होगा दिन बुरे है जिंदगी नहीं इसलिए वक्त आज तेरे खिलाफ होगा मगर आगे सब लाजबाव होगा ।

किसी ने क्या खूब कहा है बेटों के नसीब में मां बाप घर मकान सब होता है वे उसी घर में हक से रहते हैं लेकिन बेटियों के हिस्से में  अकसर परायापन आता है ,शादी के बाद न मां बाप का घर रहता है न पहले जैसा सहारा इसी थकान में बेटियां कह उठती हैं सब कुछ देना मगर अगले जन्म में बेटी मत बनाना ।

आपको पता है इंसान को सबसे ज्यादा तकलीफ कब होती है ,इंसान को सबसे ज्यादा तकलीफ तब होती है जब उसका कोई अपना खास झूठ बोल रहा है। और आप सच जानते हो तब  एक्सैप्ट करना मुश्किल होता है कि इतने विश्वास के साथ झूठ बोल रहा है कि जैसे कि मैं हकीकत जानता ही नहीं  हमें झूठ के बारे में पता है कि वइ अदाकारी कर रहा है तब देख कर इंसान टूट जाता है ।

 आजकल कद्र उस औरत की नहीं जो ईमानदारी और दिल से रिश्ता निभाती है बल्कि उस औरत की कद्रहोती है जो दिखावा करती है ।सचाई आजकल शोर नहीं मचाती इसलिए अनदेखी रह जाती है।

 जब पैसा नहीं कमाओ तो कहतेहैं घर से निकल क्यों नहीं जाते, अब पैसा कमाने लगते हैं तब कहते हैं घर क्यों नहीं आते । जब जेब खाली हो तो रिश्तेदार नजरें फेर लेते हैं। जब जेब भर जाए तो कहते हैं घमंड हो गया है ।


talash jasoosi kahani

 तलाश

रोगरी ब्राडशॉ ने स्टीमर के अपने सहयात्रियों की ओर देख लेकिन फैडरोफ वहाँ नहीं था यद्यपि उसे सूूचना मिली थी कि वह स्टीमर में है।

स्टीमर की घंटी तीखी आवाज के साथ बजी और स्टीमर पानी में तैर गया ब्राडशॉ  चिढ़ सा गया उसे उम्मीद थी कि यहाँ पहुँच कर उसकी खोज सफल हो जायगी उसने गहरी सांस ली उसे सूचना मिली थी कि स्टीमर पर अन्तराल कुख्याति प्राप्त फ्रैडरोफ दल का सदस्य मिलेगा इसका मतलब है वह स्टैन्डटैड पहुँच चुका होगा क्योकि उसे दस बजे स्टैन्सस्टैड से एन्जलबर्ग के लिये रेल पकड़नी थी उसके पश्चात वह पहाड़ी रास्ते से यात्रा करेगा।

स्टेनस्टेड पहुँच कर ब्रैडशॉ तुरंत टेªेन पहाड़ो के ऊपर गुजरने वाली दो सीट वाली बिजली की टेªन किराये पर ली। ऊँचे-ऊँचे पहाड़ो पर से तेजी से गुजरते उसका सारा ध्यान आगे चल रही टेªन पर था जिस पर एक व्यक्ति अटैची केस लिये बैठा था। काले रंग का दाढ़ी वाला व्यक्ति एंगलवर्ग पहुँच कर तेजी से टरमिनस से निकला पीछे पीछे ब्रैडशॉ था।

फैडरोफ सीधे फिर सीधे मुड़ा कुछ खेत पार किया और प्यूनीक्यूलर रेलवे स्टेशन पहुँचा जहाँ से और ऊँचे गू्रनीलिलाप पहुँचा जाता है। ब्रैडशॉ ने ओट में इंतजार किया फिर जैसे ही आगे कदम बढ़ाया वजनदार चीज का वार सिर पर पड़ा वह वहीं बहोश होकर गिर पड़ा।

फैडरोफ ने मुड़कर दुश्मन को देख मुस्कराया और आगे रास्ते पर बढ़ दिया। दस मिनट बाद जब ब्रैडशॉ को होश आया तब फैडरोफ का कही पता नहीं था। वह उसे चकमा देकर भाग निकला।

ब्रैडशॉ ने सिर को झटका दिया साथ ही मजबूत खोपड़ी को धन्यवाद जो करारा वार झेल गई रेलवे स्टेशन केा गौर से देखा एक ग्रूनीलियर की टिकट खरीदा।

ब्रैडशॉ ने ग्रूनल्लिाफ पहुँचकर लुुपितसिलवान में प्रवेश किया। एक ऊँचे खिलाड़ी जो व्यक्तिने स्थगन किया लेकिन प्लेटफार्म बिलकूल खाली था।

ब्रैडशॉ ने खड़ी हुई कार को देखा वह खाली थी वह वापस बैरियर पर आया।

अगर आप... ड्डपया पीछे से एक नम्र आवाज आई।

ब्रैडशॉ ने मुड़कर देखा लड़का साथ क्या आपको ब्रूटसी जाना है।

ब्रैडशॉ के मना करने पर उसने असहायसा इधर उधर देखा,

मैं आपकी कुछ सहायता कर सकता वह इधर उधर झांकता बोला,

ब्रैडशॉ ने एक मिनट उसे देखा फिर बुलाया, क्या यहाँ मेरे अलावा भी कोई आया था लंबा सा काली दाढ़ी वाला हैन्स ने तेजी से सिर हिलाया, हाँ हाँ पर क्या दो आपके मित्र थे ऐसा लगता तो नहीं,

नही ब्रैडशॉ ने कहा, आह.... यह ठीक है ऐसा ही हो। मुझे वह अच्छा नहीं लगा मैंने उससे भी पूछा था कि उसकी कुछ मदद करूँ जैसा कि मैं यात्रियों से पूछता हूँ वह गुस्सा हो गया।

ब्रैडशा उलझन में पड़ गया। मेरे झापड़ मार दिया, हैंन्स अपना बाया गाल सहलाता बोला, तुमने ही कहा, ब्रैडशा ने आंखे मिचकाते कहा,।

एक असहाय से व्यक्ति से जो लुफ्तिसिलबन कार में घुटनों के बल चल रहा हो उससे ऐसी आशा नहीं की जा सकती। चिढ़े से स्वर में है क्या मतलब.... घुटनों के बल.... ब्रेडशा सजग हो उठा,

उसने कार का दरवाजा खोला मैं जब उसके पास मदद के लिये गया वह कार में घुटनों े बल झुका हुआ उसके उखड़े फर्श को जमा रहा था। मुझे जरा आश्चर्य हुआ।

फिर....जरा जल्दी बताओ लड़के यह बहुत जरूरी है।

हैन्स ने कंधे हिलाये वह मुझपर जोर से चिल्लाया और गंवारो की तरह मुझ पर हााि जमा दिया।

अच्छा यह बताओ उस समय और भी यात्री थे।

नहीं और वह दाढ़ी वाला भी अभी लौटा नहीं है।

ठीक तुमरा नाम क्या है?

हैन्स... हैन्स शैफर

ठीक हे हैन्स अब सुनो ग्रूनीलिलप में पुलिस थाना है न?

हाँ  है सर

वहाँ इस पुर्जे के साथ जाओ यह अति आवश्यक है ब्रेडशॉ ने कागज पर कुछ लिखते हुए कहा, इसे पुलिस मैन को देकर यहाँ आना।

हैन्स तेजी से चला गया पाँच मिनट से भी कम समय में वापस आया वह उत्तेजित हॉफ रहा था।

पुलिस मैं डकलहैमर आपका पुर्जा पढ़कर इतने जोर से उछला कि छत से जा लगा हैन्स ने बताया ब्रैडशा ने हैन्स के कंधे थपथपाये और स्टेशन के टेलीफोन की ओर बढ़ गया। एक लंबी बातचीत के बाद हैन्स तक लौट आया।

ब्रूटसी तक कार में जा रहे हो जैसा आप कहें सर हैन्स तुरंत कहा, हो सकता है दूसरी बार में वह दाढ़ी वाला अकेला यात्रा कर रहा हो क्योंकि लगता है ब्रूटसी से आने वाला कोई यात्री है नहीं। तुम्हारी वजह से उसे नीचे आना पड़ेगा वह शक तो करेगा लेकिन तब तक उसका काम भी कार की फर्श का हो जायेगा।

ठीक है सर हैन्स कुछ उलझन में पड़ गया।

हाँ तब तक तुम्हारा पुलिस वाला मित्र भी उसे तैयार मिलेगा कहीं ऐसा न हो वो कालिया तुम पर शक कर उठे और हिंसक हो जाये।

हाँ.... यह कैसे मालुम होगा।

लुफ्तिसिलवान कार अपने अकेले यात्री को गू्रनलिलाप पर लेकर रूकी अभी मुश्किल से छः गज ही बढ़ा होगा कि पुलिस ने उसे पकड़ लिया।

मानियार फेडरॉफ आप ड्डपया मेरे साथ आइये।

फेडरोफ आश्चर्य से देखता रह गया एक क्षण के लिय क्रोध से विरोध भी किया लेकिन पुलिस वाले की पकड़ कस गई।

मुझे जाने दो मैंने आखिर किया क्या है?

पोलिस मैन ने साथी की ओर इशारा किया वह कार की ओर दौड़ एक मिनट बाद वापस आया उसके हाथ में एक बक्सा था। पुलिस वाले ने पत्थर जैसी कठोर मुद्रा से कैदी को देखा।

फेडरोफ पीला पड़ गया वह समझ गया उसका खेल खत्म हो गया।

बाद में विशेषज्ञों ने डिब्बे के सामिग्री की जांच की उसके अंदर एक शक्तिशाली बम था जो लुपितसिलवन को खत्म करने के लिये काफी ।

आपको क्या सरकार ने कहा था। हाँ इस पर शक था यहाँ तुम्हें पता नहीं। यहा तुम्हे पता नही विदेशी राजदूता यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य को देखने के लिये आने  वाले थे। इसके उपस्थित ने मुझे शक पैदा कर दिया था राजदूतों को हत्या इस देश में करवाकर वह उस देश को हमारा दुश्मन बना देते।