Thursday, 20 October 2022

पतंग

 उड़ती पतंग की डोर टूट जाती है

है से थी में बदल जाती है

आसमान में उड़ती है पतंग अनेकों

पर  छत पर चरखी पड़ी रह जती है



चलते चलते चित्र बनाते बनाते

पत्थर में बदल जाती है

फूल पर अश्क बनकर ठहरी बूॅंद

मौत की फिसल पट्टी से सरक जाती है 


Tuesday, 18 October 2022

deepavali shubh ho

  दीपावली

‘असतो मा सद्गमय,तमसो मा ज्योतिर्गमय्,मृत्योर्माऽमृतगमय।।

ष्षुभ कर्म ष्षुभ लाभ ष्षुभ कामनायें ष्षुभदीपावली

दीपावली-पर्व नये धान के आगमन का भव्य और भक्तिपूर्ण अभिनंदन है,आदि षक्ति कावंदन है। मन मंदिर का दीप आलोकित हो अज्ञान तिमिर का लोप हो। हम अपने हृदय के श्रद्धा सुमन विद्याावारिधि श्री गणेष और माता पदमासना के चरणों में अर्पित करते हैं माता महालक्ष्मी का न आदि है न अंत है वे आदिषक्ति हैं माहेष्वरी हैं योग सम्भूता हैं। उनके चरणों में हमारा ष्षत ष्षत नमन।

हमारी मंगल कामना है कि माता विष्णुप्रिया हमारे मन मंदिर का अंधकार दूर करें। हमारे आंगन में हर्ष की फुुलझड़ियां छूटें राक्षसी प्रवृतियों का अन्त हो। धर्म की स्थापना हो सत्य की विजय हो । राष्ट्र में व्याप्त भ्रष्टाचार दुराचार और और तिमिर का नाष हो सर्व, ज्ञान का आलोक बिखरे। हर देहरी दीपों से झिलमिला उठे चाहे वह देहरी द्वारकाधीष कृष्ण की होया दीन हीन विप्र सुदामा की हो। सर्वत्र आलोक बिखरे तभी यह महापर्व सार्थक होगा और हम भाक्त जन स्वर में स्वर मिलाकर कहेंगे ‘षुभदीपावली


Saturday, 15 October 2022

astha

 ऽ कई व्यक्ति अपने धर्म की अवमानना करने वालों की हत्या कर देते हैं लेकिन हिन्दू अपने देवी देवताओं का स्वयं अपमान करता है अपने विष्वास की हत्या करता है । नव दुर्गापर कन्या लांगुरा का पूजन घर घर किया जाता है उन्हें खाना खिलाकर वस़्त्र या कोई समान दिया जाता है साथ ही पूरी हलुआ चना। छोटे छोटे बच्चे दो पूरी खाकर जिनका पेट भर जाता है वह अतिरिक्त पूरियों का बोझा थैली में भरकर  एक घर से दूसरे घर भागते रहते हैं उनके लिये प्रमुख आकर्षण पैसे या मिलने वाली वस्तु है। उसदिन जगह जगह भंडारे होते हैं पेट और घर तो वैसे ही भर जाता है।बच्चे पूड़ी हलुआ सड़क पर फेंक पैसे और सामान रख लेते हैं । खाना सड़क पर घूल मिट्टी में लिथड़ता रहता है ।

इसी प्रकार देवी पर महिलाऐं लोटा ढारती हैं एक महिला देवी का श्रृंगार कर हटने भी नहीं पाती कि दूसरी आकर पानी डाल देती है  देवी के आगे रखीं पूरियां पानी में गल जाती हैं किसी के खाने योग्य नहीं रहतीं पुजारी  उनकी कोने में ढेरी लगाता जाता है लेकिन महिला अपना कर्म करती है और चल देती है । सुबह पुजारी मंदिर साफ करता है और उस ढेर को कूड़े के ढेर पर डाल देता है जिसे गाय कुत्ते भी मुंह नहीं लगाते। हे न अन्न का अपनमान और देवी के भोग का अपमान । वैसे हम भोग का एक दाना भी जमीन पर नहीं गिरने देना चाहते  लेकिन हम में आस्था का स्वरूप बिगड़ा हुआ है कहना न होगा आस्था है ही नहीं ।


Friday, 14 October 2022

muktak

 छोटी सी खता से भी हो जाये पानी 

हाथ न छोड़ो उसका पूरी जिंदगानी

छोटी सी पतवार भी काट देती है 

विषाल उफनते समंदर का पानी 

Wednesday, 12 October 2022

kavita astitva

 तू है तेरे आस्तित्व के लिये दुनिया से लड़ा था मैं 

दुःख आया तो तू कहाॅं है तू कहीं नहीं है अड़ा था मैं 

’

जर्रे जर्रे में तू है तो मुझे बता ए ईष्वर

नन्हीं बच्ची को कुचला गया तब क्या षीषे में जड़ा था

ऽ दरख्त पर बैठी चिड़िया को बाज लेकर उड़ गया

कुछ देर पहले चिड़िया ने भी कीड़े का घर उजाड़ा था।


ऽ लोग तो धरती से आसमान में उठ झूम उठते हैं 

    पर यह चांदनी देखो  आसमान से धरती पर आकर खुष है ।


Tuesday, 11 October 2022

rishte

 ऽ आज की तेज रफ्तार जिंदगी में यदि किसी चीज से पीछा छुड़ाया जाता है तो वह है रिष्ते। सबसे नजदीक रिष्ते, सब फालतू रिष्ते हैं ,बोझ बन गये हैं रिष्ते। आज के ग्लोबलाइजेषन के जमाने में जमीन तलाषने की दौड़ में अपनों के भी सिर पर पैर रखकर चलते जाते हैं ।‘इटस माई लाइफ ‘ की रट लगाने वाली इस पीढ़ी ने जिस एक अहम् रिष्ते के महत्व ,गरमाहट,अपनेपन को भुला दिया है वह है बंधुत्व का रिष्ता। क्या कारण है कि जो सबसे नजदीकी है अर्थात् भाई या बहन क्योंकि जिनका रक्त एक है जो एक मां से उत्पन्न हैं आजकल सर्वाधिक दुष्मन वे ही हैं ।पहले कहा जाता था भाई  मुसीबत में काम आयेगा चाहे कुछ भी हो लेकिन अब भाई ही सबसे बड़ा दुष्मन हो गया है पहले कहा जाता था दुःख सुख  रोग ष्षोक में र्भाई ही काम आयेगा । लेकिन अब  भाई ही इन साबका कारण बनता है उसे भाई की रोटी ही कड़वी लगती है उसे छीनने के लिये गैरों का फायदा चाहे हो जाये पर भाई रोटी कैसे खारहा है यह भाव बढ़ता जा रहा है।तीज त्यौहार पर  घरवालों से रौनक हो जाती है माना जाता है पर अब घर वाले जैसे कुढ़े से बैठे रहेंगे कि यह अच्छे से त्यौहार क्यों मना रहा है ।छुट्टियों में यदि भाई के यहां जायेंगे तो कहेंगे छुट्टी बरबाद हो गईं। अगर अब नजदीकी हो गया है वह है दोस्ताना। छुट्टियां दोस्तों के साथ बिताना रोमांचकारी है। इसका मुख्य कारण है बचपन में ही प्रतिस्पर्धा के बीज बो दिये जाते हैं और म न ही मन दुष्मन बना  दिया जाता है

Monday, 10 October 2022

dharm ka apmaan

 ऽ हिंदू धर्म स्वयं अपना धर्म खराब कर रहा है ।जिन मूर्तियों को पूजता है उन्हें नदी में समुद्र में या पेड़ों के नीचे रख कर इतिश्री कर लेता है जिन्हें आपने पूजा जिनपर आप झूठी उंगली भी नहीं रख सकते  वे  पड़ी रहती हैं कूड़े के ढेरों पर कुत्ते उन पर पेषाब करते हैं आप पर तब कोई असर नहीं होता ।गणेष चतुर्थी महाराष्ट्र का प्रमुख त्यौहार है। होता तो सभी राज्यों में है अब सब प्रदेषों में प्रमुखता से मनाया जाने लगा है अन्य प्रदषों में भी बड़ी बड़ी मूर्तियां रखी जाने लगी हैं यही हाल नव दुर्गा का है। नवदुर्गा बंगाल का प्रमुख त्यौहार है पर अब हर प्रदेष में उसी ढंग से मनाया जाने लगा है। पूर्व में नव दुर्गा  पर  कुछ प्रमुख  चैराहों पर पंडाल सजता था लेकिन अब हर प्रदेष में हर बस्ती हर चैराहे पर हर मुहल्ले में दुर्गाजी और गणेष जी की बड़ी बड़ी मूर्तियां सजाई जाती हैं। बस्तियों में विषेष रूप से सजते हैं नौ दिन तक नाच गाना आदि होता है फिर दसवें दिन विसर्जन किया जाता है। टैम्पो मिनी ट्रक आदि करके बस्ती वालेां के संग विसर्जन करने जाया जाता है इन सब पर  खूब पैसा खर्च किया जाता है।अष्लील गानों पर नाच गाना चलता रहता है सबसे अधिक दुःख होता है हिंदू धर्म मानने वालों का अपने देवी देवताओं की स्वयं के द्वारा की गई दुर्दषा । जब समुद्र के किनारे नदियों की तलहटी में और किनारों पर मीलों तक मूर्तिया रखी दिखती हैं टूटती हैं फूटती हैं तब किसी को दर्द नहीं होता ।

अब कपड़ों पर भी देवी देवता के प्रिंट आते हैं हम पहले तो तन पर पहनते हैं तन की गंदगी इन पर लगती है फिर पीट पीट कर उन्हें धोया जाता है फटने पर झााड़पोंछ के काम लिया जाता हैं कार्ड आदि पर देवी देवता की तस्वीर छापते हैं फिर वह कार्ड कूड़ा उठाने के काम आता है । अपने देवी देवता का अपमान जब हम स्वयं करते हैं तो दूसरे करें तो क्या बात है ।