Saturday, 23 May 2026

videsh main bacche

 एक या दो संतान और उनकी दौड़ विदेश में और पीछे रह जाते हैं बुजुर्ग मां बाप जिनको मिलते हैं आश्वासन कि शिक्षा प्राप्त कर अपने ही देश में आयेंगे आपके पास। अब शिक्षा तो प्राप्त करली पर हमारे योग्य वहां नौकरी नहीं है कुछ पैसा इक्कठ्ठा कर लें तो फिर आयेंगे । अपनी जमा पूंजी बच्चों पर खर्च कर चुके मां बाप इस आशा में कि विदेश से धन लाकर उसकी भरपाई कर देंगे । और दिन अच्छे आजायेंगे।,परंतु एक एक कर बच्चों के खर्च और मजबूरियां बढ़ती जाती हैं और दरवाजे की ओर टकटकी लगाये मां बाप जिनके इंतजार की घड़ियां रुकती ही नहीं । हां बाल बच्चे होने पर नैनी (नानी का बिगड़ा रूप) बनकर कुछ दिन नानी रहती है हां कभी कभी कुछ दिन दादी को भी बुला लेते हैं फिर बापस,एक आशा में एक विश्वास में  िकवह अपने बच्चों के बच्चों को खिलायेगे बढ़ते देखेंगे । पर बढ़ते नहीं बड़े होते कभी कभी देखना है जो नानी दादी का ेपहचानते ही नहीं उनकी भाषा भी नहीं सामझ पाते अगर नानी दादी अंग्रेजी जानकार भी हैं तो लहजा अलग बोलने का तरीका अलग। दादी नानी के साथ रजाई में दुबक कर कहानी सुनना उनके साथ कल्पना लोक में जाने की  कल्पना ही नहीं कर सकते। उनका अपना कमरा है किसी और का हस्तक्षेप उन्हें अच्छा नहीं लगता है,न छूना पसंद है। एक अलगाव के साथ कुछ दिन अनजानों के बीच रहकर फिर अपने देश जिसे हम विदेश कहते हैं जाना । अंत में दरवाजे पर लगी टिकटिकी बंद और पड़ोसियों के कंधों पर आखिरी सफर । 

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