अगर बेटा बहू परिवार से अलग हो जाएतो बहू की गलती है,बेटे की मजबूरी थी,अगर बेटी सास ससुर से अलग रहने लगे तो जमाई बहुत अच्छा है,जो बेटी को अलग रहने ले गया।सच तो यह है अलग रहने का फैसला इकतरफा नहीं होता ,हालात दोनेों तरफ के होते हैं ।
लड़कियां मायके सिर्फ इसलिए नहीं आतीं कि ससुराल में कोई कमी होती है,बल्कि इसलिए आती हैं ,मायका वह जगह है जहां वह फिर से लड़की बनती है,जहां ढीले कपड़े पहनने पर कोई टोकता नहीं,बिना मेकप के भी खुद को कम नहीं समझना पड़ता हैससुराल में बहू पत्नी मां होती है लेकिन मायके में सिर्फ बेटी होती है वहां सिर्फ जीत सकती है ।
हमेशा याद रखना इंसान नहीं बोलता उसका वक्त बोलता है। जब इंसान का वक्त नहीं बोलता तो उसकी कोई नहीं सुनता। शांत रहना सीखो,मेहनत करना सीखो कि तुम्हारा वक्त बोल सके ।
जब अपनों में ही गद्दार और चाल चलने वाले पैदा हो जाए,मैदान में खड़ा शेर भी कुत्तों से बाजी हार जाता है। जो इंसान अपनों को गिराने में अपनी जीत समझता है वह इंसान बहुत गिरा है
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