गर्मी में ठंडी हवा ताजगी देती है तो सर्दी में धूप की गर्मी राहत,धूप तो गर्मी में भी निकलती है,सर्दी में भी पर उसकी नीयत बदल जाती है। हर मौसम का अपना आनंद है । बसंत में फूल का,वर्षा में भीगी भीगी सी धरती,पेड़ पौधे धुले धुले से जैसे प्रसन्नता से नाच रहे हों पर गर्मी में तपन में भी गर्म हवा के साथ लहराते ही व्यतीत करते हैं। अपने दुःखों के साथ भी जीना सीखिये। चुल्लू चुल्लू कर उन्हें उलीच दीजिये बसंत आयेगा अवश्य आयेगा ।
जीवन एक ऐसा खेल है जिसमें सांप हैं तो सीढ़ियां भी हैं । सांपों से बचना आना चाहिये,जितनी तेजी से समय का सदुपयोग करेंगे सीढ़ियां भी उतनी तेजी से चढेंगे ।कभी अनेक कठिनाइयां एक के बाद एक सामने आ जाती हैं,कभी हंसते हंसते समय गुजरने लगता है,अगर चाुनौतियों से घबराने लगेंगे तो जीवन के इस खेल में हार जायेंगे। साहस से काम लेना ही चुनौती है। अगर निराशा होती है जो अपने ऊपर से आत्मविश्वास डगमगाने लगता है। हर व्यक्ति के आगे फूल तो हमेशा नहीं रहते और फूल होते हैं तो वो सूखते भी हैं,पर उन सूखे फूलों को भी सुगंध में परिवर्तित करते जाना यही जीवन है। कचरे की तरह फेंक देना हताशा है। जीवन की चुनौतियों से भागना है । सामना करने से घबराने से तो जीवन की हर घड़ी झेलने लायक नहीं रहेगी ।