एकाएक बहुत दिन बाद किसी से मिलते हैं तो समझ में नहीं आता कि क्या बात करें,तो कहते हैं ‘और क्या हाल है ,क्या चल रहा है ?’ अब सामने वाला चुप सा है । असहज वह क्या बताए कि क्या चल रहा है ,बेमन से कहता है ठीक ही चल रहा है। असहजता से अलग ’अरे मजे में हैं या बुरे हाल है ।’यही जबाव हो सकते हैं। कुछ भी एकाएक कहना मुश्किल होता है और बातचीत सीमित हो जाती है। परंतु यदि व्यक्ति की प्रशंसा की जाये कि अरे भाई बहुत बढ़िया या प्रशंसा में कुछ कहा जाये तो सामने वाला प्रसन्न हो जाता है। हर व्यक्ति अपने लिए अच्छा ही सुनना चाहता है,अगर अधिक परेशानी में नहो तो परेशान व्यक्ति से सहानुभूति के बोल उसके मन को खोल देते हैं। या यह कहना -अरे भाई जरा सलाह दो मुझे बच्चे का नाम रखना है या उसे पढ़ाना है कौन सा स्कूल अच्छा है या बच्चे के लिए, कोई संबंध बताओ बेटी के लिए अपनापन दिखाता है ।
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