क्या आप अपने प्रति ईमानदार हैं?एक बार अपनी क्रियाओं का विश्लेषण करें अपने प्रति ईमानदार बनना औरों के साथ ईमानदार होने से अधिक कठिन प्रक्रिया है। दूसरों की गलती का विश्लेषण बार बार और सबसे करेंगे पर अगर विवाद में स्वयं अपना विश्लेषण करने पर कई बातों पर पर्दा डालने का प्रयास करेंगे। अपने दोषों का विश्लेषण करना आसान नहीं है इसमें स्वयं का सामना स्वयं से होता है और तब अपने को बेचारा बताकर एकतरफ रखने का प्रयास रहता है। सामने वाला आपकी बात समझ ही नहीं पाया आपने ठीक किया था। गलती सदा दूसरे की ही होती है। अपने को बचाने का प्रयास रहता है। आप के अनुसार आप अयोग्य व्यक्ति से बात कर रहे थे। जागरूक रहें समय के साथ चलना चाहिये ,पिछली बातों के साथ चिपके न रहें ।
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