Wednesday, 29 July 2026

man

 मानव मन में अनेक इच्छाऐं जन्म लेती हैं,और वे इच्छाएं कल्पना में बदलती हैं ।कल्पना और इच्छाशक्ति मिलकर यथार्थरूप धारण करती हैं । जब तक इच्छाशक्ति प्रबल नहीं होगी कल्पना यथार्थ में नहीं बदलेगी। मन के अंतरतम कोने में जब कल्पना रूप लेना आरंभ करती है,और जब तक वह बाहर  आती है वह प्रबल रूप धारण कर लेती है और यही प्रबलतम इच्छा सफलता की नींव रखती है। व्यक्ति उन आवश्यकताओं की ओर देखता है उसकी दृष्टि वहीं घूमती रहती है कि किस प्रकार से कल्पना यथार्थ में बदल सकती है और जब अत्यधिक बैचेनी होने लगती है  तब वह कल्पना यथार्थ की ओर बढ़ने लगती है। लेकिन अपने ऊपर विश्वास रखना होगा,अगर अपने विश्वास से डगमगा गये तो इच्छा अधूरी रह जायेगी,और कल्पना आकाश की ऊचाइयां को तो छुएगी पर धुंआ बनकर उड़ जायेगी।

अगर अपनी क्षमताओं पर अपनी कल्पना पर विश्वास नहीं करेंगे तो अवचेतन में नकारात्मक तत्व जुड़ने लगेंगे जो आपके पंखों को अवश कर देंगे । वे फड़फड़ायेंगे पर उन पंखों को लगेगा कि नहीं ये नहीं उड़ेंगे और कहीं  बिखर जायेंगे। यदि विश्वास नहीं डगमगायेगा तो असफलता आपको नया मार्ग दिखायेगी। असफलता से सीखेंगे जो छूटा है वह सामने आयेगा । असफलता ही सफलता का मार्ग दिखायेगी। अपने ऊपर अटूट वियवास रखें मस्तिष्क सकारात्मक रखें। जिन सपनों को देखा है उन पर डगमगायें नहीं सपने साकार होंगे ।


Sunday, 26 July 2026

swati boond

 स्वाति बूंद पावन परम सीप पड़े मोती बने,माटी में मिल जाये सुवर्ण बने नहीं तो माटी में मिल कर उसे उपजाऊ बना देती है, और बीज प्रस्फुटित होने के लिये तत्पर हो जाते हैं।

असफलता हर किसी के जीवन में आती हैइसलिए उससे हताश न हों,बल्कि उसका सामना करें। सफलता हासिल करने के लिए आपका निरंतर प्रयास और सकारात्मक मानसिकता के साथ अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण दिखाना होगा । ऐसा करके आप अपने सपनों को तो हासिल करेंगे ही ,दूसरों के लिए प्रेरणा स्त्रोत भी बनेंगे ।


Thursday, 23 July 2026

manushya ki shakti

 मनुष्य जो कुछ भी है अपने अंदर की शक्ति से है और वह शक्ति ईश्वर की कृपा से मिलती है। ईश्वर की कृपा अर्थात् स्वयं की शक्ति के साथ ईश्वरीय शक्ति मिलकर मनुष्य को कुछ कर गुजरने की इच्छा दे देते हैं। कभी भी मन से नहीं हारना चाहिये। मन के हारे हार मन के जीते जीत। परन्तु यह भी न सोचें कि जो कुछ भी है उसने किया है स्वयं ने ,वह सब कुछ है। जब तक ईश्वरीय इच्छा न होगी मानव कुछ नहीं कर सकता है ।दाने दाने पर लिखा है खाने वाले का नाम ,जिस दाने पर हमारा नाम होगा वही हमें मिलेगा और हम सोचें कि यह दाना हमने उठाया है,इसके हम अधिकारी हो गये,नहीं जब तक ईश्वर की इच्छा नहीं होगी दाना आपके मंुह में नहीं जायेगा। परंतु यह सोच लें कि ईश्वर हमारे मुह में उठाकर दाना डालेगा तो यह भी बिना अपनी इच्छा के नहीं होगा। हर कार्य के पीछे ईश्वरीय इच्छा और अपनी इच्छा दोनों होते हैं। जब व्यक्ति यह कहने लगता है मैं ,मैं ही सब कुछ कर रहा हूं,मैंने यह किया इसलिए यह पाया। यहां पर वह गलत है,प्रयत्न अपनीे स्थान पर है,ईश्वरेच्छा अपने स्थान पर है। जब  मनुष्य हर कार्य को करके ईश्वर को धन्यवाद करता है तभी वह वास्तव में ईश्वर का कृपा पात्र होता है 

Tuesday, 21 July 2026

ishwar ke prati prem

 

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Sunday, 19 July 2026

old age

 वृद्धावस्था जीवन का अवसान नहीं ,वरन् अनुभवों का खजाना है जिससे आने वाली पीढ़ी उनके अनुभवों से सीखकर अपने जीवन काल का समय बचा सकती है। जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय है। जीवन रूपी जहाज का कप्तान यदि अनुभवी है तो परिवार को अच्छी तरह ले जा सकता है। वह गहन समुद्र को पार करा देता हे। एक तरह से युवा पीढ़ी के जीवन में वृद्ध व्यक्ति के अनुभव जुड़ जाते हैं तो उसका समय बढ़ जाता है उसे सीखने का समय नहीं निकालना पड़ता। वृद्धावस्था परिपक्वता लाती है। शरीर में शिथिलता अशक्तता होती है परंतु मस्तिष्क सक्रिय रखने से और उर्वर होजाता है,क्योंकि आवश्यकताऐं सीमित हो जाती हैं और ध्यान सांसारिकता पर न होकर सक्रिय सोच में बदल जाता है। वृद्धावस्था जीवन के अनुभवों से सिंचित पका हुआ फल बन जाता है ।