Wednesday, 29 July 2026

man

 मानव मन में अनेक इच्छाऐं जन्म लेती हैं,और वे इच्छाएं कल्पना में बदलती हैं ।कल्पना और इच्छाशक्ति मिलकर यथार्थरूप धारण करती हैं । जब तक इच्छाशक्ति प्रबल नहीं होगी कल्पना यथार्थ में नहीं बदलेगी। मन के अंतरतम कोने में जब कल्पना रूप लेना आरंभ करती है,और जब तक वह बाहर  आती है वह प्रबल रूप धारण कर लेती है और यही प्रबलतम इच्छा सफलता की नींव रखती है। व्यक्ति उन आवश्यकताओं की ओर देखता है उसकी दृष्टि वहीं घूमती रहती है कि किस प्रकार से कल्पना यथार्थ में बदल सकती है और जब अत्यधिक बैचेनी होने लगती है  तब वह कल्पना यथार्थ की ओर बढ़ने लगती है। लेकिन अपने ऊपर विश्वास रखना होगा,अगर अपने विश्वास से डगमगा गये तो इच्छा अधूरी रह जायेगी,और कल्पना आकाश की ऊचाइयां को तो छुएगी पर धुंआ बनकर उड़ जायेगी।

अगर अपनी क्षमताओं पर अपनी कल्पना पर विश्वास नहीं करेंगे तो अवचेतन में नकारात्मक तत्व जुड़ने लगेंगे जो आपके पंखों को अवश कर देंगे । वे फड़फड़ायेंगे पर उन पंखों को लगेगा कि नहीं ये नहीं उड़ेंगे और कहीं  बिखर जायेंगे। यदि विश्वास नहीं डगमगायेगा तो असफलता आपको नया मार्ग दिखायेगी। असफलता से सीखेंगे जो छूटा है वह सामने आयेगा । असफलता ही सफलता का मार्ग दिखायेगी। अपने ऊपर अटूट वियवास रखें मस्तिष्क सकारात्मक रखें। जिन सपनों को देखा है उन पर डगमगायें नहीं सपने साकार होंगे ।


Sunday, 26 July 2026

swati boond

 स्वाति बूंद पावन परम सीप पड़े मोती बने,माटी में मिल जाये सुवर्ण बने नहीं तो माटी में मिल कर उसे उपजाऊ बना देती है, और बीज प्रस्फुटित होने के लिये तत्पर हो जाते हैं।

असफलता हर किसी के जीवन में आती हैइसलिए उससे हताश न हों,बल्कि उसका सामना करें। सफलता हासिल करने के लिए आपका निरंतर प्रयास और सकारात्मक मानसिकता के साथ अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण दिखाना होगा । ऐसा करके आप अपने सपनों को तो हासिल करेंगे ही ,दूसरों के लिए प्रेरणा स्त्रोत भी बनेंगे ।


Thursday, 23 July 2026

manushya ki shakti

 मनुष्य जो कुछ भी है अपने अंदर की शक्ति से है और वह शक्ति ईश्वर की कृपा से मिलती है। ईश्वर की कृपा अर्थात् स्वयं की शक्ति के साथ ईश्वरीय शक्ति मिलकर मनुष्य को कुछ कर गुजरने की इच्छा दे देते हैं। कभी भी मन से नहीं हारना चाहिये। मन के हारे हार मन के जीते जीत। परन्तु यह भी न सोचें कि जो कुछ भी है उसने किया है स्वयं ने ,वह सब कुछ है। जब तक ईश्वरीय इच्छा न होगी मानव कुछ नहीं कर सकता है ।दाने दाने पर लिखा है खाने वाले का नाम ,जिस दाने पर हमारा नाम होगा वही हमें मिलेगा और हम सोचें कि यह दाना हमने उठाया है,इसके हम अधिकारी हो गये,नहीं जब तक ईश्वर की इच्छा नहीं होगी दाना आपके मंुह में नहीं जायेगा। परंतु यह सोच लें कि ईश्वर हमारे मुह में उठाकर दाना डालेगा तो यह भी बिना अपनी इच्छा के नहीं होगा। हर कार्य के पीछे ईश्वरीय इच्छा और अपनी इच्छा दोनों होते हैं। जब व्यक्ति यह कहने लगता है मैं ,मैं ही सब कुछ कर रहा हूं,मैंने यह किया इसलिए यह पाया। यहां पर वह गलत है,प्रयत्न अपनीे स्थान पर है,ईश्वरेच्छा अपने स्थान पर है। जब  मनुष्य हर कार्य को करके ईश्वर को धन्यवाद करता है तभी वह वास्तव में ईश्वर का कृपा पात्र होता है 

Tuesday, 21 July 2026

ishwar ke prati prem

 

bZ'oj ds izfr izse ,d LokHkkfod ekufld izfØ;k gSA dsoy Hkksx ds fy, bZ'oj dks ;kn djuk ;g bZ'oj ds izfr izse ugha vpZuk gS ,d Nykok]gesa ;g nks gesa og nksA geus rqEgsa ;kn fd;k gS rqEgkjh vkjk/kuk dh rqEgsa iq"Ik p<+k;s rks rqEgkjk Hkh curk gS fd vius HkDr dks lEiUurk nks ,'o;Z nksA vius dks bZ'oj ds cans ekuus okys Hkh dsoy vFkZ dh dkeuk djrs gSaAlk?kq lU;klh  izopu drkZ lcdks p<+kos dh dkeuk jgrh gS vxj izopu drkZ vFkZ u ys rc ekusaxs f dos bZ'oj ds iqtkjh gSaA turk rks HksM+pky ij pyrh gSA gj O;fDr ,d Hk; esa th jgk gS]gj pht pkfg;s ]vkSj bl Hk; esa og HkfDrekxZ ds uke ij iaMs iqtkfj;ksa ds Hkzetky esa Qaldj mUgsa p<+kok p<+krk gS]le>rk gS os bZ'oj dks fey tk;sxk]og blh dks /keZ le>rk gSA izopudrkZ Lo;a ml ?ku dk mi;ksx vius vkuan ds fy, djrk gS]og Lo;a bZ'oj cu tkrk gSA/keZ gekjs vanj vkLFkk txkrk gSA cqjkbZ djus ls cpkrk gS fd xyr fd;k rks bZ'oj ltk nsxkA ysfdu /keZ rks vius drZO; ds ikyu Bhd <ax ls djuk gSA ;fn gj O;fDr bZekunkjh ls viuk dke djrk gS rks okLro esa /keZ dh j{kk gksxh vkSj ,d vkRe lq[k ds lkFk thou ft;k tk ldrk gS]ijarq ,d gol fd lc dqN eq>s fey tk;s u tkus fdrus vi?kkr djrk gS vkSj ;gha lc NksM+ tkrk gS A

Sunday, 19 July 2026

old age

 वृद्धावस्था जीवन का अवसान नहीं ,वरन् अनुभवों का खजाना है जिससे आने वाली पीढ़ी उनके अनुभवों से सीखकर अपने जीवन काल का समय बचा सकती है। जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय है। जीवन रूपी जहाज का कप्तान यदि अनुभवी है तो परिवार को अच्छी तरह ले जा सकता है। वह गहन समुद्र को पार करा देता हे। एक तरह से युवा पीढ़ी के जीवन में वृद्ध व्यक्ति के अनुभव जुड़ जाते हैं तो उसका समय बढ़ जाता है उसे सीखने का समय नहीं निकालना पड़ता। वृद्धावस्था परिपक्वता लाती है। शरीर में शिथिलता अशक्तता होती है परंतु मस्तिष्क सक्रिय रखने से और उर्वर होजाता है,क्योंकि आवश्यकताऐं सीमित हो जाती हैं और ध्यान सांसारिकता पर न होकर सक्रिय सोच में बदल जाता है। वृद्धावस्था जीवन के अनुभवों से सिंचित पका हुआ फल बन जाता है ।

Sunday, 31 May 2026

english Tips

 A cup of milk will work wonder with a vegetarian or non vegetarian gravy it did not only tastes good but also makes gravy thicker and easy to  digest.

cut a straw into three to four pieces and insert the pieces on top of the pie A the contents of the pie won't boil over.

Fast boiling of eggs hardens the albumin can be got rid off by soaking them in butter milk for a few  minutes or applying  a mixture of salt and turmeric powder before cooking.

Excessive bitterness in bitter gourd  pieces can be got rid off by soaking them in buttermilk for few minutes or applying a mixture of salt and turmeric powder before cooking .

squashed or imperfect fruits like apple and bananas can be crushed with little sugar and frozen .They make excellent toppings for vanilla ice cream.

if a curry has become too sticky prepare a paste of corn flour and little water. Add the paste to the curry and bring it to a boil A the gravy will thicken and the spiciness will decrease.

To make crisp onion pakoras sprinkle a little salt on the chopped onion. Leave for sometime and then mix gram flour and the necessary spices  brfore frying.

Onion will brown faster in a little table salt is added to the pan while frying them.

Stuffed toys can be washed by putting them inside a pillowcase]tying the Top of the pillowcase and washing on a gentle cycle in the washing machine .In case you do not want to wash the toy then rub it with magnesia powder,leave for a few hours and brush it off.

Fat free

to fry eggs without oil just sprinkle a little salt on the pan before frying them .The eggs will be fried well and also come off easily without sticking to the pan .

Take a piece of clean white cloth dye it in turmeric and dry in the sun A Use the cloth as an effective cure to wipe your eyes if you are suffering from conjunctivitis or any other eye infections.

To avoid premature graying of hair , add about two and half of tablespoon table salt to a cup of black tea and apply it on your scalp . Leave it for an hour and wash off with water. This method also makes dyeing unnecessary.

 To get instant relief from ant bytes]rub a piece of raw onion over the affected spot.

After kneading the dough ,do not wash your hands. Instead wash two or three glasses with your dough covered hands and see the sparkle.

Munch basil leaves to get rid of mouth ulcers

To sparkle mirrors mix a little starch to water and rub this solution on the mirror, leave it to dry for a while and wipe it off with a clean cloth

Curd sets faster if dry red chili halves are added to the milk which is required to set it 

Saturday, 30 May 2026

emi main jeeta jeevan

 भौतिकवादी जीवन की  ओर बढ़ते युवा और उनके कंधों पर चढ़ता कर्ज का बोझ उनके कंधों को झुका देता है। वे दिन में अपना कॉलर ऊंचा रख कर एक से एक बड़ी गाड़ियों में चलते हैं और रात में ई एम आई की चिंता में करवटें बदलते हैं। चेहरे पर नकली मुस्कान और आंखों में चिंता की झलक एक एक बात पर चिड़चिड़ाहट ,झल्लाहट उनकी मानसिकता को दर्शाता है। जीवन सुकून के स्थान पर संघर्षमय हो गया है । हंसता खेलता परिवार घर आकर बच्चों के बीच बैठने की ललक नहीं है। देर से घर आना और इधर उधर झल्लाते हुए कमी निकालते हुए सो जाना। चिंता से सोना चिंता से जागना ।उन्होंने दर्शन तो अपनाया है जब तक जियो सुख से जियो,ऋण लेते  जाओ और घी पीओ पर जीवन आराम से बीतना चाहिये। क्रेडिट कार्ड ने और इस प्रवृर्ति को बढ़ावा दिया है ,मन चाहा खरीदो उधार लो जेब में नहीं दाने अम्मा चली भुनाने वाली स्थिति रहती है। पैसा जमा करके क्या करना है आने वाली पीढ़ी अपना अपने आप देखेगी । पहले भी कहावत थी ,‘पूत कपूत तो का धन संचे पूत सपूत तौ का धन संचै।’। पहले कर्ज चुकाना है तो दूसरा लेकर चुका दो । परंतु सत्य तो यह है इंसान को अपने को सीमित रखना चाहिये जो है वही सत्य है ।☺


Thursday, 28 May 2026

maa ya saas

 मां आप आजाओ’ ना  ना सास नहीं ,मैं कम्फर्ट नहीं रह पाउंगी,आप आजाओ।’ -कारण मां आजायेगी तो वह उसे कुछ नहीं करने देगी । मायके में कभी कुछ किया नहीं ,मां ने कभी कहा भी नहीं ,मां खुशी खुशी सब काम करेगी ,सास से कुछ कह भी नहीं पायेगी, ना बाबा सास नहीं उनसे कहीं कुछ करने की कहा जा सकता है। सास आयेगी तो घर में ताका झांकी करेगी ,देखेगी कि उनके पास क्या क्या है,किस प्रकार रहते हैं मां तो उनके रहन सहन को देख कर खुश होगी पर सास उन्हें मालुम पड़ जायेगा तो बेटे से मांग भी कर सकती हैं जो कुछ भी अपने साथ ले जायेंगी उनके लिये बेटा पैसे देगा पर मां तो और दिला कर जायेगी। सास बेटे से न जाने क्या क्या फरमाइश कर दे पर मां तो उसके धन धान्य को देखकर खुश होगी वाह बेटी कितने एश्वर्य में है । मां आयेगी तो  सब जचगी का सामान तो लायेगी और भी सब बता सकती है,मां यह ले आना वह लेआना। मां सहेज सहेज कर सामान लायेगी बेटी को मां का सब अच्छा लगेगा पर सास तो पूछेगी क्या लाऊं तब यही कहना पड़ता है कुछ नहीं आप आजाओ बस मां के हाथ के आटे के लड्डू भी शौक से खाये जा सकते हैं पर सास के मेवे के लड़डू भी मुह बिचका कर इधर उधर कर दिये जायेंगे। सास तो यहां से अपना हक समझ कर ले जायेगी,उनके बेटे का है चाहे बहू भी कमाये पर उनका हक तो दोनों पर है। पर बेचारी मां यह दावा नहीं कर सकती कि बेटी दामाद की कमाई पर कुछ हक है ।मां को बेटी दामाद के लिए करने में अच्छा लगेगा। सास जिम्मेदारी है और मां सहज सुहानी है नानी बेचारी नैनी



Saturday, 23 May 2026

videsh main bacche

 एक या दो संतान और उनकी दौड़ विदेश में और पीछे रह जाते हैं बुजुर्ग मां बाप जिनको मिलते हैं आश्वासन कि शिक्षा प्राप्त कर अपने ही देश में आयेंगे आपके पास। अब शिक्षा तो प्राप्त करली पर हमारे योग्य वहां नौकरी नहीं है कुछ पैसा इक्कठ्ठा कर लें तो फिर आयेंगे । अपनी जमा पूंजी बच्चों पर खर्च कर चुके मां बाप इस आशा में कि विदेश से धन लाकर उसकी भरपाई कर देंगे । और दिन अच्छे आजायेंगे।,परंतु एक एक कर बच्चों के खर्च और मजबूरियां बढ़ती जाती हैं और दरवाजे की ओर टकटकी लगाये मां बाप जिनके इंतजार की घड़ियां रुकती ही नहीं । हां बाल बच्चे होने पर नैनी (नानी का बिगड़ा रूप) बनकर कुछ दिन नानी रहती है हां कभी कभी कुछ दिन दादी को भी बुला लेते हैं फिर बापस,एक आशा में एक विश्वास में  िकवह अपने बच्चों के बच्चों को खिलायेगे बढ़ते देखेंगे । पर बढ़ते नहीं बड़े होते कभी कभी देखना है जो नानी दादी का ेपहचानते ही नहीं उनकी भाषा भी नहीं सामझ पाते अगर नानी दादी अंग्रेजी जानकार भी हैं तो लहजा अलग बोलने का तरीका अलग। दादी नानी के साथ रजाई में दुबक कर कहानी सुनना उनके साथ कल्पना लोक में जाने की  कल्पना ही नहीं कर सकते। उनका अपना कमरा है किसी और का हस्तक्षेप उन्हें अच्छा नहीं लगता है,न छूना पसंद है। एक अलगाव के साथ कुछ दिन अनजानों के बीच रहकर फिर अपने देश जिसे हम विदेश कहते हैं जाना । अंत में दरवाजे पर लगी टिकटिकी बंद और पड़ोसियों के कंधों पर आखिरी सफर । 

Friday, 22 May 2026

Man hai

 इंसान का मन भी एक समुद्र है किसी को क्या मालुम कि कितने हादसे और कितनी यादें उसमें समाई हुई हैं। कभी कभी तैरकर उबर कर ऊपर आ जाते हैं और हमें डुबोकर खुद डूब जाते हैं फिर उभरती है एक नई तस्वीर कुछ लहरों पर उतराती और सूरज की किरणों से झिलमिलाती फिर बदल जाती हैं और उभर आते हैं साये कुछ काले कुछ सुनहरे कुछ अवशेष,कभी कभी वे उतराते ही रहते हैं ।

अतीत अर्थात् हमारा बीता कल जिसे हम जानते हैं कि कैसा बीता,क्या हमारी भूल थी, क्या हम और भी कुछ कर सकते थे ,और क्या करना चाहते थे पर नहीं कर पाये । लेकिन नहीं कर पाये । लेकिन भविष्य की क्ल्पना तो सहज है पर वह हमारे हाथ में नहीं है। पता नहीं होता है कि मुंह में जाने वाला ग्रास मुंह में ही जायेगा या गिर जायेगा। परंतु सोचते हैं थाली सामने है वह हम खायेंगे पर उस पर नाम है यह नहीं मालुम ।जो बीत गया अगर बहुत अच्छा बीता तो उसके चक्र में घूमते रहेंगे कि हमारा भविष्य भी कैसा हो लेकिन दाना गिरेगा और चिरैया खायेगी या आप यह भविष्य के गर्त में है।

 लगता है जिंदगी सहज जायेगी लेकिन अनेकों समस्याऐं मुह बाये खड़ी होती हैं जिन्हें हल करने में समय निकल जाता है। ट्रेन का समय दस मिनट का रास्ताऔर गुजरता दो किलोमीटर लंबा जलूस रास्ता बंद बेचैन हैं इधर से उधर से पर सामने ट्रैफिक का सैलाब ,ट्रेन गुजर गई आपकी योजना रखी रह गई ।यह आपको समझना था कि रास्ते में कितनी रुकावट है पर समझकर चले दस मिनट का रास्ता है पर अवरोध पर अवरोध,समय पार हो गया,अब चुनौती सामने है कि कैसे फिर से समय को बांधा जाये जुड़ लेते हैं नजदीक दूसरे स्टेशन से या स्थगित करते हैं यात्रा ,अंतहीन समस्याओं से जूझने के लिसे परंतु आगे शिक्षा तभी मिलती है कि पार पहुंचना कठिन है परंतु असंभव नहीं है।कुछ संयोजन समय का आवश्यक है,स्थिति का,समाज का जिसमें आप रह रहे हैं ।


Monday, 11 May 2026

dedo

 

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Sunday, 3 May 2026

samasya

 किसी भी समस्या का समाधान तब संभव है जब उसकी जड़ को समझें और अपने दृष्टिकोण  से नहीं वरन् अपने दृष्टिकोण को बदल कर देखें। अपने विचारों की ओर भी संदेह की दृष्टि से देखें पूर्वाग्रह से ग्रस्त न रहें। समस्या को सतही दृष्टि से न देखें।गहराई से उस पर मनन करें क्योंकि कभी कभी समस्या देखने में साधारण लगती है परंतु जब उसको गहनता से देखते हैं तो लगता है यह समस्या साधारण नहीं है। अगर एक बार किसी भी समस्या का समाधान तब संभव है जब उसकी जड़ को समझें और अपने दृष्टिकोण  से नहीं वरन् समस्या को पूर्वाग्रह से ग्रस्त न होकर उससे बाहर निकलें तब समस्या स्वतः दम तोड़ देती है। दर्शन हमारे विचारों की अमर भूमि को जोतता है ताकि उसके नीचे दबे हुए अहंका और पूर्वाग्रह बाहर आ सकें 

Thursday, 30 April 2026

bcche aur mobile

 किशोरावस्था में बच्चे हर समय की टोकाटाकी से अपनी बातों को छिपाने लगते हैं कि पता नहीं किस बात के लिए माता पिता कह दें यह ऐसा क्यों किया वैसा क्यों किया। बच्चों का मन जानना समझना बहुत आवयश्क है इसके लिए उनसे बात करते रहना चाहिये।

देखा जाए तो मोबाइल पर गढ़ी आंखें परिवार का समय भी छीन रही हैं उनके जीवन का महत्वपूर्ण समय भी छीन रही हैं क्योंकि इससे केवल हताशा निराशा और उच्छृखंलता के सिवाय कुछ भी नहीं मिलने वाला है। अब मस्तिष्क को श्रम करने की आवश्यकता नहीं है बस आंखें उस तक संदेश पहुंचाती रहती हैं और वो उनके साथ ही घूमता रहता है। जितना आप मस्तिष्क से काम लेंगे वह उतना सक्रिय होता है,पर रील देखने में मस्तिष्क को क्रिया का अवसर ही नहीं मिलता है तो वह भी आरामतलब हो जाता है उसे भी कुछ सोचने की और समझने की आवयश्कता नहीं रहती 


Tuesday, 28 April 2026

bacche aur mobile

 मोबाइल के उपयोग से बच्चों को रोकना बच्चों को विद्रोही बना देना हो गया है। बच्चे मोबाइल के आदी हो चुके हैं जिसे कहते हैं नशा हो जाना। अखबार में आये दिन खबर पढ़ने को मिलती है कि बच्चे को मोबाइल नहीं दिलाया या देखने से रोका तो माता पिता की हत्या कर दी ।या आत्म हत्या जैसे कदम उठा लिए कभी एक समाचार था कि कोरियन रील देख देख कर  तीन बहनों ने कूद कर आत्महत्या करली। गेम्स खेलना या रील देखकर टास्क करने की लत लग जाती है और घंटों उसे लिये बैठे रहना देखना अपने भविष्य से खिलवाड़ करना है। उन्हें न स्कूल के काम की फुरसत न मैदान में दोस्तों के साथ खेलने की यहां तक कि खाने की फुरसत नहीं है ।बस आंखें रील के साथ चलती रहती हैं। इसमें डूब जाने को एक कारण यह भी है अकेलापन सीमित परिवार अपने अपने कामों में व्यस्त मां बाप। बच्चों को व्यस्त रखने के लिये स्वयं मां बाप उनके हाथ में मोबाइल पकड़ा देते हैं और बालक के लिये सारी दुनिया उसी में मिल जाती है । उसके साथ हंसना खेलना बोलना सब होने लगा है 

Monday, 27 April 2026

bacche aur mobile 2

 अधिकतर अब दम्पत्ति यही चाहते हैं  िकवे अकेले रहें  वे दो बस ,न किसी को कुछ कहना पड़े न बताना पड़े न कोई उन पर जिम्मेदारी हो  िकवे घर पर से कैसे जायें क्या खा रहे हैं और कीां जा रहे हैं । मां बाप होते हैं तो यह सब बताना पड़ता है । मां बाप टोक भी देते हैं कि यह क्या कल भी बाजार का खाया आज भी बाजार का । बच्चे करना नहीं चाहते बच्चा होना मतलब बंधन । बहुत कहने पर किया भी तो एहसान से एक, चाहे लड़का हो या लड़की । अब लड़की भी कोई कम नहीं होती हैं । दो होते हैं तो बहुत अंतर से वे बड़े होते हैं अलग अलग तरह से वे भाई बहन की तरह नहीं जो लड़ते झगड़ते हैं वे दो अजनबियों की तरह रहते हैं क्योंकि उम्र का अंतर उन्हें साथ नहीं दे पाता। और बच्चे तरह तरह की डिवाइसों की तरफ मुड़ जाते हैं । अब मां बच्चे को अपना दूध तो पिलाती नहीं है वो बोतल से दूध पिलाती है और बच्चा दूध पीले बोतल हटाये नहीं उसके सामने मोबाइल रख देती है और बच्चा उन चलती तस्वीरों को देखकर दूध पी लेता है फिर वह उसका आदी हो जाता है और बिना मोबाइल असहज हो उठता है। जितनी देर तक आप या बालक मोबाइल पर आंख लगाये रहते हैं आप अपने परिवार से दूर हो जाते हैं यह उनसे छीना हुआ समय है। एक निष्क्रियता का जीवन जिसमें चंद इंन्द्रियां सक्रिय रहती हैं बाकी सब निष्क्रिय होती जाती हैं। मस्तिष्क की उर्वरता तो बिलकुल खत्म हो जाती हैं। -रटत रटत अभ्यास के जड़मति होत सुजान ’पर यहां तो सुजान भी जड़मति हो जाते हैं। कयोंकि मस्तिष्क पर जोर देने की आवश्यकता ही नहीं रह गई है 

Sunday, 26 April 2026

Why do we say it

 He has an axe to grind

Selfish motive to advance

This a story of a man who had to grind his axe but locked the strength to do this for himself .He saw a young man, young and strong busy with his grindstone. Fighting ignorance, the old man asked the boy how the grindstone worked ,and whilst the boy demonstrated this with the old man’s axe .The man kept on praising the boy’s strength and skill until the axe was ground, whereupon went away laughing at the boy’s foolishness and gave him no rewards          .                                                                                                                                                                                               

anubhutiyan

हमारे अंदर अनुभूतियों का सागर है,प्रवाह है। ये जीवन का बैरोमीटर है,ये हमारे अंदर की षक्ति को प्रदर्षित  करता है। हमारी कल्पना को आगामी जीवन की कल्पना कहता है, यह तो प्रकृति का सुंदरतम उपहार है, इसे अभिव्यक्ति देना ईष्वरीय सत्ता को नमन करना है । हम जीवन को कैसे देख रहे हैं ? हम कैसा महसूस कर रहे हैं ?इस छोटी सी बात पर ही सारा जीवन टिका है। हमारी सफलताऐं असफलताऐं सब में यह बात निहित है, तो उसे हम बाहर आने दें ।

हमें अपने अंदर की इस षक्ति को उपयोग में लाना है, एंड्र कार्नेगी ने भट्टी बनाई और स्टील मिल की नींव रखी, जब कि हिटलर ने वही भट्टी लाषों को ठिकाने लगाने में काम में लाई ।

जब तक जीवन कार्यषील है, तब तक ही उपयोगी है, नहीं तो मिट्टी है। मिट्टी कितनी ही उपयोगी हो, रोंदी पैरों तले ही जायेगी ,जब वह कोई आकार ले लेती है तो सिर माथे भी रखी जाती है। सड़क का पत्थर ठोकर खाता है,जब वह मूर्ति रूप ले लेता है तो देवता बन जाता है ।


Friday, 24 April 2026

mobaile aur bacche

 यद्यपि मोबाइल,‘दनिया मेरी जेब में ,तकनीकी विज्ञान का चमत्कार है इसने पूरी दुनिया को सबके सामने एक क्लिक पर ला दिया है और यदि कहा जाए तो एसा छोटा सा डिब्बा वह जो अगर आपके पास है तो आपको न मोटे मोटे एनसाइक्लोपीडिया,डिक्शनरी,कुछ भी नहीं चाहिए । वैसे ही पुस्तके अपना आस्त्त्वि खोती जा रही है। इस छोटी सी डिबाइस ने पुस्तकों को धूल खाने को विवश कर दिसा है। मोबाइल ने न जाने कितनी चीजों को डिब्बे में बंद कर दिया है। बच्चे जहां रंग बिरंगी किताबों को खोल कर पढ़ने बैठते थे अब गर्दन झुकाए छोटी सी स्क्रीन पर देखते रहते हैं? संभवतः एक दिन गर्दन टेढी वाले ही पैदा होने लगेंगे ।आंखें अपना आस्त्त्वि खो देंगी पर मोबाइल की दुनिया बच्चे छाड़ने के लिए तैयार नहीं होंगे , 

 सिमटते परिवारों ने बच्चों का एकाकीपन बढ़ा दिया था उसकी वजह से बच्चे चिड़चिड़े हो रहे थे पर अब बच्चे एकाकीपन अधिक पसंद करते हैं आपके बोलने तक ये चिढ़ने लगते हैं। अब बैट बल्ला नहीं खेलना चाहता। वे गेम वीडियो पर खेलते हैं। वर्चुअल दुनिया में समा गये हैं। आपका किसी काम का कहना या बुलाना उन्हें झुंझला देता है ।


Wednesday, 22 April 2026

hum badal rahe hain

 हम अपने अंदर बुनियादी बदलाब चाहते हैं। चेतना जाग्रत होती है पर कैसे के सवाल के साथ ही इब जाती है,कारण मन सोचता कुछ और है लेकिन जब कभी कार्यान्वित करने का  अवसर आता है तो मन बदल जाता है अपने पुराने ढर्रे पर चल देता है। असली बदलाव युवा वर्ग में आ रहा है,रोमांच फन और पैसों के दुरुपयोग का शान शैकत आदि की ओर अधिक घ्यान दे रहे हैं। यहां विचार और विचारक बदल जाते हैं  । भारतीय संस्कृति उच्चतम पायदान पर थी अब धीरे धीरे वह एकदम निचले  स्तर पर आती जा रही  है । बेटा बाप का कत्ल कर रहा है ,बेटी पूरे परिवार को मौत की नींद  अपनी हवस के कारण सुला रही हैं भाई  भाई को मार रहा है बहन हिस्से के लिये लड़ रही है ,इकलौते भाई को मार रही है,जिससे अकेली वह जमीन जायदाद की वारिस बन जाये ।    

Tuesday, 21 April 2026

shabd ko nishabd ki abha cahiye

 आजकल आम बोलचाल की भाषा में नये नये शब्द गढ़कर आ गये हैं। अगर उनका शाब्दिक अर्थ देखा जाये तो  अर्थ का अनर्थ हो सकता है। मीडिया को बाइट चाहिये ऐसा लगता है मीडिया काटखाने के लिये दौड़ती ह या हम चबा चबा कर शब्द बोल रहे हैं कि कुछ मंुह से गलत न निकल जाए जो अखबारों की सुर्खियां बन जाऐं। पर फिर भी जब दो विरोधी पार्टियां एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाती हैं तो उस समय ऐसा लगता है कि अंडरवर्ल्ड के लोग हैं जो एक दूसरे को शब्दों से नहीं मार रहे चाकू छुरे घोंप रहे हों फिर बाद में माफी मांगते दिखेंगे कि कुछ अनजाने में शब्द निकल गये जब कि वे जानबूझ कर बोले गये होते हैं पर दिखाते हैं कि गलती से निकल गए।जैसे भोजन खायें या ठूस लें । आहत को राहत चाहिये न कि कटु शब्दों की मार कि ऐसा होना चाहिये। विष भरे शब्द घायल के घाव को कुरेद कर उसे नासूर बना देते हैं। अर्न्तमन से निकला शब्द असर करता है। मन में शब्द पलने चाहिए उन्हें परिपक्व होने देना चाहिए कि आप बोल रहे हैं वह कहां तक उचित हैं। आपके शब्दों का प्रभाव पड़ेगा या नहीं । आपके भाव और मन की ऊर्जा शब्दों में प्रवेश करती है और आपका वाक्य वजनदार हो जाता है। शब्द को भी निशब्द की आभा चाहिये ,कौन से निकले शब्द घायल मन के लिये औषधि होंगे ,वजनदार होंगे