मां आप आजाओ’ ना ना सास नहीं ,मैं कम्फर्ट नहीं रह पाउंगी,आप आजाओ।’ -कारण मां आजायेगी तो वह उसे कुछ नहीं करने देगी । मायके में कभी कुछ किया नहीं ,मां ने कभी कहा भी नहीं ,मां खुशी खुशी सब काम करेगी ,सास से कुछ कह भी नहीं पायेगी, ना बाबा सास नहीं उनसे कहीं कुछ करने की कहा जा सकता है। सास आयेगी तो घर में ताका झांकी करेगी ,देखेगी कि उनके पास क्या क्या है,किस प्रकार रहते हैं मां तो उनके रहन सहन को देख कर खुश होगी पर सास उन्हें मालुम पड़ जायेगा तो बेटे से मांग भी कर सकती हैं जो कुछ भी अपने साथ ले जायेंगी उनके लिये बेटा पैसे देगा पर मां तो और दिला कर जायेगी। सास बेटे से न जाने क्या क्या फरमाइश कर दे पर मां तो उसके धन धान्य को देखकर खुश होगी वाह बेटी कितने एश्वर्य में है । मां आयेगी तो सब जचगी का सामान तो लायेगी और भी सब बता सकती है,मां यह ले आना वह लेआना। मां सहेज सहेज कर सामान लायेगी बेटी को मां का सब अच्छा लगेगा पर सास तो पूछेगी क्या लाऊं तब यही कहना पड़ता है कुछ नहीं आप आजाओ बस मां के हाथ के आटे के लड्डू भी शौक से खाये जा सकते हैं पर सास के मेवे के लड़डू भी मुह बिचका कर इधर उधर कर दिये जायेंगे। सास तो यहां से अपना हक समझ कर ले जायेगी,उनके बेटे का है चाहे बहू भी कमाये पर उनका हक तो दोनों पर है। पर बेचारी मां यह दावा नहीं कर सकती कि बेटी दामाद की कमाई पर कुछ हक है ।मां को बेटी दामाद के लिए करने में अच्छा लगेगा। सास जिम्मेदारी है और मां सहज सुहानी है नानी बेचारी नैनी
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