मीठा मीठा मैं खाऊं कड़वा कड़वा थू । हर व्यक्ति सुख चाहता है ,अच्छा अच्छा चाहता है ,जरा सी भी विपरीत परिस्थिति आई कि वह दुःखी हो जाता हैऔर दुःखों की तकलीफ की पर्तें एक एक कर जमती चली जाती हैं। अपने दुःख हर किसी से कहते हैं कहने से दुःख हल्का लगने लगता है । पर हर किसी से दुःख कहा भी नहीं जा सकता,अगरकिसी से आप दुःख कहोगे तो लोग रास्ता बदल लेते हैं,‘ कौन हर समय रोना सुनें। दुःख की बात नहीं सुख भी बताना मुश्किल है,सुख सुनकर अनेक दुखी हो जाते हैं।खुशी दुःख की वजह से ही छिपाते हैं। परंतु दुःख सुख तो धूप छाांव है वे दिन तो देखने ही पड़ेंगे सदा खुशी तो नहीं रह सकती,तो दुःख भी नहीं रहता है। अगर पर्वत विशाल और मन मोहता है और ऊंचाइयों को प्रेरित करता है ,तो घाटी भी बहुत सुंदर होती है पर्वत की चढ़ाई कठिन है तो घाटी की उतराई भी सहज नहीं है ।
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