जिंदगी हमें कुछ न कुछ अवसर अवश्य देती हैलेकिन यह हम पर निर्भर हे कि हम उसे कैसे लेते हैं,उसे पकड़ पाते हैं या नहीं अगर उस अवसर को जीवन में उतार लिया या उस पर आगे कदम बढ़ाये तो सफलता अवश्य मिलेगी। और पहली सफलता पर अपने को बहुत होशियार समझ लेना सबसे बड़ी भूल है। अवसर को पकड़ने का पहला प्रयास शिक्षा देता है कि हमें आगे किस प्रकार अवसरों पर ध्यान देना है न कि यह सोच लेना िकवे तो एक्सपर्ट हो गये हैं उनकी पकड़ मजबूत है उनमें आगे देखने की शक्ति है,और यहीं जीवन में मात खा जाते हैं । अधिक आत्मविश्वास मनुष्य की देखने की शक्ति कम कर देता है। हमेशा अपने को नौसिखिया ही समझें। सफलता की सीढ़ी पर चढ़ने के साथ यदि असफलता हाथ लगती है तो डिप्रैशन में चला जाता है,अपने ऊपर से आत्मविश्वास डगमगा जाता है,परंतु मनुश्य वही है जो न हार से डरे न जीत पर अधिक धमंड करे। महान् व्यक्तियों की जीवनी पढ़े पायेंगे वे हारे थे पर टूटे नहीं और सफल हुए। सफलता उन्हें एकदम से नहीं मिलीटूट टूट कर मिली । मनोबल गिरने न दें।मनोबल रहेगा तो असफलता सफलता में बदल जायेगी।यह देखें असफल क्यों हुए। अपनी योजना पर घ्यान दें । उसमें स्किल बढ़ायें,अवश्य कहीं कोई कमजोरी रही होगी उसकी ओर ध्यान दें सफलता अवश्य मिलेगी ।
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