Monday, 27 April 2026

bacche aur mobile 2

 अधिकतर अब दम्पत्ति यही चाहते हैं  िकवे अकेले रहें  वे दो बस ,न किसी को कुछ कहना पड़े न बताना पड़े न कोई उन पर जिम्मेदारी हो  िकवे घर पर से कैसे जायें क्या खा रहे हैं और कीां जा रहे हैं । मां बाप होते हैं तो यह सब बताना पड़ता है । मां बाप टोक भी देते हैं कि यह क्या कल भी बाजार का खाया आज भी बाजार का । बच्चे करना नहीं चाहते बच्चा होना मतलब बंधन । बहुत कहने पर किया भी तो एहसान से एक, चाहे लड़का हो या लड़की । अब लड़की भी कोई कम नहीं होती हैं । दो होते हैं तो बहुत अंतर से वे बड़े होते हैं अलग अलग तरह से वे भाई बहन की तरह नहीं जो लड़ते झगड़ते हैं वे दो अजनबियों की तरह रहते हैं क्योंकि उम्र का अंतर उन्हें साथ नहीं दे पाता। और बच्चे तरह तरह की डिवाइसों की तरफ मुड़ जाते हैं । अब मां बच्चे को अपना दूध तो पिलाती नहीं है वो बोतल से दूध पिलाती है और बच्चा दूध पीले बोतल हटाये नहीं उसके सामने मोबाइल रख देती है और बच्चा उन चलती तस्वीरों को देखकर दूध पी लेता है फिर वह उसका आदी हो जाता है और बिना मोबाइल असहज हो उठता है। जितनी देर तक आप या बालक मोबाइल पर आंख लगाये रहते हैं आप अपने परिवार से दूर हो जाते हैं यह उनसे छीना हुआ समय है। एक निष्क्रियता का जीवन जिसमें चंद इंन्द्रियां सक्रिय रहती हैं बाकी सब निष्क्रिय होती जाती हैं। मस्तिष्क की उर्वरता तो बिलकुल खत्म हो जाती हैं। -रटत रटत अभ्यास के जड़मति होत सुजान ’पर यहां तो सुजान भी जड़मति हो जाते हैं। कयोंकि मस्तिष्क पर जोर देने की आवश्यकता ही नहीं रह गई है 

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