मूर्ख दिवस
जीवन के सब रंग देखने को मिलते हैं दुःख ,क्रोध, मान, अपमान पर इन सबसे ऊपर होता है एक रंग हास्य का व्यंग्य का कुछ अपने ऊपर हंस लेने का कुछ समाजिक विकृतियों पर कटाक्ष कर लोगों को जाग्रत करने का। यह सर्वजन्य माध्यम है जो दुनिया को जोड़ता है। यह जीवन की स्वाभाविक अभिव्यक्ति है। यह हदय की भावनाओं की अभिव्यक्ति है। संसार में सभी जीवों के पास हर संवेदनाओं की अभिव्यक्ति है। वे रोते है, उदास होते हैं, चिड़चिड़ाते हैं, क्रोधित होते है। आपस में बात करते है। बस उन्हें हंसते नही देखा गया है यह अभिव्यक्ति एक ईष्वरीय उपहार है इससे प्रकृति खिलखिलाती नजर आती है। एक सकारात्मक ऊर्जा का उर्त्सजन होने लगता है जैसे अमावस की यवनिका हटाकर सूर्य झाँक दिया हो। दिलों को मिलाने जीतने की सहज अभिव्यक्ति है। हंसी हमारे रक्त संचालन को मजबूत करती है ष्ष्वसन तंत्र के लिये फेंफड़ो को मजबूत करती है। हमारे पाचन तंत्र को मजबूत करती हैं गहरी साँस आती जाती है। हंसी के माध्यम से हम रोगों की रोकथाम तो करते ही हैं यह एक तरह पूरे ष्षरीर की प्रणाली को ठीक करता है तनाव के नकारात्मक प्रभाव को खत्म करता है। चित्त ष्षांत कर क्रोध को कम करता है। हास्य और व्यंग्य दो अलग अलग भावनाऐं हैं । किसी की गलत बातों पर तंज कसना व्यंग्य है लेकिन किसी की कमजोरियों पर कटाक्ष उसे आघात देना है और हास्य विषुद्ध उन्मुक्त उल्लास है । नोक झोंक हंसी मजाक दूसरों को बेवकूफ बनाना एक दिन होता है जिसमें इस प्रकार के हास परिहास क्षम्य होते हैं । अप्रैल फूल या मूर्ख दिवस इसी श्रेणी में आता है । यहॉं तक कि मूर्ख सम्मेलन आदि आयोजित किये जाते हैं और कोई बुरा नहीं मानता है । अप्रैल माह के आने के साथ ही पहली अप्रैल आने वाली है चेहरे पर मुस्कान आजाती है ।
अनेक देषों में लोगों को मूर्ख बनाने की यह प्रथा प्रचलित है। इसकी ष्षुरुआत का सही पता तो नहीं चलता पर कुछ संकेत अवष्य उपलब्ध हैं। पहले अप्रिल से साल का आरम्भ होता था । कुछ लोगों का कहना है कि एक अप्रैल नव वर्ष के आठ दिवसीय समारोह का आखिरी दिन होता था। यह समारोह पच्चीस मार्च को प्रारम्भ होता था। इस दिन लोग अपने मित्रों परिचितों के साथ मजाक करने के लिये उन्हें मूर्ख बनाने का खेल खेलते थे।
रोम में मान्यता है कि प्लूटो ने अन्न की देवी सीयर्स की बेटी प्रासपाइन का अपहरण कर लिया। प्रासपाइन ने मॉं को बार बार आवाज दी। लेकिन प्लूटो ने उसकी आवाज को दूसरी ओर से आती कर दिया जिससे सीयर्स प्रासपाइन को ढूंढ नहीं पाई वह उसकी आवाज पर इधर एधर दौड़ती रही। सीयर्स मूर्ख बन गई इसी सिलसिले में मूर्ख दिवस के रूप में मनाया जाता है ।
ब्रिटेन के ष्षहर गोथम को टाउन ऑफ फूल्स कहा जाता है गोथम वासियों का मानना है कि 13 वीं ष्षताब्दी में मान्यता थी कि जिस सड़क से राजा की सवारी निकल जाये वह सार्वजनिक हो जाती थी। जैसे ही राजा का वहॉं से निकलने का फरमान आया वहॉं के निवासी मूर्खों जैसी हरकतें करने लगे जिससे वहॉं से सवारी नहीं निकली । राजा को बेवकूफ बनाने के उपलक्ष्य में उस दिन को मूर्ख दिवस के रूप में मनाते हैं और राजा उन निवासियांे को मूर्ख मानकर उस कस्बे को टॉउन आफ फूल्स कहता रहा वह दिन एक अप्रैल था। वैसे इंगलैंड में यह हमारी होली की तरह यह त्यौहार के रूप में मनाया जाता है । यह बच्चों का प्रिय त्यौहार है ं
माना जाता है कि मूर्ख दिवस का प्रारम्भ फ्रांस में हुआ। मूर्ख बनाने वालों को ‘पाइजन द एवरिल’ कहा जाता था । उस दिन एक सभा का आयोजन किया जाता था और सभापति चुना जाता उसे ‘ विषप आफ फूल्स ’ की उपाधि दी जाती थी । सभा में पुरुष महिलाओं का वेष धारण करते थे और महिलाएॅं पुरुषों का । वर्तमान में फ्रांस में पहली अप्रैल को एक हंसी मजाक भरा खेल ख्ेला जाता है । इस दिन लोग एकत्र होकर किन्हीं दो व्यक्तियों को चुनते हैं जिसमें एक को राजा पीते और दूसरे को रानी पीते कहा जाता हैं । इस समारोह में जो भाग नहीं लेते उनका मुॅह काला कर सींग लगा दिये जाते हैं और उन्हें गधे कहकर बुलाया जाता है ।
कुछ लोग कहते हैं कि एक अप्रैल को नोहा ने पानी उतरने से पहले कबूतर को संदेष देकर भेजा था। जो भी इस घटना को भूल जाता था उसे उस कबूतर की तरह संदेष लेकर सफल अभियान पर भेजते थे। पर सबसे अधिक संभावना इस बात की है कि अप्रैल फूल का दिन मनाने की प्रथा फ्रांस से ष्षुरु हुई। चार्ल्स चौदहवें ने 1564 में पोप के आदेष पर आदेष निकाला कि नया वर्ष एक अप्रैल के बजाय एक जनवरी से ष्षुरु होना चाहिये, पर बहुत से लोगों ने इस परिवर्तन को स्वीकार नहीं किया, जिन लोगों ने यह आदेष स्वीकार कर लिया था वे अपरिवर्तनवादियों को एक अप्रैल के दिन नकली उपहार नकली आयोजन के निमन्त्रण देकर उनका मजाक उड़ाने लगे। फ्रांस में प्रारम्भ में कागज की मछली बनाकर दूसरे की पीठ पर चिपका देते इस मछली को फ्रेंच भाषा में ‘‘पॅाइजन डी एव्रिल’ कहा जाता था । धीरे धीरे इसे नाम ही अप्रैल फूल दे दिया गया और इसने विष्व मूर्ख दिवस का रूप ले लिया और तरह तरह से लोगों का मजाक उड़ाया जाने लगा। एक अप्रैल को मुल्ला नसरूद्दीन दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। मुल्ला नसरुद्दीन का नाम हास्य के बेजोड़ बादषाह के रूप में लिया जाता है जो स्वयं पर हंसकर अपनी मूर्खताआंे से दूसरों को हंसाकर हास्य के माध्यम से बहुत गहरी बात कह देते थे । वे महान् सूफी संत और दार्षनिक थे। रोते हुए को कैसे हंसाया जाता है यह वे जानते थे। जीवन हंसते हंसते कैसे जिया जाये दुःख को भी हास्य का माध्यम बना देते थे ।
मार्च 1844 में डबलिन में ताष के पत्तेंा पर छापा गया कि पहली अप्रैल को ड्रगंडा तक ट्रेन की यात्रा मुफ्त है । हजारो आदमी स्टेषन पहुॅंच गये वहॉं जाकर ज्ञात हुआ कि रेलवे ने ऐसी कोई घोषणा नहीं की । स्कॉट लैंड में इसकी ष्षुरूआत गोक हंट के रूप में हुई । गोक छोटी सी चिड़िया है जिसका षिकार बहुत मुष्किल होता है । इसका ष्षिकार बेवकूफी वाला काम माना जाता है । वहॉं कहावत है ‘ कभी हंसो न मुस्कराओ, गोक के षिकार पर मील दर मील दौड़ते जाओ ’ यह दिवस स्कॉट लैंड में दो अप्रैल को मनाया जाता है ।
इटली में ये दिन समानता दिवस के रूप में मनाया जाता है । इस दिन मालिक नौकर बन जाता है और नौकर मालिक । मालिक सब काम करते हैं और नौकर मालिक के समान आज्ञा देते हैं । उस दिन खाना मालिक बनाते हैं और नौकर खाते हैं। नौकरों को पूर्ण स्वतंत्रता होती है कि नौकर मालिक सेे काम लें और न करने पर दंड दें । राज्य का कोई विधान उस दिन लागू नहीं होता ।
1850 में बोस्टन के एक समाचार पत्र में छपा कि ष्षहर के बाहर एक पेड़ के नीचे दबा खजाना मिला है,उत्सुकतावष लोग वहॉं पहुॅंचे लेकिन वहॉं कुछ नहीं था।
1860 में टॉवर ऑफ लंदन के एक महत्त्वपूर्ण अधिकारी ने लंदन के महत्त्वपूर्ण प्रतिष्ठित व्यक्तियों केा टॉवर ऑफ लंदन में सफेद दरवाजे के पीछे सफेद ष्षेरों केा नहलाने का निमंत्रण भेजा। एक अप्रैल को जब नियत समय पर सब वहाँ पहुँचे तब वहाँ न सफेद दरवाजा था न सफेद ष्षेर, बड़े बड़े ष्षब्दों में अंकित था अप्रैल फूल।
एक बार नीदरलैंड के राष्ट्रीय रेडियो प्रसारण में यह घोषणा की गई कि मषहूर चित्रकार रैम्ब्रा की ख्याति प्राप्त कलाकृति ‘द नाइट वॉच’ भूल से एक ऐसे द्रव्य के संपर्क में आ गई है जिससे वह निरंतर धंुधली पड़ती जा रही है। हजारों कला प्रेमी अमर कलाकृति के दर्षनार्थ संग्रहालय पहुँचे लेकिन वहाँ पहुँचकर उन्हें ज्ञात हुआ कि यह खबर मात्र फर्स्ट अप्रैल का मजाक था।
इसी प्रकार लंदन रिव्यू में पहली अप्रैल 1954 को परमाणु भट्टी के विषय में एक समाचार छपा तथा उसकी निर्माण विधि रेखाचित्रों सहित इतनी अधिक विष्वसनीय भाषा में छपी थी कि वैज्ञानिक इसे मात्र पहली अप्रैल की गप्प समझकर नहीं टाल सके और हंगरी के एटामिक एनर्जी इंस्टीट्यूट ने तो इस परमाणु भट्टी के संबंध में बड़े पैमाने पर पत्र व्यवहार भी किया।
आर्मस्टैंड के एक समाचार पत्र में एक सनसनी खेज खबर छपी कि स्थनीय चिड़ियाघर में एक बंदर को यांत्रिक उपकरणों की सहायता से बोलना सिखाया गया है ।जब दूसरे पत्र के संपादक ने यह खबर पढ़ी तब उसने अपने रिपोर्टरों को फटकारा कि उन्होंने यह खबर अपने अखबार के लिये क्यों नहीं जुटाई फिर उसने चिड़िया घर के निर्देषक से पूछताछ की । निर्देषक खुद परेषान था कि उसके चिड़िया घर में न ऐसा उपकरण था न बंदर । बाद में उन्हें ध्यान आया कि उन्हें अप्रैल फूल बनाया गया है ।1990 में दक्षिण अमेरिका की एक विज्ञापन ऐजेंसी ने घोषणा की कि एक मोटर कंपनी ने फाइव व्हील कार लॉंच की है ।
इटली के एक अखबार ने पहली अप्रैल को समाचार प्रकाषित किया कि आज प्रसि़़द्ध अभिनेत्री एस्टर्डम के रेलवे स्टेषन पर ष्षूटिंग के लिये आयंेगी। हजारो की संख्या में फिल्म प्रेमी अपनी चहेती अदाकारा के दर्षन करने स्टेषन पहुँचे। वहाँ उन्हें पता चला कि वे अप्रैल फूल बना दिये गये ।
1983 में ऐसोसिऐटेड प्रैस द्वारा समाचार प्रकाषित हुआ कि बोस्टन विष्वविद्यालय में इतिहास के प्रौफेसर जोसेफ बोस्किन द्वारा अप्रैल फूल मनाये जाने के मूल कारण की खोज की गई है वहॉं आये लोगों को प्रौफेसर ने बताया एक बार बेंजेटाइन के ष्षासक से कोंस्टेटिन के जोकर ने जाकर कहा कि वह भी उसी सफलता से ष्षासन कर सकता है जिसप्रकार कॉंस्टेटिन कर सकता है कॉंस्टेटिन ने जोकर को एक दिन का ष्षासक बना दिया वह दिन था फर्स्ट अप्रैल । प्रौफेसर की सूचना केवल फर्स्ट अपै्रल बनाना मात्र थी ।
सोवियत न्यूज पेपर ने मूर्ख दिवस संदेष के रूप में सूचना प्रकाषित कराई कि रषियन फैडरेषन ने डायमंड जड़े हथ गोले बनाने की योजना बनाई है। अपने दुष्मनों को पीट पीट कर खत्म करने की वजाय इन हथगोलों का प्रयोग करें ।
1957 में बीबीसी द्वारा एक सूचना प्रसारित हुई सचित्र ,जिसमें महिलाऐं लंबी लंबी स्पैगैटी पेड़ से तोड़ रही थी ,बाद में यह एक मजाक निकला ।
1962 में स्वीडन में ब्लैक एण्ड व्हाइट टीवी का जमाना था एक ही चैनल होता था उस चैनल पर प्रसारित हुआ कि आप अपने टीवी को रंगीन कर सकते हैं केवल अपने रंगीन मोजों को स्क्रीन पर लगा दो । जिसने सुना प्रयास किया बाद में ज्ञात हुआ मूर्ख बन गये ।
1994 को अमेरिकन रेडियो स्टेषन से एक संदेष प्रसारित हुआ कि पेप्सी के लोगो टेटू को कान पर बनाने वाले को दस प्रतिषत का डिसकाउंट दिया जायेगा, अब क्या था युवा और किषोर टैटू बनाकर डिसकाउंट के लिये पहुॅंच गये वहॉं पहुॅंच कर उन्हें ज्ञात हुआ कि वे बेवकूफ बन गये ।
कुछ साल पहले वृहस्पतिवार एक अपै्रल को बम्बई से निकलने वाले मिड डे अखबार में एक समाचार छपा ‘नया वाइरस महामारी’ समाचार में खतरे की संभावना व्यक्त करते हुए लिखा था कि गिलगिमेष नामक वायरस विष्व के वैज्ञानिकों के लिये सिरदर्द बन गया है। एच.बी.जी.टू. नामक वायरस के कारण मानव के व्यवहार में परिवर्तन आ जाता है। कम्प्यूटर के पर्दे पर तीव्र प्रकाश की किरणें परिलक्षित होती हैं लेकिन गति तीव्रता के कारण वे दिखाई नहीं देती लेकिन ऐसी किरणें निकलती हैं जो मस्तिष्क पर असर डालती हैं। दृष्टि और स्मृति का खोना इसका कोई इलाज नहीं है। यह वायरस सबसे पहले टसकोन एरिजोना में पाया गया। इस समाचार में सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक जैसे डॉ॰ अविनाष खुर्पेकर ;असंक्रमीकरण अनुसंधान संस्थान के डॉ॰ एन्ड्रयू क्वारी ;राष्ट्रीय प्रायोगिक संस्थान आदि के नाम भी उद्धृत थे। डॉ॰ खुर्पेकर के अनुसार दस मिनट लगातार कम्प्यूटर की ओर देखने से यह वायरस उन पर हमला कर सकता था।
बम्बई की सड़कों पर मिड डे के आते ही कुछ ही देर में उसके दफ्तर का फोन खड़खड़ाने लगा दफ्तर के आगे अधिक जानकारी पाने वालों की लाइन लग गई। कम्प्यूटर पर लगातार काम करने वालों के मुँह पर हवाई उड़ने लगी। स्वयं मिड डे के दफ्तर में कम्प्यूटर पर काम करने वालों का बुरा हाल था। बहुत मुष्किल से संपादकीय विभाग यह समझा पाया कि यह अप्रैल फूल का मजाक था। कुछ ने हंसकर मजाक का स्वागत किया तो कुछ परेषान मुंबादेवी के पास बम फट चुका था ऊपर से इस तरह का मजाक।
सिने ब्लिट्ज ने अप्रैल फूल का मजाक श्री देवी की जुड़वा बहन प्रभा देवी की खोज के रूप में किया जबकि प्रकाषित फोटो अनुपम खेर का स्त्री लिवास में था। अनुपम खेर हंस कर बोले मेरे जीवन का सबसे मजेदार रोल था
दूसरे साल सिने ब्लिट्ज ने अमिताभ बच्चन और अर्चना पूरन सिंह के प्यार के नीड़ के विषय में लेख छापा। जया अमिताभ और उनके परिवार को पहले ही इस मजाक के विषय में सूचित कर दिया गया था। बिजली की तेजी से यह प्रेमकथा जबान दर जबान थी। यद्यपि उसी पत्रिका में ये अंकित था कि यह मात्र अप्रैल फूल का मजाक है।
1981 में करंजिया ने अपने डेली पेपर में पहली अप्रैल को निकाला था कि इंडियन एक्प्रेस को मुख्यमंत्री ए॰आर॰ अंतुले ने खरीद लिया है उन दिनों अरुण ष्षौरी अंतुले पर सीमेंट धांधली के आरोप लगा रहे थे। इस समाचार के लिये इंडियन एक्प्रेस ने करंजिया पर मुकदमा भी ठोक दिया। करंजिया ने ही एक साल यह समाचार दिया कि नीलम संजीव रेड्डी के नेतृत्व में दक्षिण भारत एक नया देष बनाने जा रहा है। इन सब समाचारों के लिये बहुत ऊधम भी हुआ कि ऐसे समाचार मजाक में भी नहीं देने चाहिये। फिर भी समय समय पर निकलते रहते हैं।
उन दिनों सौरभ गांगुली भारतीय टीम के कप्तान थे हरभजनसिंह ,द्रविड़ और युवराज गुस्से से विफरते हुए गांगुली के पास पहुॅंचे और गांगुली के सामने एक अखबार फेंक दिया इस अखबार के पहले पन्ने पर गांगुली का साक्षात्कार छपा हुआ था। साक्षात्कार में लिखा था कि हरभजन चकर है और गेंद से छेड़छाड़ करना उसकी पुरानी आदत है । उसे टीम से बाहर कर देना चाहिये। युवराज का तो लाइफ स्टाइल ही ऐसा है कि वह खेल पर ध्यान दे ही नहीं सकता । जहीर का समय तो खत्म हो चुका है । द्रविड़ के बारे में भारतीय कप्तान ने कहा कि मेरी कप्तानी में द्रविड़ ने कभी भी अपना सौ प्रतिषत नहीं दिया उसका ध्यान मेरे फैसलों के विरोध में रहता है इतना ही नहीं राइट के बारे में सौरभ के हवाले से ही इस साक्षात्कार में छपा था कि राइट अब बूढ़े हो चुके हैं ,वे अब कोच की जिम्मेदारी संभालने लायक नहीं हैं बीसीसीआई उन्हें निकालने का विचार कर रही है । इस साक्षत्कार को दखकर सौरभ हक्के बक्के रह गये और साथियों को सफाई देने लगे कि मैं बेकसूर हॅूं लेकिन कोई कुछ सुनने को तैयार नहीं था । चारो ओर से जवाब तलब किया जा रहा था । गागुंली पसीने पसीने हो चुके थे इतने में हरभजन लिखित में देने लगे कि अब गांगुली की कप्तानी में नहीं खेलेंगे । परेषान गांगुली ने उसे पढ़ने के लिये खोला तो उस पर लिखा था अप्रैल फूल ।
कुछ वर्ष पूर्व 31 मार्च को आगरा के एक स्थानीय अखबार में प्रकाषित हुआ कि 1 अप्रैल को वी एलसी सी की वंदना लूथरा 4 बजे से होटल होली डे इन में त्वचा संबंधी विषयों पर बतलायेंगी। एक तारीख को 4 बजे से महिलायें एकत्रित होने लगीं ,कहीं भी किसी प्रकार का आयोजन न देखकर नोटिस बोर्ड की ओर देखा तो हंसकर मजा लेने लगीं । नोटिस बोर्ड पर लिखा था ‘ अप्रैल फूल’।
सन् 2010 जार्डन के जाफर कस्बे के एक स्थानीय अखबार ने एलियन के घरती पर आने की खबर छाप कर लोगों को अप्रैल फूल बनाया तो वहॉं के मेयर को गुस्सा आ गया । अलधाद नाम के अखबार ने एक अप्रैल को पहले पन्ने पर एलियन के बारे में बड़ी सी खबर छाप दी। इसमें लिखा था कि बीती रात को दस ऐलियन जाफर कस्बे में आये उन्होंने कस्बे में आग लगा दी और लोगों को डराया। इस खबर को पढ़कर मेयर मुहम्मद म्लेहिहान चिंतित हो गये और आनन फानन में उन्होंने सुऱक्षा बलों को एलियन को पकड़ने का आदेष दे दिया । लेकिन फिर उन्हें सच्चाई पता चली तब उनके गुस्से का ठिकाना नहीं रहा । उन्होंने कहा ‘खबर का असर इतना बुरा था कि अभिभावकों ने डर के मारे अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा । कस्बे में रहने वाले 13 हजार भयाक्रांत लोगों ने अपने घर खाली कर दिये । जार्डन के सुरक्षा अघिकारी ने बताया कि खबर छपने के बाद कस्बे में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी, इमर्जेंसी लगाने की तैयारी पूरी हो चुकी थी । मेयर ने गुस्से में अखबार के खिलाफ मुकदमा करने की ठानी लेकिन अखबार ने माफी मांगते कहा हमारी मकसद लोगों को हंसाना था न कि डराना ।
वर्ष 2000 में पेटा द्वारा घेाषणा की गई कि टैक्सास झील में बेहोषी की दवा डाली जायेगी इसकी वजह से मछलियॉं काफी देर तक सोती रहेंगी फिषिंग टूर्नामेंट का समय था इससे आम जनता का गुस्सा भड़क उठा और सरकारी तंत्र के विरोघ में लोग सड़कों पर उतर आये बाद में मालुम चला कि यह पेटा का मूर्ख बनाने का तरीका था ।
एक बार समुद्र की लहरों से बिजली सप्लाई कराये जाने की घोषणा की गई तो एक बार मास्क पहनना आवष्यक है यह निर्देष दिया गया। एक बार ब्रिटेन और फ्रांस के बीच बनने वाले भूमिगत मार्ग का टेन्डर बम्बई के फोन विभाग को दिया गया बताया क्योंकि वह जमीन खोदने में एक्सपर्ट है।
इस प्रथा के मूल में जीवन की व्यस्तताओं, तनाव आदि के बीच कुछ पल हंसी के हैं। और कुछ नहीं। स्वस्थ मजाक स्वास्थ को अमरत्व प्रदान करता है।
डॉ॰ ष्षषि गोयल चिदम्बरा ा3/28 ए/2, जवाहर नगर रोड, खंदारी चौराहा, आगरा-282002मउंपस रूेींेीपहवलंस3/हउंपसण्बवउ