Wednesday, 23 September 2026

ukti sutra

 घर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल घर का बड़ा बेटा होता हे जो जिम्मेदारियों में निचोड़ा जाता है और बदले में सुनने को मिलता है। इसलिए बड़ा बेटा सबसे बेवकूफ कहलाता है जो परिवार को संभालते संभालते  खुद का ख्याल रखना भी भूल जाता है सुनने को मिलता है तूने किया ही क्या है ?

 किसी ने क्या खूब कहा है देर लगेगी सब ठीक होगा जो तुम्हें चाहिये वही होगा दिन बुरे है जिंदगी नहीं इसलिए वक्त आज तेरे खिलाफ होगा मगर आगे सब लाजबाव होगा ।

किसी ने क्या खूब कहा है बेटों के नसीब में मां बाप घर मकान सब होता है वे उसी घर में हक से रहते हैं लेकिन बेटियों के हिस्से में  अकसर परायापन आता है ,शादी के बाद न मां बाप का घर रहता है न पहले जैसा सहारा इसी थकान में बेटियां कह उठती हैं सब कुछ देना मगर अगले जन्म में बेटी मत बनाना ।

आपको पता है इंसान को सबसे ज्यादा तकलीफ कब होती है ,इंसान को सबसे ज्यादा तकलीफ तब होती है जब उसका कोई अपना खास झूठ बोल रहा है। और आप सच जानते हो तब  एक्सैप्ट करना मुश्किल होता है कि इतने विश्वास के साथ झूठ बोल रहा है कि जैसे कि मैं हकीकत जानता ही नहीं  हमें झूठ के बारे में पता है कि वइ अदाकारी कर रहा है तब देख कर इंसान टूट जाता है ।

 आजकल कद्र उस औरत की नहीं जो ईमानदारी और दिल से रिश्ता निभाती है बल्कि उस औरत की कद्रहोती है जो दिखावा करती है ।सचाई आजकल शोर नहीं मचाती इसलिए अनदेखी रह जाती है।

 जब पैसा नहीं कमाओ तो कहतेहैं घर से निकल क्यों नहीं जाते, अब पैसा कमाने लगते हैं तब कहते हैं घर क्यों नहीं आते । जब जेब खाली हो तो रिश्तेदार नजरें फेर लेते हैं। जब जेब भर जाए तो कहते हैं घमंड हो गया है ।


talash jasoosi kahani

 तलाश

रोगरी ब्राडशॉ ने स्टीमर के अपने सहयात्रियों की ओर देख लेकिन फैडरोफ वहाँ नहीं था यद्यपि उसे सूूचना मिली थी कि वह स्टीमर में है।

स्टीमर की घंटी तीखी आवाज के साथ बजी और स्टीमर पानी में तैर गया ब्राडशॉ  चिढ़ सा गया उसे उम्मीद थी कि यहाँ पहुँच कर उसकी खोज सफल हो जायगी उसने गहरी सांस ली उसे सूचना मिली थी कि स्टीमर पर अन्तराल कुख्याति प्राप्त फ्रैडरोफ दल का सदस्य मिलेगा इसका मतलब है वह स्टैन्डटैड पहुँच चुका होगा क्योकि उसे दस बजे स्टैन्सस्टैड से एन्जलबर्ग के लिये रेल पकड़नी थी उसके पश्चात वह पहाड़ी रास्ते से यात्रा करेगा।

स्टेनस्टेड पहुँच कर ब्रैडशॉ तुरंत टेªेन पहाड़ो के ऊपर गुजरने वाली दो सीट वाली बिजली की टेªन किराये पर ली। ऊँचे-ऊँचे पहाड़ो पर से तेजी से गुजरते उसका सारा ध्यान आगे चल रही टेªन पर था जिस पर एक व्यक्ति अटैची केस लिये बैठा था। काले रंग का दाढ़ी वाला व्यक्ति एंगलवर्ग पहुँच कर तेजी से टरमिनस से निकला पीछे पीछे ब्रैडशॉ था।

फैडरोफ सीधे फिर सीधे मुड़ा कुछ खेत पार किया और प्यूनीक्यूलर रेलवे स्टेशन पहुँचा जहाँ से और ऊँचे गू्रनीलिलाप पहुँचा जाता है। ब्रैडशॉ ने ओट में इंतजार किया फिर जैसे ही आगे कदम बढ़ाया वजनदार चीज का वार सिर पर पड़ा वह वहीं बहोश होकर गिर पड़ा।

फैडरोफ ने मुड़कर दुश्मन को देख मुस्कराया और आगे रास्ते पर बढ़ दिया। दस मिनट बाद जब ब्रैडशॉ को होश आया तब फैडरोफ का कही पता नहीं था। वह उसे चकमा देकर भाग निकला।

ब्रैडशॉ ने सिर को झटका दिया साथ ही मजबूत खोपड़ी को धन्यवाद जो करारा वार झेल गई रेलवे स्टेशन केा गौर से देखा एक ग्रूनीलियर की टिकट खरीदा।

ब्रैडशॉ ने ग्रूनल्लिाफ पहुँचकर लुुपितसिलवान में प्रवेश किया। एक ऊँचे खिलाड़ी जो व्यक्तिने स्थगन किया लेकिन प्लेटफार्म बिलकूल खाली था।

ब्रैडशॉ ने खड़ी हुई कार को देखा वह खाली थी वह वापस बैरियर पर आया।

अगर आप... ड्डपया पीछे से एक नम्र आवाज आई।

ब्रैडशॉ ने मुड़कर देखा लड़का साथ क्या आपको ब्रूटसी जाना है।

ब्रैडशॉ के मना करने पर उसने असहायसा इधर उधर देखा,

मैं आपकी कुछ सहायता कर सकता वह इधर उधर झांकता बोला,

ब्रैडशॉ ने एक मिनट उसे देखा फिर बुलाया, क्या यहाँ मेरे अलावा भी कोई आया था लंबा सा काली दाढ़ी वाला हैन्स ने तेजी से सिर हिलाया, हाँ हाँ पर क्या दो आपके मित्र थे ऐसा लगता तो नहीं,

नही ब्रैडशॉ ने कहा, आह.... यह ठीक है ऐसा ही हो। मुझे वह अच्छा नहीं लगा मैंने उससे भी पूछा था कि उसकी कुछ मदद करूँ जैसा कि मैं यात्रियों से पूछता हूँ वह गुस्सा हो गया।

ब्रैडशा उलझन में पड़ गया। मेरे झापड़ मार दिया, हैंन्स अपना बाया गाल सहलाता बोला, तुमने ही कहा, ब्रैडशा ने आंखे मिचकाते कहा,।

एक असहाय से व्यक्ति से जो लुफ्तिसिलबन कार में घुटनों के बल चल रहा हो उससे ऐसी आशा नहीं की जा सकती। चिढ़े से स्वर में है क्या मतलब.... घुटनों के बल.... ब्रेडशा सजग हो उठा,

उसने कार का दरवाजा खोला मैं जब उसके पास मदद के लिये गया वह कार में घुटनों े बल झुका हुआ उसके उखड़े फर्श को जमा रहा था। मुझे जरा आश्चर्य हुआ।

फिर....जरा जल्दी बताओ लड़के यह बहुत जरूरी है।

हैन्स ने कंधे हिलाये वह मुझपर जोर से चिल्लाया और गंवारो की तरह मुझ पर हााि जमा दिया।

अच्छा यह बताओ उस समय और भी यात्री थे।

नहीं और वह दाढ़ी वाला भी अभी लौटा नहीं है।

ठीक तुमरा नाम क्या है?

हैन्स... हैन्स शैफर

ठीक हे हैन्स अब सुनो ग्रूनीलिलप में पुलिस थाना है न?

हाँ  है सर

वहाँ इस पुर्जे के साथ जाओ यह अति आवश्यक है ब्रेडशॉ ने कागज पर कुछ लिखते हुए कहा, इसे पुलिस मैन को देकर यहाँ आना।

हैन्स तेजी से चला गया पाँच मिनट से भी कम समय में वापस आया वह उत्तेजित हॉफ रहा था।

पुलिस मैं डकलहैमर आपका पुर्जा पढ़कर इतने जोर से उछला कि छत से जा लगा हैन्स ने बताया ब्रैडशा ने हैन्स के कंधे थपथपाये और स्टेशन के टेलीफोन की ओर बढ़ गया। एक लंबी बातचीत के बाद हैन्स तक लौट आया।

ब्रूटसी तक कार में जा रहे हो जैसा आप कहें सर हैन्स तुरंत कहा, हो सकता है दूसरी बार में वह दाढ़ी वाला अकेला यात्रा कर रहा हो क्योंकि लगता है ब्रूटसी से आने वाला कोई यात्री है नहीं। तुम्हारी वजह से उसे नीचे आना पड़ेगा वह शक तो करेगा लेकिन तब तक उसका काम भी कार की फर्श का हो जायेगा।

ठीक है सर हैन्स कुछ उलझन में पड़ गया।

हाँ तब तक तुम्हारा पुलिस वाला मित्र भी उसे तैयार मिलेगा कहीं ऐसा न हो वो कालिया तुम पर शक कर उठे और हिंसक हो जाये।

हाँ.... यह कैसे मालुम होगा।

लुफ्तिसिलवान कार अपने अकेले यात्री को गू्रनलिलाप पर लेकर रूकी अभी मुश्किल से छः गज ही बढ़ा होगा कि पुलिस ने उसे पकड़ लिया।

मानियार फेडरॉफ आप ड्डपया मेरे साथ आइये।

फेडरोफ आश्चर्य से देखता रह गया एक क्षण के लिय क्रोध से विरोध भी किया लेकिन पुलिस वाले की पकड़ कस गई।

मुझे जाने दो मैंने आखिर किया क्या है?

पोलिस मैन ने साथी की ओर इशारा किया वह कार की ओर दौड़ एक मिनट बाद वापस आया उसके हाथ में एक बक्सा था। पुलिस वाले ने पत्थर जैसी कठोर मुद्रा से कैदी को देखा।

फेडरोफ पीला पड़ गया वह समझ गया उसका खेल खत्म हो गया।

बाद में विशेषज्ञों ने डिब्बे के सामिग्री की जांच की उसके अंदर एक शक्तिशाली बम था जो लुपितसिलवन को खत्म करने के लिये काफी ।

आपको क्या सरकार ने कहा था। हाँ इस पर शक था यहाँ तुम्हें पता नहीं। यहा तुम्हे पता नही विदेशी राजदूता यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य को देखने के लिये आने  वाले थे। इसके उपस्थित ने मुझे शक पैदा कर दिया था राजदूतों को हत्या इस देश में करवाकर वह उस देश को हमारा दुश्मन बना देते।





Monday, 7 September 2026

apne ko badlen

 हम अपने को बदलने  के लिए चमत्कार का इंतजार करते हैं,जीवन में कुछ जरूर ऐसा होगा जो हमारा जीवन बदल देगा। सब िदन एक से नहीं होते,लेकिन आवश्यकता है बदलाव के इंतजार करने का नहीं  वरन् अपने अंदर बदलाव लाना स्वयं हमारी जिम्मेदारी है । हम अपने चारो ओर स्वयं एक वलय का निर्माण कर लेते हैं और उससे आगे निकलना नहीं चाहते  पर अपने बनाये बंधन को स्वयं तोड़ना होगा । जो कुछ भी हो रहा है वे आपकी अपनी आदतों का परिणाम है,प्रतिबिंब है । गोल करने का श्रेय हर व्यक्ति लेना चाहता है पर पाता वही है जो लक्ष्य पर घ्यान केन्द्रित करता है और अवसर की तलाश करता है। अवसर आने पर उसे पकड़ लेता है । ‘मैं अपने को बदलने की कोशिश तो बहुत करता हूं पर बदल नहीं पाता‘यह केवल बहाना है,अनिच्छा अपने को बदलने की लेकिन वह तो आपका स्वभाव बन चुका है। आप अपने को बदलना नहीं चाहते । बदलाव क लिये कार्यशैली पर घ्यान केन्द्रित करना पड़ेगा जिस आदत को अदलना चाहते हैं उस पर भी ध्यान देना पड़ेगा कि उसे बदलने की नौबत क्यों आई है हम गलत थे यह स्वीकारोक्ति करते ही आप लक्ष्य की ओर बढ़ लेते हैं। यह घ्यान रहे कि पहले अपनी आदत को परखें कि कौन सी आदत बदलनी है । अच्छी आदत को बढ़ावा दें और बुरी आदतों को कम करने का प्रयत्न करें सोचलें उस पर अमल अवश्य करना है। आपकी यह छोटी सी पहल आपके सामन सफलता के द्वार खोल सकती है । निरंतरता बनाये रखने से सफलता का द्वार भी बड़ा होता जाता

Saturday, 5 September 2026

Anubhav

 जीवन में अच्छे बुरे दोनों अनुभव मिलते हैं यदि मीठी  स्मृतियां होती हैं तो कड़वे अनुभव जो कांटे की तरह चुभते रहते हैं ,आंख खुल जाए तो सीधे उसी दुनिया में पहुंच जाते हैं जहां कटु अनुभव मिले थे ,वे हमें झकझोरते रहते हैं । हुआ तो हुआ क्यों ? हमने क्या कमी करदी ऐसा करते तो ऐसा होता,वैसा करते तो वैसा हो जाता। उसने हमारे साथ ऐसा क्यों  किया फिर अपनी गलती का ऐहसास भी होता। हमको यह करना चाहिये था। तब आत्म बोध होता है अगर अपनी गलती होती है कि हमसे यह गलती हुई ऐसा नहीं करना चाहिये था ,यह आत्मा की स्वीकृति है ,अन्तर्मन की स्पष्टता है,शुद्धि है। इसका बीज पड़ा है तो उसे वृक्ष बनने देना है उसे मसलना नहीं है,यही आत्मा का विरेचन है। जीवन की कटुता को  कम कर शोधन करना है। अपनी अपंगता को  स्वीकारना फिर उसका शोधन करना ही आत्मा का संज्ञान है। नकारात्मकता को नकार कर अपनी कमियों को स्वीकारना है । परिस्थितियों का सामना करना ही हमें जीवंत बनाना है। 

Thursday, 3 September 2026

bcche aur mobaile

 अब बच्चों का लालन पालन बिलकुल अलग ढंग से होने लगा है एकिताबी ढंग से एमां बच्चे को अपना दूध तो पिलाना चाहती ही नहीं है उस पर समय नहीं है  । बोतल से दूध पिलाया जाता है क्योंकि एक तो मां पर समय नहीं होता  िकवह बैठ कर बार बार बच्चे के लिये अपना समय और फिगर खराब करें  दूसरे उनके हिसाब से  डिब्बाबंद दूध में सारे विटामिन्स आदि मिलाये जाते हैं उनके हिसाब से  वह फायदे मंद है ।एबोतल लगा दी बच्चा अपने आप दूध पीले  बोतल हटाये नहीं एउसके सामने मोबाइल खोल कर रख देते हैं और बच्चा उन चलती फिरती तस्वीरों को देखते देखते बोतल खाली कर देता है। उसे अपने पेट का ज्ञान नहीं हो पाता है जब कि मां का दूध पीने पर बच्चा अपने आप पेट भरने पर मुंह हटा लेता है । बोतल पूरी खाली करने पर मां खुश है कि उसने दूध पी लिया उसे  चाहे पहला दूध हजम हुआ या नहीं इसका संज्ञान करने की जरूरत ही नहीं समझी जाती । वह चलती फिरती तस्वीरें देखने में मगन हो जाता है। मां अपने काम में व्यस्त हो जाती हैएउसकी ड्यूटी खत्म और यहीं से बच्चे मोबाइल एडिक्ट होते जाते हैं। बच्चे जैसे जैसे बड़े होते हैं वो देखते हैं कि खाली समय में मां बाप मोबाइल देख रहे हैं तो वह भी उसे देखने की जिद करने लगता है और बच्चा रोये नहीं इसलिये मोबाइल पकड़ा दिया जाता है । मां बाप राहत की सांस लेते हैं कि बच्चा चुप है और वो अपना काम आराम से  कर पा रहे हैंएयह नहीं जानते कि वो अपने बच्चे की जिंदगी संकट में डालदेते हैं।

Wednesday, 2 September 2026

umra ke padav

 जैसे जैसे उम्र बढ़ती है निष्क्रियता बढ़ती जाती है एक एक कर सब बिछड़ते तो जाते हैं रह जाती हैं स्मृतियां अच्छी और बुरी जिन्होंने गहराई में कहीं स्थान बना रखा होता है । जब नाते रिश्तेदार दूर हो जाते हैं तब साथ रहता है आंतरिक संसार जो एकाकीपन का साथी होता है ,यही असली संपत्ति है जो अंततक साथ रहती है,अगर किसी का बुरा नहीं किया होता है तो आत्म तुष्टि साथ रहती है। एकाकीपन जीवन की एक रिक्तता का कारण है जब ये स्मृतियां सुख या दुख का कारण बनती हैं शारीरिक शक्तियां साथ छोड़ देती है परंतु आंतरिक शक्ति जीवन को सहज बनाती है। सच्चा सुख बाहरी साधनों में नहीं मनुष्य के अपने अंदर निहित है 

Monday, 31 August 2026

Atmtushti

 मनुष्य क्या बनना चाहता है,यह वह स्वयं ही बन सकता है । सर्वाधिक आवश्यक है आत्मतुष्टि,आत्मसंतोष,आत्मचिेतन,। तभी वह खुश रह सकता है। खुश रहने का साधन अपने अंदर ही खोजना पड़ेगा। अगर आत्म तुष्टि के लिए दूसरों को दुःख देने का प्रयास किया जाता है तो वह आपको क्षणिक सुख देगा कि आपने दूसरे व्यक्ति का नुकसान कर दिया। उसे धक्का दे दिया वह गिर गया और प्रसन्न होते हैं परंतु वही धक्का आपको बार बार अपने अंदर महसूस होगा और बेचैन करता रहेगा और अपराध बोध आपको नीचे गिरा देगा। उत्कृष्टता संतोष देती है। अच्छा काम संतुष्टि प्रदान करता है और वह आपकों सुख प्रदान करेगा कि आपने किसी का बुरा नहीं किया। यह भावना अंतरतम की गहराइयों तक आत्म तुष्टि देगी। किसी से छीनकर लिया गया सुख क्षणिक होगा पर जिंदगी भर अपराध बोध भी देगा ं