Tuesday, 18 August 2026

pin code

 पिन कोड क्यों जरूरी है ?

 अब डाक में पिन कोड लिखना जरूरी माना जाता है । पिन कोड क्या है और क्यों जरूरी है ? पिन कोड का पूरा नाम ‘पोस्टल इंडैक्सनंबर’ है ।यह पत्र या लिफाफे के पते के सबसे नीचे लिखा जाता है। इस प्रणाली का प्रारम्भ भारत की स्वतंत्रता की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर अर्थात 15 अगस्त् 1972 को हुआ था । पिन में छः सार्थक अंक होते हैं उदाहरण के लिये लखनऊ का पिन कोड है 223001। इस छः अंकों में पत्र को  जल्द और सुनिश्चित वितरण के लिए इस प्रणाली में भारी योजना सम्मिलित है। पिन कोड का पहला इंक प्रदेश एवं द्वितीय उप प्रदेश को व्यक्त करता है। अर्थात््ा 11 अंक दिल्ली 12से 17 तक  हिमाचल प्रदेश ,20 से 29 तक उत्तरप्रदेश,30 से 34 तक रास्थान ,36 से 39 तक गुजरात ,के लिय 56 से 59 तक कर्नाटक 50 से 53 तक आंध््रप्रदेश ,60 से 64 तक तमिलनाडु 67 से 69 तक केरल 70 से 74 तक पश्चिम बंगाल 75 से 77 तक उड़ीसा के लिये जब कि उत्तरी पूर्वी पोस्टल सर्किल अर्थात (अरुणाचल, असम, मेघालय, मणिपुर ममिजोरम ,नागालैंड, त्रिपुरा , के लिए 75 एवं 79 अंक निर्धारित है ।)

तीसरा अंक जिससे कि प्रथम तीन अंक से डाक छटनी जिले को प्रदर्शित करते हैं जैसा कि लखनऊ शहर के प्रथम तीन अंक 226 है । पिन कोड का चौथा अंक डाक भ्रमण मार्ग को प्रदर्शित करता है जिस पर डाक घर को संकेत करते हैं। उदाहरणार्थ 001 लखनऊ डाकघर के लिए है । इस छटाई से भौगोलिक जानकारी की कोई आवश्यकता इसके प्रयोग से नहीं रह जाती हे साथ ही साथ पत्रों की छटाई बहुत आसानी से और तीव्रगति से सहीप्रकार होती है। क्योंकि इस विधि में पत्रों की छटाई स्थानों के नाम के बजाए नम्बर के अनुसार की जाती है इसलिए एक ही या लगभग एक जैसे नाम वाले स्थानों के लिये गलत छटाई की गंुजाइश नहीं रहती है । इसके अतिरिक्त कई प्रकार की लिपि या लिखावट की समस्या भी सामने नहीं आती है क्योंकि पिन कोड सदैव अंकों में लिखे जाते हैं ।


Monday, 17 August 2026

naye avishkar

 हम असंभव को संभव नहीं मानना चाहते। बिना पंख हम नहीं उड़ सकते अनेकों प्रयोग हुए पर संभव नहीं हुआ । देवता ही उड़ सकते हैं,साधारण मनुष्य नहीं पर मनुष्य ने विमान बनाया फिर इन्तक्षि में पहुचा,चांद पर पहुंचा,और भी न जाने कहां कहां पहंुचना चाहता हैश्ह तभी संभव है ज बवह विश्वास करे। साधु नदी पर  चल रहा है, जरूर कुछ नीचे लगाया होगा,तब ही चल रहा है,तैराक नीचे जाकर देखते हैं पर कुछ नहीं मिलता,यह तो देवताओं के ही बस की बात है। पर संभव हुआ । नित्य नये आविष्कार सामने आते हैं,वे आते देवताओं की कल्पना सेही। वेद पुरान एवम् धर्म ग्रन्थों में कैसी कैसी कल्पनाएं हैंवे सब संभव होती जा रही हैं। संभवतः हमारा विज्ञान इतना ही उन्नत था ,तब ही अनेक अदभुत् कल्पनाऐं सामने आईं हैं । तैयार रहिये एक नये आविष्कार के लिए।

darshan

 आजकल मंदिर में दर्शन करने की होड़ सी लगी है। एकाएक जिन्हें शायद मंदिर के देवता के नाम भी नहीं मालुम होंगे मंदिर की सीढ़ी चढ़ रहे हैं किसलिये कि लोग यह न कहें कि अरे मंदिर नहीं गये   दर्शन नहीं किये आज का श्रंगार गजब का था । मंदिर क्या भव्य सजा था । जैसे ज्ञानचक्षु खुल गये । जो साधारण आदमी है वह श्रद्धा से दर्षन करना चाहता है वह दर्षन में समय लगाना चाहता है वह ईश्वर की ऑंखों में झांक कर भाव देखना चाहता है । मन के साथ  मूर्ति का भाव बदलता है पल पल पर आशा बढ़ती है कि भगवान् से तादात्म्य होगा पर वहॉं तो भीड़ ही भीड़ आगे बढो चाहे आगे वाले भक्त का सिर ही देखा हो पर रेले से बढ़ते जाओ । अंधेरे में खड़ी भगवान् की मूर्ति  को ढू़ढने का प्रयास करते आगे बढ़ जाओ  अगर जरा ठिठके कि पुजारी का हाथ सिर को सरकाने में लग जायेगा ,हो गये दर्शन मंदिर की सजावट निहारो और शान से कहो हम भगवान् के दरशन कर आये दुनिया को बताने लायक हो गया कि दर्शन कर आये भाव हीन ढंग से , पंडा पुजारी प्रसन्न आप प्रसन्न।


Sunday, 16 August 2026

ek shabd jgooth

 हर व्यक्ति अपने चारो ओर एक घेरे का निर्माण करता है कि वह कैसा होना चाहिये या कैसा है? यदि वह उसके अनुरूप नहीं होता है तो झूठ का सहारा लेता है। जिससे वह समाज में अपने अनुरूप स्थान ले सके। आजकल मोबाइल ने सबसे अधिक झूठ बोलना सिखाया है। वह घर में बैठा होगा और कहेगा मैं दूसरे शहर में हूँ। लैंड लाइन फोन से तो यह निश्चित हो जाता था कि वह घर पर ही है। बात नही करनी है ,मैं मीटिंग में हॅूं, मैं गाड़ी चला रहा हूँ बाद में बात करूँगा और वह बाद फिर नहीं आता। 

स्वंय की कमियों को छिपाना चाहता है श्रेष्ठ और श्रेष्ठ होना चाहता है अपनी कमियाँ होती हैं तो उसे झूठ के सहारे पूरी करता है। आमतौर पर यह सबसे अधिक डा॰ की डिग्री के लिये प्रयुक्त हो रहा है। किसी प्रसिद्ध डाक्टर के यहाँ नौकरी करके उसके यहाँ कम्पाउडरगिरी करने के बाद कुछ दवाओं के और बीमारियों के नाम सीख कर वह डाक्टर का बोर्ड लगा कर बस्तियों में दुकान खोल लेता है। ऐसे झोला छाप डाक्टर जनता के जीवन के साथ खिलवाड़ करता है।एक पी एच डी डिग्री प्राप्त डाक्टर होते हैं। अगर सहयोगी डाक्टर है तो वह क्यों नहीं है एकाएक वह डाक्टर लगाने लगता है। अब कोई डाक्टर की डिग्री देखने तो नहीं आ रहा है। एक लेख लिख कर उसे अपनी थीसिस बताकर डिग्री लगाने वाले उतने ही हैं जितने सड़क पर नीली बत्ती और हूटर लगाकर घूमने वाले आस पास अपने चारो ओर एक झूठ का वलय बनाकर आइ ए एस, पी सी एस अधिकारी के समकक्ष दिखाना। 

परिवार में यदि एक व्यक्ति उच्च अधिकारी है उस घर का हर सदस्य अपने को अधिकारी ही बतायेगा और उसी ठसके से चलेगा। एम्बुलेन्स में सवारी बैठाकर टौल टैक्स बचाता सब बाधायें पार करना कितना आसान है बस एम्बुलेंस शब्द ही तो लिखा है और अधिक क्या झूठ बोला है। एक शब्द बस एक शब्द झूठ। 


Tuesday, 11 August 2026

main hi sab kuch

 एक समय आता है जब हम अपने ऊपर से बड़ों के साये को झटक देते हैं और अपने फैसले अपने आप लेने लगते हैं तब अपनी सब बातों के हारजीत के सफलता के असफलता के स्वयं जिम्मेदार होते हैं।पर बहुत बार हम उसके जिम्मेदार स्वयं को  नहीं और को मानते हैं,परंतु सफलता में वे अपनी मेहनत अपनी कुशलता को ही श्रेय देते हैं तब समाज,माता पिता भाई बहन, कहीं नहीं होते । अगर कहीं कुछ गलत हो रहा होता है तो उसकी जिम्मेदारी औरों की हो जाती है । नहीं मैं गेम खेलना नहीं छोड़ सकता,मुझे भी कुछ मनोरंजन चाहिये । उससे मेरा दिमाग फ्रैश हो जाता है। स्किल चाहिए उसके लिए भी ।कोई भी कार्य न कर पाने के लिए औरों पर छोड़ने के लिए बहुत विकल्प हैं ‘क्या करूं मै। चाहता तो बहुत था पर परिस्थिति नहीं बन पाई,अगर सब ठीक रहता तो देखते मैं क्या कर देता। बॉस बार बार टोकते थे नही ंतो एक से एक बढ़िया प्रोजेक्ट बनाता आदि आदि

Monday, 10 August 2026

apne prati imandaar hain

 क्या आप  अपने प्रति ईमानदार हैं?एक बार अपनी क्रियाओं का विश्लेषण करें अपने प्रति ईमानदार बनना औरों के साथ ईमानदार होने से अधिक कठिन प्रक्रिया है। दूसरों की गलती का विश्लेषण बार बार और सबसे करेंगे पर अगर विवाद में स्वयं अपना विश्लेषण करने पर कई बातों पर पर्दा डालने का प्रयास करेंगे। अपने दोषों का विश्लेषण करना आसान नहीं है इसमें स्वयं का सामना स्वयं से होता है और तब अपने को बेचारा बताकर एकतरफ रखने का प्रयास रहता है। सामने वाला आपकी बात समझ ही नहीं पाया आपने ठीक किया था। गलती सदा दूसरे की ही होती है। अपने को बचाने का प्रयास रहता है। आप के अनुसार आप अयोग्य व्यक्ति से बात कर रहे थे। जागरूक रहें  समय के साथ चलना चाहिये ,पिछली बातों के साथ चिपके न रहें ।

Friday, 7 August 2026

jeevan ek khel

 गर्मी में ठंडी हवा ताजगी देती है तो सर्दी में धूप की गर्मी राहत,धूप तो गर्मी में भी निकलती है,सर्दी में भी पर उसकी नीयत बदल जाती है। हर मौसम का अपना आनंद है । बसंत में फूल का,वर्षा में भीगी भीगी सी धरती,पेड़ पौधे धुले धुले से जैसे प्रसन्नता से नाच रहे हों पर गर्मी में तपन में भी गर्म हवा के साथ लहराते ही व्यतीत करते हैं। अपने दुःखों के साथ भी जीना सीखिये। चुल्लू चुल्लू कर उन्हें उलीच दीजिये बसंत आयेगा अवश्य आयेगा ।

जीवन एक ऐसा खेल है जिसमें सांप हैं तो सीढ़ियां भी हैं  । सांपों से बचना आना चाहिये,जितनी तेजी से समय का सदुपयोग करेंगे सीढ़ियां भी उतनी तेजी से चढेंगे ।कभी अनेक कठिनाइयां एक के बाद एक सामने आ जाती हैं,कभी हंसते हंसते समय गुजरने लगता है,अगर चाुनौतियों से घबराने लगेंगे तो जीवन के इस खेल में हार जायेंगे। साहस से काम लेना ही चुनौती है। अगर निराशा होती है जो अपने ऊपर से आत्मविश्वास डगमगाने लगता है। हर व्यक्ति के आगे फूल तो हमेशा नहीं रहते और फूल होते हैं तो वो सूखते भी हैं,पर उन सूखे फूलों को भी सुगंध में परिवर्तित करते जाना यही जीवन है। कचरे की तरह फेंक देना हताशा है। जीवन की चुनौतियों से भागना है । सामना करने से घबराने से तो जीवन की हर घड़ी झेलने लायक नहीं रहेगी ।